जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बढ़ते प्रभाव और उससे जुड़े संभावित खतरों को लेकर दुनियाभर में बहस जारी है। हाल के दिनों में एंथ्रोपिक, ओपनएआई, माइक्रोसॉफ्ट और गूगल जैसी प्रमुख टेक कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों ने भी AI के तेज विकास को लेकर चिंता जताई है। इन कंपनियों के कुछ नेताओं ने AI की रफ्तार पर नियंत्रण और सुरक्षा के लिए सरकारों की ओर से नए नियम बनाए जाने की जरूरत बताई है।
अब इस बहस के बीच अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने AI डेवलपर्स की भूमिका और उनकी मांगों पर सवाल उठाए हैं। वेंस का कहना है कि टेक कंपनियां एक ओर तेजी से अत्याधुनिक और संभावित रूप से जोखिम वाली AI तकनीक विकसित कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर इसके संभावित खतरों से निपटने के लिए सरकारों से वैश्विक नियम बनाने की अपील कर रही हैं।
AI को ‘फ्रेंकस्टीन’ से क्यों जोड़ा?
मशहूर टेक और बिजनेस कार्यक्रम ‘ऑल-इन पॉडकास्ट’ में बातचीत के दौरान जेडी वेंस ने AI कंपनियों के इस रवैये की आलोचना की। उन्होंने सवाल उठाया कि जो कंपनियां आज AI अर्थव्यवस्था के केंद्र में हैं, वे अब इसके संभावित खतरों को लेकर सरकार से हस्तक्षेप की मांग क्यों कर रही हैं।
वेंस ने AI को ‘फ्रेंकस्टीन’ जैसे खतरनाक दैत्य से जोड़ते हुए कहा कि अगर कंपनियां ऐसी तकनीक विकसित कर रही हैं, तो उन्हें इसके जोखिमों की जिम्मेदारी भी लेनी चाहिए। उनके मुताबिक, यदि किसी AI सिस्टम पर नियंत्रण बनाए रखना मुश्किल हो रहा है, तो कंपनियों को खुद सुरक्षा तंत्र विकसित करने पर ध्यान देना चाहिए।
AI और साइबर सुरक्षा को लेकर चिंता
वेंस ने अपनी बात रखते हुए एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोदेई का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अमोदेई की AI से जुड़े जोखिमों को लेकर चिंताएं वास्तविक हो सकती हैं, लेकिन उनके मुताबिक AI उद्योग में सुरक्षा और जवाबदेही से जुड़े सवाल अभी भी मौजूद हैं।
वेंस ने एंथ्रोपिक के नए AI मॉडल की क्षमताओं का जिक्र करते हुए साइबर हैकिंग से जुड़े संभावित खतरों पर चिंता जताई। उन्होंने दावा किया कि जब दूसरी कंपनियां ऐसे खतरों से बचाव के लिए सुरक्षा उपकरणों तक पहुंच चाहती हैं, तो उन्हें पर्याप्त पहुंच नहीं मिलती। वेंस के अनुसार, यह स्थिति AI कंपनियों की जिम्मेदारी और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है।
AI विकास की रफ्तार धीमी करने की मांग पर बहस
AI के विकास को लेकर यह बहस उस समय और तेज हुई, जब एंथ्रोपिक के प्रमुख डारियो अमोदेई ने AI के विकास की गति को नियंत्रित करने की जरूरत पर सार्वजनिक रूप से बात की। रिपोर्ट के मुताबिक, ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन, माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्य नडेला और गूगल के डेमिस हसाबिस समेत टेक इंडस्ट्री के अन्य प्रमुख लोगों ने भी AI सुरक्षा को लेकर चिंताएं व्यक्त की हैं।
इसी बीच AI उद्योग के भीतर से भी ऐसे सवाल सामने आते रहे हैं कि कंपनियां तेजी से अधिक सक्षम सिस्टम विकसित करने की होड़ में सुरक्षा को पर्याप्त प्राथमिकता दे रही हैं या नहीं। जेडी वेंस का बयान इसी व्यापक बहस में कॉर्पोरेट जवाबदेही और सरकारी नियमन के बीच संतुलन के सवाल को सामने लाता है।
डोनाल्ड ट्रंप ने AI से जुड़े खतरों की आशंकाओं को खारिज किया
लॉस एंजिल्स में आयोजित ‘ऑल-इन समिट’ के दौरान NVIDIA के सीईओ जेन्सन हुआंग एक चर्चा में शामिल थे। इसी दौरान उनकी डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बातचीत हुई, जिसे स्पीकर पर कार्यक्रम में मौजूद लोगों के सामने सुनाया गया।
बातचीत के दौरान ट्रंप ने AI को लेकर उन आशंकाओं को खारिज किया जिनमें रोबोट के दुनिया पर कब्जा करने या AI से मानवता के लिए बड़े खतरे की बात कही जाती है। उन्होंने अमेरिका के लिए AI विकास और तकनीकी नवाचार में बढ़त बनाए रखने को महत्वपूर्ण बताया।
ट्रंप के मुताबिक, AI के विकास की रफ्तार धीमी करने की कोशिश अमेरिका के रणनीतिक हितों के खिलाफ जा सकती है। उन्होंने चीन के साथ तकनीकी प्रतिस्पर्धा का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिका को AI के क्षेत्र में आगे रहना होगा। उनका तर्क है कि यदि अमेरिका इस दौड़ में पीछे रहा या विकास की गति कम हुई, तो चीन को बढ़त हासिल करने का मौका मिल सकता है।
इस तरह AI को लेकर अमेरिकी प्रशासन और टेक उद्योग के भीतर एक तरफ सुरक्षा और नियमन की जरूरत पर बहस है, तो दूसरी तरफ तकनीकी विकास की रफ्तार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बढ़त बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है।

