जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी आगामी 21 जून को होने वाली दोबारा NEET-UG परीक्षा को लेकर पूरी तरह सतर्क नजर आ रही है। पेपर लीक विवाद के बाद एजेंसी अब ‘जीरो ट्रस्ट पॉलिसी’ के तहत काम कर रही है, ताकि परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी तरह की चूक या सुरक्षा संबंधी जोखिम की संभावना खत्म की जा सके।
सूत्रों के मुताबिक, एनटीए इस बार परीक्षा को निष्पक्ष और सुरक्षित बनाने के लिए कड़ी निगरानी, लगातार ऑडिट और सोशल मीडिया मॉनिटरिंग जैसे कई सख्त कदम उठा रहा है। खासतौर पर टेलीग्राम समेत अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर एजेंसी की पैनी नजर बनी हुई है, क्योंकि जांच एजेंसियों को शक है कि पिछली बार पेपर लीक में इन माध्यमों का इस्तेमाल किया गया था।
30 दिनों में परीक्षा कराना बड़ी चुनौती
सूत्रों का कहना है कि इतने कम समय में देशभर में दोबारा परीक्षा आयोजित करना बेहद चुनौतीपूर्ण काम है। आमतौर पर इस स्तर की परीक्षा की तैयारियों में करीब छह महीने का समय लगता है, लेकिन इस बार एजेंसी को लगभग 30 दिनों के भीतर सारी व्यवस्थाएं पूरी करनी पड़ रही हैं।
एक अधिकारी ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर बताया कि समय तेजी से निकल रहा है और छोटी सी चूक भी बड़ी समस्या बन सकती है। ऐसे में एनटीए हर स्तर पर अतिरिक्त सावधानी बरत रहा है।
पेपर लीक विवाद के बाद बढ़ा दबाव
पिछली NEET-UG परीक्षा में कथित गड़बड़ी और पेपर लीक के आरोपों के बाद छात्रों और अभिभावकों में भारी नाराजगी देखने को मिली थी। इसके बाद दोबारा परीक्षा कराने का फैसला लिया गया। मामले की जांच फिलहाल केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) कर रही है।
सूत्रों के अनुसार, एनटीए के सामने सिर्फ परीक्षा कराने की नहीं, बल्कि पूरी प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखने की भी बड़ी जिम्मेदारी है। एजेंसी का मानना है कि छात्रों के भविष्य से जुड़ी इस परीक्षा में दोबारा किसी भी तरह की लापरवाही की गुंजाइश नहीं हो सकती।
NTA ने बदले अंदरूनी सिस्टम
विवाद के बाद एनटीए ने अपने आंतरिक सिस्टम और सुरक्षा प्रोटोकॉल में बड़े बदलाव किए हैं। अब क्रॉस-चेकिंग की प्रक्रिया को और मजबूत बनाया गया है, ताकि किसी भी स्तर पर गड़बड़ी की संभावना को रोका जा सके।
सूत्रों ने यह भी माना कि यदि अंदरूनी लोग ही नियमों का उल्लंघन करें, तो ऐसी घटनाओं को रोकना बेहद मुश्किल हो जाता है। इसी वजह से एजेंसी अब हर चरण में जवाबदेही और निगरानी बढ़ा रही है।
‘गुप्त रणनीति’ से नकल माफिया पर नजर
एनटीए निष्पक्ष परीक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई ऐसे कदम भी उठा रहा है, जिनकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा रही है। एजेंसी का मानना है कि सुरक्षा उपायों का खुलासा होने से नकल माफिया सिस्टम की कमजोरियां तलाश सकते हैं।
सूत्रों का दावा है कि पिछली बार पूरा प्रश्नपत्र लीक नहीं हुआ था, बल्कि उसका केवल एक हिस्सा ही प्रभावित हुआ था। उनका कहना है कि यदि लीक प्रिंटिंग प्रेस, बैंक या परीक्षा केंद्र स्तर से हुआ होता, तो पूरा पेपर बाहर आ जाता। हालांकि, पूरे मामले की सच्चाई अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो की जांच के बाद ही सामने आएगी।

