Saturday, September 12, 2026
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Harjinder Kaur: खेतों में चारा काटने वाली बेटी ने कॉमनवेल्थ में जीता रजत, हरजिंदर की प्रेरक कहानी

जनवाणी ब्यूरो |

नई दिल्ली: ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में जब हरजिंदर कौर ने 69 किलोग्राम वर्ग में कुल 227 किलोग्राम (101 किग्रा स्नैच और 126 किग्रा क्लीन एंड जर्क) वजन उठाकर रजत पदक अपने नाम किया, तब दुनिया ने एक विजेता को देखा। लेकिन इस चमकदार सफलता के पीछे खेतों की मिट्टी, गरीबी से भरा बचपन और अथक मेहनत की लंबी कहानी छिपी है। यह सिर्फ एक खिलाड़ी की जीत नहीं, बल्कि उस बेटी की कहानी है जिसने संघर्ष को अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लिया।

जहां सपनों से पहले जिम्मेदारियां थीं

14 अक्तूबर 1996 को पंजाब के नाभा के पास मेहस गांव में जन्मीं हरजिंदर कौर एक साधारण किसान परिवार से हैं। उनके पिता साहिब सिंह परिवार के इकलौते कमाने वाले थे। सीमित आमदनी के कारण घर में हर खर्च सोच-समझकर किया जाता था। ऐसे में खेलों में करियर बनाने का सपना किसी विलासिता से कम नहीं था।

स्कूल से लौटने के बाद हरजिंदर का समय खेल के मैदान में नहीं, बल्कि खेतों में बीतता था। वह पिता के साथ खेती करतीं और भैंसों के लिए चारा काटतीं। गांव में ‘टोका’ नाम की हाथ से चलने वाली मशीन पर चारा काटना बेहद कठिन काम था। भारी लोहे का पहिया लगातार घुमाने से उनकी भुजाओं में जो ताकत आई, वही आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी पूंजी साबित हुई।

कबड्डी खेलना चाहती थीं, लेकिन किस्मत ने वेटलिफ्टिंग चुनी

हरजिंदर को बचपन से कबड्डी बेहद पसंद थी। अभ्यास के लिए वह रोज कई किलोमीटर साइकिल चलाकर जाती थीं। कॉलेज पहुंचने के बाद उन्होंने कबड्डी के साथ रस्साकशी (टग ऑफ वॉर) भी खेली। यहीं पंजाब के पूर्व राष्ट्रमंडल चैंपियन और कोच परमजीत शर्मा की नजर उनकी असाधारण ताकत पर पड़ी।

कोच ने उन्हें वेटलिफ्टिंग अपनाने की सलाह दी। शुरुआत में हरजिंदर इस खेल में बिल्कुल दिलचस्पी नहीं रखती थीं, लेकिन कोच ने उनका हौसला बढ़ाया और आखिरकार 2016 में उन्होंने वेटलिफ्टिंग की शुरुआत की। यही फैसला उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा मोड़ बन गया।

जब जेब में सिर्फ 700 रुपये होते थे

अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बनने का सफर आर्थिक तंगी से भरा था। हरजिंदर ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उनके पिता उन्हें नाभा से कॉलेज हॉस्टल आने-जाने के लिए 350 रुपये और 350 रुपये जेब खर्च के लिए देते थे। वह जानती थीं कि घर की हालत अच्छी नहीं है, इसलिए कभी अतिरिक्त पैसे मांगने की हिम्मत नहीं जुटा पाईं।

परिवार ने कई बार कर्ज लेकर भी उनका साथ दिया। कोरोना महामारी के दौरान जब ट्रेनिंग सेंटर बंद हो गए, तब कोच परमजीत शर्मा ने उन्हें अपने घर में रखकर अभ्यास जारी रखने में मदद की। यही भरोसा आगे चलकर अंतरराष्ट्रीय पदकों में बदल गया।

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खेतों की मेहनत बनी सबसे बड़ी ताकत

हरजिंदर अपनी सफलता का श्रेय खेतों में किए गए काम को देती हैं। उनका कहना है, “अगर मैं पदक जीतती हूं तो उसका सबसे बड़ा श्रेय टोका पर चारा काटने को जाएगा। उसी मेहनत ने मेरी भुजाओं को मजबूत बनाया और वेटलिफ्टिंग में आगे बढ़ने की ताकत दी।”

कॉमनवेल्थ में लगातार दूसरी बड़ी सफलता

बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में हरजिंदर ने 71 किलोग्राम वर्ग में कांस्य पदक जीतकर पहली बार राष्ट्रमंडल खेलों के पोडियम पर जगह बनाई थी। चार साल बाद ग्लासगो में उन्होंने खुद को और बेहतर साबित किया।

उन्होंने स्नैच में पहले 99 किलोग्राम और फिर 101 किलोग्राम वजन उठाकर दो बार गेम्स रिकॉर्ड तोड़ा। इसके बाद क्लीन एंड जर्क में 123 और फिर 126 किलोग्राम सफलतापूर्वक उठाए। कुल 227 किलोग्राम के साथ उन्होंने अपने करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए रजत पदक जीता। स्वर्ण पदक कनाडा की चार्लोट सिमोनो ने 240 किलोग्राम के रिकॉर्ड प्रदर्शन के साथ जीता, लेकिन हरजिंदर का रजत भी करोड़ों भारतीयों के लिए किसी स्वर्ण पदक से कम नहीं था।

संघर्ष से बनी प्रेरणा

आज हरजिंदर कौर सिर्फ एक पदक विजेता नहीं हैं, बल्कि उन लाखों बेटियों के लिए उम्मीद की मिसाल हैं जो छोटे गांवों से बड़े सपने देखती हैं। उन्होंने साबित कर दिया कि संसाधनों की कमी सफलता की राह में सबसे बड़ी बाधा नहीं होती। मेहनत, धैर्य और सही मार्गदर्शन के साथ कोई भी मंजिल हासिल की जा सकती है।

कल तक जो लड़की खेतों में चारा काटती थी, आज वही दुनिया के सबसे बड़े खेल मंचों पर भारत का तिरंगा ऊंचा कर रही है। हरजिंदर कौर की कहानी सिर्फ वेटलिफ्टिंग की नहीं, बल्कि उस अटूट विश्वास की कहानी है कि सच्ची मेहनत का फल देर से ही सही, लेकिन जरूर मिलता है।

हरजिंदर कौर की प्रमुख उपलब्धियां

  • कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 (ग्लासगो): 69 किग्रा वर्ग में रजत पदक
  • कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 (बर्मिंघम): 71 किग्रा वर्ग में कांस्य पदक
  • कॉमनवेल्थ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप 2025: कांस्य पदक
  • कॉमनवेल्थ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप 2021: रजत पदक
  • एशियाई वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप 2026 (स्नैच): कांस्य पदक
  • कई बार राष्ट्रीय चैंपियन और राष्ट्रीय रिकॉर्डधारी वेटलिफ्टर
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