जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: सऊदी अरब ने दावा किया है कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने मक्का के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले एक ड्रोन को इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया। सऊदी सैन्य प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी ने कहा कि मक्का और दोनों पवित्र मस्जिदों की सुरक्षा सऊदी अरब के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और किसी भी शत्रुतापूर्ण कार्रवाई का जवाब दिया जाएगा।
हालांकि, यमन के हूती पक्ष ने मक्का को निशाना बनाने के आरोप से इनकार किया है। हूती नेता हाजेम अल-असद ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर इस दावे को पुराना और बेबुनियाद बताया। ऐसे में ड्रोन की उत्पत्ति और उसके वास्तविक लक्ष्य को लेकर दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं।
यमन में सऊदी हवाई कार्रवाई के दावे
ड्रोन घटना से पहले हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरिया ने दावा किया था कि सऊदी लड़ाकू विमानों ने यमन के पांच प्रांतों में 52 हवाई हमले किए। हूती पक्ष के मुताबिक, इन हमलों में एफ-15 और टाइफून लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल किया गया।
हूतियों ने दावा किया कि हमले तैज, अल-जौफ, अल-बायदा, सादा और अमरान में किए गए और कुछ स्थानों पर स्कूलों, पुलों, सड़कों तथा अन्य नागरिक बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा। इन दावों पर सऊदी अधिकारियों की तत्काल प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। हूती प्रवक्ता ने चेतावनी दी कि सऊदी हवाई हमलों का जवाब दिया जाएगा।
तैज में नागरिकों की मौत का दावा
हूती संचालित अल-मसीरा टीवी ने दावा किया कि तैज प्रांत के धुबाब और मकबाना जिलों में सऊदी हवाई हमलों में तीन नागरिक मारे गए, जिनमें दो बच्चे शामिल हैं। दो अन्य लोगों के घायल होने की भी बात कही गई है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
इससे पहले हूती हमलों के जवाब में सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने खमीस मुशैत, अबहा और ताइफ को निशाना बनाकर किए गए मिसाइल और ड्रोन हमलों की जानकारी दी थी। गठबंधन के अनुसार इन हमलों में 13 नागरिक घायल हुए थे।
मोहम्मद बिन सलमान की मिस्र यात्रा से बढ़ा कूटनीतिक महत्व
सीमा पार हमलों के बीच सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने काहिरा में मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी से मुलाकात की। दोनों पक्षों ने लाल सागर और बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य में समुद्री आवाजाही की स्वतंत्रता तथा सुरक्षा सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
मिस्र के राष्ट्रपति कार्यालय ने सऊदी अरब के प्रति समर्थन जताया। हालांकि, बैठक के बाद दोनों देशों ने किसी नए संयुक्त सैन्य अभियान या ठोस सैन्य सहयोग योजना की घोषणा नहीं की।
लाल सागर और बाब अल-मंदब का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि यह क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा परिवहन के लिए महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है।
बाब अल-मंदब को लेकर बढ़ी चिंता
हूती विद्रोहियों के नए सैन्य अभियान के बीच यमन के पश्चिमी तट पर उनकी गतिविधियों को लेकर चिंता बढ़ी है। उपलब्ध दावों के अनुसार, हूती पक्ष ने रणनीतिक बंदरगाह शहर मोखा और बाब अल-मंदब के पास स्थित मायून द्वीप पर नियंत्रण स्थापित करने का दावा किया है।
बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य लाल सागर को अदन की खाड़ी और आगे खुले समुद्र से जोड़ता है। इस क्षेत्र में किसी भी बड़े सुरक्षा संकट का असर अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी, व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है।
सऊदी तेल आपूर्ति पर भी दबाव
लाल सागर में बढ़ती अस्थिरता के बीच सऊदी अरब की ऊर्जा आपूर्ति व्यवस्था को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। देश की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन को नुकसान पहुंचने की रिपोर्टों ने इस चिंता को और बढ़ाया है। इसके पीछे इराक में सक्रिय ईरान समर्थित मिलिशिया का हाथ होने की बात कही गई है, हालांकि ऐसे आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
यदि समुद्री मार्गों और तेल परिवहन के बुनियादी ढांचे पर लगातार हमले होते हैं, तो इसका असर क्षेत्रीय ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक बाजारों पर पड़ सकता है।
सैन्य कार्रवाई बनाम कूटनीतिक रास्ता
सऊदी अरब ने 2015 में हूतियों के खिलाफ सैन्य हस्तक्षेप शुरू किया था। वर्षों की लड़ाई के बाद 2022 में संघर्ष में अपेक्षाकृत शांति देखने को मिली थी। अब सीमा पार हमलों और यमन में सैन्य गतिविधियों में बढ़ोतरी ने उस स्थिति को फिर चुनौती दी है।
रियाद के सामने सैन्य प्रतिक्रिया और कूटनीतिक प्रयासों के बीच संतुलन का सवाल है। बड़े सैन्य अभियान से सऊदी शहरों और ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर जवाबी हमलों का जोखिम बढ़ सकता है, जबकि बाब अल-मंदब जैसे रणनीतिक क्षेत्र में हूती गतिविधियों को बढ़ने देना भी क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए चिंता का विषय माना जा रहा है।
यमन में मानवीय संकट गहराने की आशंका
हिंसा बढ़ने के साथ यमन में मानवीय स्थिति भी गंभीर हो रही है। उपलब्ध दावों के अनुसार, हालिया संघर्ष में बड़ी संख्या में लोगों के मारे जाने और हजारों लोगों के विस्थापित होने की जानकारी सामने आई है।
सेव द चिल्ड्रन की ओर से भी नागरिकों, विशेषकर बच्चों पर बढ़ती हिंसा के असर को लेकर चिंता जताई गई है। हालांकि, अलग-अलग पक्षों द्वारा जारी मौत और नुकसान के आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि हर मामले में उपलब्ध नहीं है।
लाल सागर संकट का असर मिस्र पर भी
लाल सागर में जहाजों पर हमलों के कारण पहले ही स्वेज नहर से गुजरने वाले समुद्री यातायात में गिरावट देखी गई थी, जिसका असर मिस्र के राजस्व पर पड़ा। क्षेत्र में तनाव दोबारा बढ़ने से काहिरा की आर्थिक और सुरक्षा चिंताएं भी बढ़ सकती हैं।सऊदी तेल निर्यात या प्रमुख समुद्री मार्गों में किसी बड़ी बाधा का असर स्वेज नहर समेत वैश्विक समुद्री व्यापार पर पड़ सकता है।
संयुक्त राष्ट्र ने जताई चिंता
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में यमन के राजदूत अब्दुल्ला अल-सादी ने हूतियों के खिलाफ हथियार प्रतिबंध को प्रभावी ढंग से लागू करने और बढ़ती हिंसा की निंदा करने की अपील की है।
उन्होंने बाब अल-मंदब जैसे महत्वपूर्ण व्यापार और ऊर्जा मार्ग को किसी सशस्त्र संगठन के दबाव के साधन में बदलने के संभावित अंतरराष्ट्रीय प्रभावों पर भी चिंता जताई। मक्का के पास ड्रोन को लेकर सऊदी दावा, यमन में बढ़ती सैन्य गतिविधियां, लाल सागर की सुरक्षा और बाब अल-मंदब की रणनीतिक स्थिति—इन घटनाक्रमों ने यमन संकट को एक बार फिर क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के बड़े मुद्दे के रूप में सामने ला दिया है। आने वाले दिनों में सऊदी अरब की प्रतिक्रिया और मिस्र समेत क्षेत्रीय देशों की कूटनीतिक भूमिका पर नजर रहेगी।

