जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के दक्षिणी परिसर के पास सत्य निकेतन की एक संकरी गली में रविवार को बड़ा हादसा हो गया। यहां लड़कों के छात्रावास के रूप में इस्तेमाल की जा रही करीब 30 साल पुरानी पांच मंजिला इमारत अचानक भरभरा कर ढह गई। हादसे में अब तक सात लोगों की मौत हो चुकी है।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एम्स पहुंचकर हादसे में घायल लोगों से मुलाकात की। उन्होंने बताया कि एक मजदूर समेत कई घायल अस्पताल में भर्ती हैं। दो बच्चे पूरी तरह ठीक हैं, जबकि एक बच्चा आईसीयू में है। मुख्यमंत्री ने मृतकों और घायलों के परिजनों से भी मुलाकात की और उन्हें हर संभव मदद का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि सरकार घायलों के इलाज का पूरा खर्च उठाएगी और आर्थिक सहायता भी दी जाएगी।
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि हादसे में क्षतिग्रस्त इमारत के बगल वाली इमारत को भी गिराया जाएगा। इसके लिए मंगलवार को कार्रवाई की जाएगी।
सात लोगों की मौत, पांच घायल अस्पताल में भर्ती
सत्य निकेतन स्थित हॉस्टल डेज पीजी हादसे में मृतकों की संख्या सात हो गई है। दो और घायलों ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। करीब 27 घंटे तक चले राहत और बचाव अभियान के बाद सोमवार शाम मलबा हटाने का काम पूरा कर लिया गया। बचाव दल ने कुल 12 लोगों को मलबे से बाहर निकाला। इनमें पांच छात्रों समेत सात लोगों की मौत हो गई, जबकि पांच घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इनमें से तीन की हालत गंभीर बताई जा रही है।
पीजी मालिक समेत तीन गिरफ्तार
हादसे के बाद पुलिस ने पीजी के मालिक हरिराम गुप्ता, उनकी पत्नी उर्मिला गुप्ता और बेटे महेश गुप्ता को राजस्थान के भिवाड़ी से गिरफ्तार किया है। 81 वर्षीय हरिराम गुप्ता और 75 वर्षीय उर्मिला गुप्ता को अदालत ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। वहीं, 52 वर्षीय महेश गुप्ता को दो दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया है।
पुलिस के मुताबिक, पीजी का बिजली कनेक्शन हरिराम गुप्ता के नाम पर था, जबकि इमारत का प्रबंधन उनका बेटा महेश देखता था। संपत्ति की रजिस्ट्री हरिराम की पत्नी उर्मिला गुप्ता के नाम पर बताई गई है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने सरकार और एजेंसियों की जवाबदेही पर उठाए सवाल
मामला अब दिल्ली हाईकोर्ट भी पहुंच गया है। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने हादसे को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया। अदालत ने कहा कि हादसे के लिए केवल पीजी मालिक को जिम्मेदार ठहराकर दिल्ली सरकार अपनी जवाबदेही से नहीं बच सकती। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में दिल्ली विश्वविद्यालय और एमसीडी की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।
एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने एमसीडी को उच्चस्तरीय जांच के निर्देश दिए हैं। वहीं, दिल्ली सरकार ने कार्रवाई करते हुए पांच अधिकारियों को निलंबित कर दिया है।

