जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की राजनीति में नेता प्रतिपक्ष (LoP) पद को लेकर जारी विवाद अब कानूनी मोड़ पर पहुंच गया है। विधानसभा स्पीकर के फैसले को लेकर ममता बनर्जी खेमे ने कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख किया है। गुरुवार को हुई सुनवाई में अदालत ने फिलहाल किसी भी तरह का अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया और मामले में आगे की सुनवाई तय कर दी।
हाईकोर्ट का अहम रुख
जस्टिस कृष्णा राव की पीठ ने स्पष्ट किया कि इस चरण पर कोई तत्काल आदेश जारी नहीं किया जाएगा। अदालत ने सभी पक्षों को जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, विरोध करने वाले पक्ष को तीन हफ्ते के भीतर हलफनामा दाखिल करने को कहा गया है, जबकि जवाबी दस्तावेज दो हफ्ते में प्रस्तुत करने होंगे। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि अगली सुनवाई तक विधानसभा स्पीकर का फैसला लागू रहेगा। अगली सुनवाई 28 जुलाई को होगी।
राजनीतिक बयानबाजी तेज
अदालत के इस फैसले के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) और विपक्ष दोनों की ओर से बयान सामने आने लगे हैं। मामले में भाजपा ने भी प्रतिक्रिया दी है, जिससे राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है।
मामला कैसे पहुंचा कोर्ट तक
यह विवाद तब शुरू हुआ जब टीएमसी के ही विधायक शोभनदेब चट्टोपाध्याय ने स्पीकर के फैसले को चुनौती दी। उनका आरोप है कि नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति प्रक्रिया में अनियमितता हुई और उनके नामांकन को गलत तरीके से खारिज किया गया।
पार्टी के भीतर टकराव
सूत्रों के अनुसार, विवाद की जड़ पार्टी के भीतर नेतृत्व चयन को लेकर उठे मतभेद हैं। आरोप-प्रत्यारोप और कथित दस्तावेज विवाद के बाद मामला और गहराता गया, जिसके चलते संगठन में विभाजन जैसी स्थिति बन गई। अब मामला विधानसभा से आगे बढ़कर अदालत तक पहुंच चुका है, जहां अगली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।

