जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: भारतीय कॉरपोरेट जगत के सबसे प्रतिष्ठित कारोबारी समूहों में शामिल टाटा संस में नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। वर्तमान चेयरमैन एन चंद्रशेखरन का कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को समाप्त होने वाला है। उन्होंने दूसरा कार्यकाल स्वीकार नहीं करने का फैसला किया है। इसके बाद टाटा ट्रस्ट्स ने उनके उत्तराधिकारी की तलाश के लिए चयन समिति गठित करने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया है।
टाटा ट्रस्ट्स ने क्या कहा?
टाटा ट्रस्ट्स के अनुसार, एन चंद्रशेखरन ने नामित निदेशकों को ईमेल के माध्यम से सूचित किया कि वह अपने वर्तमान कार्यकाल के बाद पुनर्नियुक्ति के लिए उपलब्ध नहीं होंगे। सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT) ने उनके निर्णय का सम्मान करते हुए पिछले करीब एक दशक में टाटा संस और पूरे टाटा समूह में उनके योगदान की सराहना की। ट्रस्ट ने कहा कि चंद्रशेखरन ने समूह के विकास, परिवर्तन और कायाकल्प में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके नेतृत्व और योगदान के लिए ट्रस्ट ने उनका आभार जताया है।
इसके साथ ही SDTT के न्यासियों ने नए चेयरमैन की नियुक्ति के लिए चयन समिति गठित करने का प्रस्ताव पारित किया है। समिति टाटा संस के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन के प्रावधानों के तहत काम करेगी।
उत्तराधिकारी चुनने की प्रक्रिया शुरू
टाटा ट्रस्ट्स ने चयन समिति के गठन की प्रक्रिया जल्द से जल्द शुरू करने का फैसला किया है। टाटा संस को इस पूरी प्रक्रिया में ट्रस्ट की ओर से आवश्यक सहयोग दिया जाएगा।
इसका उद्देश्य नेतृत्व परिवर्तन को समयबद्ध, सुचारू और व्यवस्थित तरीके से पूरा करना है। नए चेयरमैन का चयन टाटा समूह के मूल्यों और उसके दीर्घकालिक कारोबारी हितों को ध्यान में रखकर किया जाएगा।
चंद्रशेखरन ने क्यों छोड़ा दूसरा कार्यकाल?
चंद्रशेखरन के दोबारा चेयरमैन बनने को लेकर पिछले कुछ महीनों से अनिश्चितता बनी हुई थी। जानकारी के मुताबिक, सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट ने उनके कार्यकाल को पांच साल और बढ़ाने की सिफारिश की थी। इसके बाद टाटा संस की नामांकन एवं पारिश्रमिक समिति (NRC) और बोर्ड स्तर पर भी इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाया गया।
हालांकि, 24 फरवरी को जब यह प्रस्ताव टाटा संस बोर्ड के सामने आया, तो एक निदेशक ने इसका समर्थन नहीं किया। इससे प्रस्ताव पर पूर्ण सहमति नहीं बन सकी। बताया जाता है कि इसके बाद चंद्रशेखरन ने मामले को आगे बढ़ाने के बजाय निर्णय को टाल दिया।
करीब छह महीने बाद भी जब इस मुद्दे पर सर्वसम्मति नहीं बन सकी, तो चंद्रशेखरन ने बोर्ड को सूचित किया कि वह दूसरे कार्यकाल के लिए अपना नाम आगे नहीं बढ़ाएंगे। साथ ही उन्होंने उत्तराधिकार की प्रक्रिया शुरू करने का रास्ता साफ कर दिया।
चंद्रशेखरन के कार्यकाल में टाटा समूह का प्रदर्शन
एन चंद्रशेखरन का कार्यकाल टाटा समूह के लिए बड़े रणनीतिक बदलाव और विस्तार का दौर रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 में समूह का कुल राजस्व रिकॉर्ड करीब 13.3 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
उनके नेतृत्व में टाटा समूह ने पारंपरिक कारोबार के साथ-साथ एविएशन, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, डिजिटल कारोबार और उन्नत विनिर्माण जैसे नए क्षेत्रों में भी बड़े निवेश किए। टाटा ट्रस्ट्स ने भी समूह में आए इस व्यापक बदलाव और विकास में चंद्रशेखरन के योगदान को विशेष रूप से स्वीकार किया है।
नए चेयरमैन के सामने होंगी बड़ी चुनौतियां
चंद्रशेखरन के उत्तराधिकारी के सामने टाटा समूह के मौजूदा कारोबार को संभालने के साथ-साथ कई बड़े नए प्रोजेक्ट्स को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाने की चुनौती होगी।
एयर इंडिया का एकीकरण और कायाकल्प: एयर इंडिया और समूह की अन्य विमानन कंपनियों के एकीकरण के बाद नए चेयरमैन को इस विशाल कारोबार को स्थिर और प्रतिस्पर्धी बनाने पर ध्यान देना होगा।
टीसीएस और एआई का दौर: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तेजी से बदलते दौर में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) को तकनीकी बदलावों के अनुरूप आगे बढ़ाना महत्वपूर्ण होगा।
सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स: सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े अरबों डॉलर के निवेश को व्यावसायिक सफलता में बदलना नए नेतृत्व की बड़ी जिम्मेदारी होगी।
डिजिटल और नए कारोबार: समूह के नए डिजिटल और तकनीकी कारोबारों को मजबूत बनाना और उनसे टिकाऊ विकास हासिल करना भी महत्वपूर्ण होगा।
कॉरपोरेट गवर्नेंस: टाटा संस और करीब 66 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाले टाटा ट्रस्ट्स के बीच संतुलित और प्रभावी कॉरपोरेट गवर्नेंस बनाए रखना नए चेयरमैन के लिए सबसे अहम जिम्मेदारियों में से एक होगा।
आगे क्या होगा?
एन चंद्रशेखरन 20 फरवरी 2027 तक टाटा संस के चेयरमैन बने रहेंगे। इस दौरान सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट की ओर से चयन समिति का गठन किया जाएगा, जो नए चेयरमैन की तलाश और चयन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगी।
टाटा समूह के लिए यह केवल नेतृत्व परिवर्तन नहीं, बल्कि रणनीतिक दिशा के एक नए चरण की शुरुआत भी होगी। ऐसे समय में जब समूह विमानन, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, डिजिटल कारोबार और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में बड़े दांव लगा रहा है, नए चेयरमैन की भूमिका इन महत्वाकांक्षी योजनाओं को गति देने और समूह की दीर्घकालिक विरासत को आगे बढ़ाने में निर्णायक होगी।

