जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी को लेकर महिलाओं और श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। सनातन धर्म में इस एकादशी को सबसे कठिन और पुण्यदायी व्रतों में से एक माना जाता है। इस वर्ष निर्जला एकादशी शुभ संयोग में पड़ रही है, जिसके चलते मंदिरों और घरों में भगवान विष्णु की विशेष पूजा-अर्चना की तैयारियां की गई हैं।
ज्योतिषाचार्य के अनुसार, एकादशी तिथि 24 जून की शाम 6:12 बजे प्रारंभ होकर 25 जून की रात 8:09 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर 25 जून को निर्जला एकादशी महाव्रत रखा जाएगा।
वर्षभर की 24 एकादशियों के बराबर मिलता है पुण्य
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, निर्जला एकादशी का व्रत करने से वर्षभर की सभी 24 एकादशियों के समान पुण्य फल प्राप्त होता है। इस दिन श्रद्धालु सूर्योदय से अगले दिन सूर्योदय तक बिना जल ग्रहण किए उपवास रखते हैं और भगवान विष्णु की आराधना करते हैं।
ज्योतिषाचार्य ने बताया कि महिलाएं परिवार की सुख-समृद्धि, पति की दीर्घायु और अखंड सौभाग्य की कामना के साथ यह व्रत रखती हैं। हालांकि, गंभीर बीमारी, डायबिटीज या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित लोगों को चिकित्सकीय सलाह के अनुसार ही व्रत करना चाहिए।
अखंड सौभाग्य और दान-पुण्य का पर्व
ज्योतिषाचार्य ने बताया कि निर्जला एकादशी को सैनी एकादशी भी कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा के साथ दान का विशेष महत्व है। भीषण गर्मी को देखते हुए जल से भरा मिट्टी का घड़ा, हाथ का पंखा, छाता, सत्तू, चने की दाल, मौसमी फल और मीठे शरबत का दान अत्यंत शुभ माना जाता है।
निर्जला एकादशी पर भूलकर भी न करें ये काम
- तामसिक भोजन का सेवन न करें।
- क्रोध और विवाद से दूर रहें।
- तुलसी के पत्ते न तोड़ें।
- आलस्य और अधिक नींद से बचें।
- किसी का अपमान न करें।
- निर्जला एकादशी पर करें ये दान
- जल से भरा मिट्टी का घड़ा
- खरबूजा, तरबूज और आम जैसे मौसमी फल
- हाथ का पंखा या छाता
- सत्तू और चने की दाल
- मीठा शरबत एवं शीतल पेय पदार्थ
- भगवान विष्णु को क्या अर्पित करें
निर्जला एकादशी के दिन भगवान विष्णु को तुलसी दल, पीले पुष्प, चंदन, अक्षत, पंचामृत, मौसमी फल और नैवेद्य अर्पित करना शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान घी का दीपक जलाकर श्रीहरि का ध्यान और मंत्र जाप करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।
धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया निर्जला एकादशी व्रत जीवन में सुख, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है।

