जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) ने राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को पार्टी का उपनेता पद से हटाने का फैसला किया है। इसके पीछे पार्टी ने चड्ढा पर आरोप लगाया है कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ बोलने में हिचकिचाते हैं और संसद में पार्टी की लाइन का पालन नहीं करते।
पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी ने कहा कि जब मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया गया था, तब चड्ढा ने उस पर हस्ताक्षर करने से मना किया था। वहीं पार्टी ने गुरुवार को राज्यसभा सचिवालय को पत्र भेजकर चड्ढा को उपनेता पद से हटाने की औपचारिक सूचना दी। पंजाब से सांसद और उद्योगपति अशोक मित्तल को नया उपनेता नियुक्त किया गया है।
AAP नेता ढांडा ने सोशल मीडिया पोस्ट में चड्ढा पर आरोप लगाया कि वे पिछले कुछ वर्षों से डर का प्रदर्शन कर रहे हैं और देश के अहम मुद्दों पर बोलने से बच रहे हैं। उन्होंने कहा, “हम केजरीवाल के सिपाही हैं। निडरता हमारी पहली पहचान है। अगर कोई मोदी से डरता है, तो क्या वह देश के लिए लड़ पाएगा?”
ढांडा ने यह भी कहा कि संसद में पार्टी को बोलने के लिए बहुत कम समय मिलता है। इस सीमित समय का इस्तेमाल या तो देश के लिए संघर्ष करने में होना चाहिए, या फिर “हवाई अड्डे की कैंटीन में समोसे सस्ते करवाने” जैसी मामूली मांगों में नहीं। उन्होंने चड्ढा पर गुजरात और पश्चिम बंगाल में भाजपा द्वारा आप कार्यकर्ताओं और वोटरों के खिलाफ कार्रवाई पर चुप रहने का आरोप भी लगाया।
दिल्ली AAP के अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने कहा कि चड्ढा राज्यसभा में अहम मुद्दों की बजाय ‘सॉफ्ट PR’ पर ध्यान केंद्रित करते रहे। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि चड्ढा ने पंजाब के रोके गए फंड और अन्य संवेदनशील मुद्दों को उठाया नहीं, जबकि समोसे का मुद्दा उठाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब कोई सांसद पार्टी लाइन से हटता है, तो कार्रवाई होती है।
वहीं, राघव चड्ढा ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि उनकी संसद में चुप्पी को हार समझा जाना गलत है। उन्होंने जोर देकर कहा कि वे लगातार जनता से जुड़े मुद्दों, जैसे डिलीवरी राइडर्स की समस्याएं, खाने में मिलावट, टोल और बैंकिंग शुल्क, कंटेंट क्रिएटर्स पर टैक्स और टेलीकॉम कंपनियों की अनुचित प्रथाओं को उठाते रहे हैं।
चड्ढा ने कहा, “जब भी मुझे संसद में बोलने का मौका मिलता है, मैं आम लोगों के मुद्दे उठाता हूं। क्या ऐसा करना कोई अपराध है? मेरी चुप्पी को मेरी हार मत समझो। मैं वह नदी हूं जो समय आने पर बाढ़ बन जाती है।”
संसद में नई नियुक्ति के साथ, अशोक कुमार मित्तल AAP के राज्यसभा उपनेता बन गए हैं। चड्ढा अप्रैल 2022 से सांसद हैं और वे जनहित के मुद्दों पर कई बार सुर्खियों में रहे हैं। पिछले महीने उन्होंने “सरपंच पति” या “पंचायत पति” की प्रथा पर भी चिंता जताई थी, जिसमें पंचायत की आरक्षित सीटों पर चुनी गई महिलाएं केवल नाममात्र की मुखिया होती हैं, जबकि असली सत्ता उनके पुरुष रिश्तेदार संभालते हैं।

