Saturday, March 21, 2026
- Advertisement -

ज्ञान, स्क्रीन और संवेदना का संकट

09 1

‘ज्ञान बढ़ा पर भाव क्या, अब भी मन लाचार’—यह पंक्ति केवल एक दोहा नहीं, बल्कि इक्कीसवीं सदी के मनुष्य की सामूहिक आत्मस्वीकृति है। हमने जितना ज्ञान अर्जित किया है, उतना शायद मानव इतिहास के किसी भी कालखंड में नहीं किया गया। सूचनाएं उंगलियों पर नाच रही हैं, दुनिया एक छोटे से स्क्रीन में सिमट आई है और विज्ञान ने जीवन को सुविधाओं की पराकाष्ठा तक पहुंचा दिया है। इसके बावजूद—या शायद इसी कारण—मनुष्य भीतर से पहले से अधिक असहाय, असंतुलित और बेचैन दिखाई देता है। आज का संकट ज्ञान के अभाव का नहीं, बल्कि विवेक, संवेदना और ठहराव के लुप्त होने का संकट है। स्क्रीन की चकाचौंध ने केवल हमारी आंखों को नहीं, हमारी चेतना को भी प्रभावित किया है। मोबाइल, लैपटॉप और डिजिटल माध्यमों ने सूचना को लोकतांत्रिक तो बनाया, पर सोच को गहराई नहीं दी।

हम पहले से कहीं अधिक पढ़ते हैं, पर पहले से कहीं कम समझते हैं। हम देखते बहुत हैं, पर महसूस कम करते हैं। हर पल अपडेट रहना आज सचेत होने की पहचान बन गया है, लेकिन इसी निरंतर अपडेट ने मनुष्य को भीतर से थका और खाली कर दिया है। सोशल मीडिया पर विचार नहीं, प्रतिक्रियाएं जन्म लेती हैं। वहां ठहराव नहीं, केवल तात्कालिक उत्तेजना है। सच और झूठ, गंभीरता और सतहीपन, संवेदना और सनसनी—सब एक ही मंच पर समान महत्व के साथ परोसे जा रहे हैं। ऐसे वातावरण में सत्विचार, जो समय, मौन और आत्मसंवाद से उपजते हैं, धीरे-धीरे विलुप्त होते जा रहे हैं।

आज का मनुष्य ऐसे समय में जी रहा है जहां संवाद लगातार हो रहा है, पर संवादहीनता भी उतनी ही गहरी है। मोबाइल के कक्ष में आवाजें चिल्ला रही हैं—कॉल, मैसेज, वीडियो, मीटिंग्स, रील्स—हर ओर शोर है। लेकिन इसी शोर के बीच मनुष्य अपने ही भीतर की आवाज सुनने की क्षमता खो बैठा है। बाहर की बातचीत बढ़ी है, भीतर का संवाद घटा है। जब भीतर की खामोशी को सुना नहीं जाता, तो वह धीरे-धीरे कुंठा, आक्रोश और असंतुलन में बदल जाती है। आज रिश्तों में बढ़ता तनाव, समाज में बढ़ती असहिष्णुता, आॅनलाइन अपमान और वास्तविक जीवन में बढ़ती असंवेदनशीलता—ये सब उसी अनसुनी खामोशी के लक्षण हैं।

हम बोलना जानते हैं, पर सुनना भूल चुके हैं। संवाद की यह विफलता केवल व्यक्तिगत नहीं, सामाजिक भी है। जब समाज सुनना छोड़ देता है, तो असहमति शत्रुता में बदल जाती है और विचार विमर्श के स्थान पर टकराव जन्म लेता है। विज्ञान ने निस्संदेह मानव जीवन को अभूतपूर्व सुविधाएँ दी हैं। रोगों पर नियंत्रण, संचार की गति, यात्रा की सरलता और उत्पादन की क्षमता—इन सब क्षेत्रों में विज्ञान ने क्रांति की है। लेकिन इसी विज्ञान से यह अपेक्षा भी जुड़ी थी कि वह मनुष्य को अधिक संतुलित, अधिक संवेदनशील और अधिक जिम्मेदार बनाएगा। दुर्भाग्यवश, ऐसा नहीं हुआ। विज्ञान ने हमें शक्ति दी, पर संयम नहीं सिखाया। गति दी, पर विराम नहीं। साधन दिए, पर मयार्दा नहीं।

आज सबसे बड़ा प्रश्न यह नहीं है कि हम क्या कर सकते हैं, बल्कि यह है कि हमें क्या करना चाहिए और क्या नहीं। तकनीक हमें आगे बढ़ने के असंख्य रास्ते दिखाती है, पर यह नहीं बताती कि कब रुकना है। यह निर्णय विवेक करता है, और विवेक का विकास मशीनों से नहीं, मानवीय मूल्यों से होता है। हमने ज्ञान को केवल संग्रहण तक सीमित कर दिया है। डिग्रियाँ बढ़ीं, पर दृष्टि संकुचित होती गई। विशेषज्ञता बढ़ी, पर समग्र समझ घटती चली गई। आज का शिक्षित व्यक्ति भीड़ में शामिल होने में तेज है, पर अकेले खड़े होकर सच बोलने में हिचकता है। यह शिक्षा का नहीं, सूचना के बोझ का परिणाम है।

इस स्थिति का समाधान तकनीक को नकारने में नहीं, बल्कि उसे मानवीय मूल्यों के अधीन रखने में है। स्क्रीन से भागना संभव नहीं, पर उसके सामने नतमस्तक होना भी अनिवार्य नहीं। हमें संवाद को केवल बोलने की प्रक्रिया नहीं, सुनने की कला बनाना होगा। ज्ञान को आत्मचिंतन से जोड़ना होगा और विज्ञान को नैतिकता के साथ संतुलित करना होगा। परिवार, शिक्षा और समाज—तीनों स्तरों पर यह पुनर्संरचना आवश्यक है। बच्चों को केवल स्मार्ट नहीं, संवेदनशील बनाना होगा। शिक्षा को केवल प्रतिस्पर्धा का मैदान नहीं, बल्कि मानवीय विकास का माध्यम बनाना होगा। समाज को यह स्वीकार करना होगा कि गति के साथ ठहराव भी उतना ही आवश्यक है।

आज आवश्यकता किसी नए आविष्कार की नहीं, बल्कि पुरानी मानवीय समझ की पुनर्स्थापना की है। तकनीक हमारे जीवन का साधन बने, लक्ष्य नहीं। संवाद शोर नहीं, सेतु बने। और ज्ञान केवल बढ़े नहीं, मनुष्य को बेहतर बनाए। यदि हम यह संतुलन नहीं बना पाए, तो आने वाली पीढ़ियां शायद अत्यंत उन्नत होंगी—पर भीतर से और भी अधिक लाचार।

spot_imgspot_img

Subscribe

Related articles

Gangaur Vrat 2026: गणगौर पूजा आज, जानें समय, नियम और विधि

नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत...

World News: ईरान संकट पर ट्रंप का सियासी संकेत, जंग रोकने के विकल्प पर विचार

जनवाणी ब्यूरो | नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की राजनीति चुनाव...

Punjab News: अमृतसर वेयरहाउस मैनेजर Suicide Case, मंत्री का इस्तीफा, जांच जारी, सियासत गरम

जनवाणी ब्यूरो | नई दिल्ली: पंजाब वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन के अमृतसर...

Andhra Pradesh News: आंध्र प्रदेश में बस में लगी भीषण आग, विधायक समेत 37 यात्री सुरक्षित

जनवाणी ब्यूरो | नई दिल्ली: आंध्र प्रदेश के विजयनगरम जिले...
spot_imgspot_img