लीजिए, अब मोदी जी के विरोधियों को इसमें भी प्राब्लम हो गयी। मोदी जी बनारस गए। बनारस में मोदी जी ने एक बार फिर वंदे भारत रेलगाड़ी को हरी झंडी दिखाई। हरी झंडी की मुंह दिखाई में नार्थ ईस्ट रेलवे के 3 करोड़ 37 लाख रु0 खर्च हो गए। बस अब मोदी जी के विरोधी इसी बात का बतंगड़ बनाने में लगे हैं। कह रहे हैं कि सिर्फ एक झंडी दिखाने का खर्चा सवा तीन करोड़ से ऊपर! यह तो पब्लिक के पैसे की बर्बादी है, सरासर लूट है। कहां तो इसकी खुशी मनानी चाहिए थी कि मोदी ने एक और रेलगाड़ी चलवायी। और कहां भाई लोग झंडी दिखाने के खर्चे का मातम मना रहे हैं।
इसी को तो कहते हैं-तेली का तेल जले, मशालची की छाती फटे। झंडी दिखाई मोदी जी ने। खर्चा किया नार्थ ईस्ट रेलवे ने। और खर्चे का दर्द हो रहा है विरोधियों को। क्या रेलवे ने उफ तक की है कि उसके सवा तीन करोड़ से ज्यादा खर्च हो गए? कभी करेगी भी नहीं। मोदी जी की अमृतकाल की संस्कारी रेलवे है। और हमारे संस्कार कहते हैं कि शुभ कार्यों के मौके किस्मत से ही आते हैं। इसलिए, कार्य-प्रयोजन के मौके पर पैसे का मुंह नहीं देखना चाहिए। दिल खोलकर खर्च करना चाहिए। उधार लेना पड़े तो उधार लेकर भी खर्च करना चाहिए, पर खर्च करने में कोताही नहीं करनी चाहिए। अगर कहीं हरी झंडी दिखाने स्वयं मोदी जी पहुंच रहे हों, तब तो खर्च को गिनना ही क्या?
और ये मोदी जी के विरोधी जो जनता के पैसे की बबार्दी, फिजूलखर्ची वगैरह का इतना शोर मचा रहे हैं, यह तो और भी फालतू है। हम पूछते हैं कि क्या आपको पब्लिक ने कहा है कि मोदी जी के झंडी हिलाने पर, सवा तीन करोड़ से ज्यादा का खर्चा, उसे बहुत ज्यादा लग रहा है? हर्गिज नहीं! फिर ये पब्लिक के नाम पर बहुत ज्यादा का दावा करने कहां से आ गए? क्या यह पब्लिक का अपमान ही नहीं है? विरोधी क्या कहना चाहते हैं कि भारत की पब्लिक इतनी कंजूस है कि अपने राजा के एक दर्शन पर सवा तीन करोड़ रुपये खर्च करना उसे फिजूलखर्ची लगेगा। एक बात सोचने वाली है। क्या मोदी जी के किसी कार्यक्रम पर पहली बार सवा तीन करोड़ रुपये खर्च हुए हैं?
अरे उद्घाटन कार्यक्रम छोड़ो, मोदी जी फोटो छपाने/ दिखाने पर ही हर साल हजारों करोड़ रुपये खर्च होते हैं। और विदेश यात्राओं पर तो उससे भी ज्यादा। और तो और मोदी जी की तो पोशाकों पर भी सैकड़ों करोड़ खर्च होते हैं। और यह सब क्या मोदी जी पब्लिक की पीठ पीछे करते हैं। बाकायदा एक-एक ड्रेस की कई-कई तस्वीरें पब्लिक को दिखा कर करते हैं। पब्लिक ने रत्तीभर भी आपत्ति की? आपत्ति करना तो दूर, पब्लिक तो मोदी की शान-शौकत पर फिदा है। उसे पता है कि उसकी किस्मत में चाहे गरीबी, लाचारी ही लिखी है, उसके नसीब में तो दुनिया में आगे जाने नहीं लिखा है, पर कम से कम उसका राजा तो शान-शौकत में दुनिया भर में सबसे आगे है। पुतिन सवा तीन करोड़ छोड़ो, पचास लाख रूबल भी खर्च कर के तो दिखाए, रेलगाड़ी को हरी झंडी दिखाने पर! राजा पाला है, तो उसका खर्चा तो उठाना ही पड़ेगा।

