जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: आईएसआईएस से जुड़ी आतंकी साजिश के मामले में एनआईए की विशेष अदालत ने सैयद फासिउर रहमान उर्फ सैयद फसीह उर रहमान को सात साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर 48 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के मुताबिक, इस मामले में कथित साजिश का उद्देश्य लक्षित हत्याओं को अंजाम देकर सांप्रदायिक दंगे भड़काना और प्रतिबंधित आतंकी संगठन आईएसआईएस के एजेंडे को आगे बढ़ाना था।
मेहबूब पाशा पर साजिश का मुख्य आरोप
एनआईए की जांच के अनुसार, मामले के मुख्य आरोपी मेहबूब पाशा ने बंगलूरू के गुरप्पनपाल्या स्थित अपने घर पर कई बैठकें आयोजित की थीं। एजेंसी का आरोप है कि इन्हीं बैठकों में लक्षित हत्याओं की योजना तैयार की गई थी। जांच एजेंसी के मुताबिक, साजिश का एक उद्देश्य सांप्रदायिक तनाव पैदा करना और आईएसआईएस के लिए एक ‘विलायत’ यानी प्रांत स्थापित करना था।
बैठकों में शामिल हुआ था सैयद फासिउर रहमान
एनआईए के अनुसार, सैयद फासिउर रहमान भी इन बैठकों में शामिल हुआ था। उस पर अल-हिंद समूह से जुड़े सदस्यों के जंगल कैंप प्रशिक्षण के लिए डेकाथलॉन स्टोर से टेंट और चाकू खरीदने का आरोप था। अदालत ने मामले में उपलब्ध साक्ष्यों और आरोपों के आधार पर उसे दोषी ठहराया और सात साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई।
2020 में दर्ज हुआ था मामला
मामला सबसे पहले 10 जनवरी 2020 को कर्नाटक पुलिस ने बंगलूरू में दर्ज किया था। इसके बाद एनआईए ने 23 जनवरी 2020 को जांच अपने हाथ में लेते हुए मामला दोबारा दर्ज किया।
एनआईए के मुताबिक, अब तक इस मामले में 20 आरोपियों के खिलाफ तीन आरोपपत्र दाखिल किए जा चुके हैं। इससे पहले हनीफ खान को 14 जुलाई 2026 को मुकदमे के दौरान अपना अपराध स्वीकार करने के बाद दोषी ठहराया गया था। मामले की सुनवाई अक्टूबर 2025 में शुरू हुई थी।
ऑनलाइन हैंडलर की तलाश जारी
एनआईए ने बताया कि मामले की जांच अभी जारी है। जांच एजेंसी उस कथित ऑनलाइन हैंडलर की पहचान और तलाश में जुटी है, जो आतंकी मॉड्यूल तैयार करने और उसकी गतिविधियों के समन्वय में शामिल बताया जा रहा है।

