जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: चुनाव आयोग और SIR को लेकर सियासी घमासान के बीच कॉकरेच जनता पार्टी (CJP) ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग तेज कर दी है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है।
उन्होंने कहा कि अगर शनिवार तक ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते, तो CJP 2 अक्टूबर, गांधी जयंती से मुंबई में देशव्यापी प्रदर्शन शुरू करेगी। बाद में आंदोलन को देश के अन्य शहरों और दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन धरने तक ले जाया जाएगा। CJP ने इसको लेकर ‘इलेक्शन कमीशन ठीक करो’ अभियान शुरू किया है।
13 करोड़ नाम हटाने का दावा
CJP का आरोप है कि 30 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में SIR के दौरान ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से 13 करोड़ से ज्यादा नाम हटाए गए हैं, जिससे वोट के अधिकार पर असर पड़ा है। पार्टी ने दावा किया:
- महाराष्ट्र और UP में 2-2 करोड़ से ज्यादा
- कर्नाटक में करीब 1 करोड़, तमिलनाडु में 97 लाख
- पश्चिम बंगाल में 90 लाख, तेलंगाना में 73 लाख
- दिल्ली में 47 लाख और केरल में 24 लाख नाम
- ये सभी आंकड़े CJP के दावे हैं।
दीपके का कहना है कि अगर इतने नाम हटे हैं, तो चुनाव आयोग को हर नाम हटाने की प्रक्रिया को कानूनी और पारदर्शी तरीके से स्पष्ट करना चाहिए।
CEC से इस्तीफा क्यों मांग रही CJP?
दीपके ने आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी कर नागरिकों के वोट के अधिकार को प्रभावित किया जा रहा है। पहले पार्टी ने 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था, अब इसे घटाकर 24 घंटे कर दिया गया है।
यह बयान ऐसे समय आया है जब इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में कहा गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने SIR से जुड़े 14 फैसलों पर आपत्ति दर्ज कराई थी। चुनाव आयोग ने इस पर कहा था कि आंतरिक चर्चा और अलग-अलग राय सामान्य प्रक्रिया है और सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
विपक्ष से क्या अपील की?
दीपके ने विपक्षी दलों से अपील की कि अगर उन्हें चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी लगती है तो उन्हें ऐसे चुनावों में हिस्सा नहीं लेना चाहिए, क्योंकि इससे गलत प्रक्रिया को वैधता मिलती है। उन्होंने कहा कि धांधली का मुद्दा हर जगह एक समान तरीके से उठाना चाहिए, राज्य या पार्टी देखकर नहीं।

