जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर परीक्षा सुधार और शिक्षा व्यवस्था में बदलाव की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन में सोमवार को अहम घटनाक्रम देखने को मिला। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की अपील पर अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल समाप्त कर दी। वहीं, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) के तीन कार्यकर्ताओं ने भी 23 दिन बाद अपना अनशन खत्म कर दिया।
सोनम वांगचुक की अपील पर टूटा अनशन
अभिजीत दीपके ने 18 जुलाई को सोनम वांगचुक के अस्पताल में भर्ती होने के बाद उनके समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी। वांगचुक 21 दिन के अनशन के बाद स्वास्थ्य बिगड़ने पर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती हैं।
इस बीच, CJP के प्रतिनिधि सौरव दास और आशुतोष रंका केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात के लिए रवाना हुए। पार्टी के कार्यकर्ता और समर्थक परीक्षा सुधारों की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करते रहे।
AISA के तीन कार्यकर्ताओं ने भी खत्म किया अनशन
दूसरी ओर, AISA के कार्यकर्ता नेहा, मनीष और आमीन ने 23 दिन की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल समाप्त कर दी। उन्होंने यह फैसला विपक्षी सांसदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न क्षेत्रों की प्रमुख हस्तियों के प्रतिनिधिमंडल की अपील पर लिया।
प्रतिनिधिमंडल ने छात्रों को भरोसा दिलाया कि उनकी मांगों को संसद के मानसून सत्र में मजबूती से उठाया जाएगा और आंदोलन को राजनीतिक व जन-अभियानों के जरिए आगे बढ़ाया जाएगा।
विपक्षी नेताओं और सामाजिक हस्तियों ने दिया समर्थन
प्रतिनिधिमंडल में राज्यसभा सांसद मनोज झा, CPI(M) सांसद अमरा राम, CPI(ML) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य, राजाराम सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव, वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण, शिक्षाविद अतुल सूद, अभिनेता प्रकाश राज और अभिनेत्री शबाना आज़मी शामिल रहे।
योगेंद्र यादव ने कहा कि अनशन समाप्त करना संघर्ष का अंत नहीं, बल्कि आंदोलन के अगले चरण की शुरुआत है। वहीं, शबाना आज़मी ने कहा कि युवाओं ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार की जरूरत को मजबूती से देश के सामने रखा है।
स्वास्थ्य पर पड़ा असर
AISA के अनुसार, 23 दिन के अनशन के दौरान तीनों छात्रों का वजन 12 प्रतिशत से अधिक घट गया था। कम रक्त शर्करा (ब्लड शुगर) और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के बावजूद वे अपनी मांगों पर डटे रहे।
गौरतलब है कि AISA के नेतृत्व में 28 जून से जंतर-मंतर पर आंदोलन चल रहा है। प्रदर्शनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, परीक्षा में कथित अनियमितताओं की न्यायिक जांच और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग कर रहे हैं।
संसद में उठेगा मुद्दा
राज्यसभा सांसद मनोज झा ने कहा कि छात्रों ने अपने शांतिपूर्ण आंदोलन से सरकार को जवाबदेह बनाया है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि उनकी मांगें संसद के भीतर मजबूती से उठाई जाएंगी। वहीं, राजाराम सिंह ने कहा कि अब छात्रों का संघर्ष लोकतंत्र के सदन में भी गूंजेगा।

