जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: घरेलू शेयर बाजार में आज कारोबार की शुरुआत कमजोर रुख के साथ हुई, जहां शुरुआती सत्र में ही भारी मुनाफावसूली देखने को मिली। बाजार में गिरावट के इस माहौल ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है, जबकि वैश्विक संकेत भी नकारात्मक बने हुए हैं।
प्रमुख सूचकांकों में गिरावट
बंबई स्टॉक एक्सचेंज (BASE) का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 361.62 अंकों की गिरावट के साथ 76,907.78 के स्तर पर आ गया। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी भी 134.90 अंक टूटकर 23,980.60 पर पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में ही बाजार पर दबाव साफ नजर आया।
सेक्टोरल इंडेक्स का मिला-जुला रुख
बाजार में ज्यादातर सेक्टर लाल निशान में कारोबार करते दिखे। बैंकिंग, वित्तीय, रियल एस्टेट और मेटल सेक्टर में सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला। इसके विपरीत, आईटी और मीडिया शेयरों में कुछ हद तक मजबूती रही। एफएमसीजी और फार्मा सेक्टर अपेक्षाकृत सुस्त नजर आए, जिससे बाजार में व्यापक खरीदारी का अभाव दिखा।
रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर
मुद्रा बाजार में भी निराशाजनक रुख बना हुआ है। भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 17 पैसे गिरकर 95.40 के सर्वकालिक निचले स्तर पर पहुंच गया, जो निवेशकों के लिए चिंता का विषय है।
वैश्विक बाजारों का कमजोर संकेत
एशियाई और वैश्विक बाजारों में भी दबाव देखने को मिला। ऑस्ट्रेलिया का S&P/ASX 200 सूचकांक 0.8% गिरा, जबकि हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स 1.4% तक टूट गया। यूरो स्टॉक्स 50 फ्यूचर्स में भी 0.4% की गिरावट दर्ज की गई, जिससे घरेलू बाजार पर भी असर पड़ा।
गिरावट के प्रमुख कारण
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, मौजूदा गिरावट के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारक जिम्मेदार हैं:
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल: होर्मुज क्षेत्र में तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमतें बढ़कर करीब 113 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं।
विदेशी निवेशकों की चिंता: अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड 4.44% तक पहुंचने और रुपये में कमजोरी ने विदेशी निवेशकों का भरोसा कमजोर किया है।
सीमित एफआईआई सपोर्ट: हालिया खरीदारी के बावजूद विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की भूमिका बाजार को स्थायी सहारा देने में कमजोर मानी जा रही है।
आगे का रुख क्या रहेगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि निकट भविष्य में बाजार का रुख सतर्क बना रह सकता है। निवेशकों की नजर अब कंपनियों के चौथी तिमाही के नतीजों और प्रबंधन की भविष्य की रणनीतियों पर रहेगी। वैश्विक अनिश्चितताओं और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच बाजार में स्थिरता आने में समय लग सकता है।
निवेशकों के लिए सलाह
मौजूदा परिस्थितियों में निवेशकों को जल्दबाजी में फैसले लेने से बचना चाहिए और मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों पर ही ध्यान केंद्रित करना चाहिए। दीर्घकालिक निवेश रणनीति अपनाना इस समय बेहतर विकल्प साबित हो सकता है।

