जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले में शनिवार, 17 अक्टूबर को दोपहर के समय भूकंप के झटके महसूस किए गए। शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.5 दर्ज की गई। इसका केंद्र जमीन से करीब 10 किलोमीटर नीचे बताया गया है।
जानकारी के मुताबिक, भूकंप दोपहर 2 बजकर 12 मिनट 35 सेकंड पर दर्ज किया गया। शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार, इसकी तीव्रता 3.5 थी और भूकंप का केंद्र लगभग 10 किलोमीटर की गहराई में स्थित था। फिलहाल, भूकंप से जुड़ी ये जानकारियां प्रारंभिक आंकड़ों पर आधारित हैं।
क्यों आते हैं भूकंप के झटके?
पृथ्वी की बाहरी परत कई टेक्टोनिक प्लेटों से बनी है, जो लगातार गति करती रहती हैं। जब ये प्लेटें एक-दूसरे से टकराती हैं, तो उनके किनारों पर दबाव जमा होने लगता है। कई बार यह दबाव इतना बढ़ जाता है कि चट्टानें टूट जाती हैं या अचानक खिसक जाती हैं। इस प्रक्रिया में जमा ऊर्जा बाहर निकलती है, जिससे धरती में कंपन पैदा होता है और भूकंप के झटके महसूस होते हैं।

क्या होता है भूकंप का केंद्र?
भूकंप के दौरान पृथ्वी के भीतर जिस स्थान से ऊर्जा निकलती है, उसे भूकंप का उद्गम केंद्र या हाइपोसेंटर कहा जाता है। इसके ठीक ऊपर पृथ्वी की सतह पर स्थित जगह को भूकंप का अधिकेंद्र (एपिसेंटर) कहते हैं।
आमतौर पर अधिकेंद्र के आसपास कंपन ज्यादा महसूस हो सकता है, लेकिन इसका प्रभाव भूकंप की गहराई, तीव्रता, जमीन की बनावट और स्थानीय परिस्थितियों पर भी निर्भर करता है। इसलिए अलग-अलग स्थानों पर झटकों का असर अलग हो सकता है।
कैसे मापी जाती है भूकंप की तीव्रता?
भूकंप से निकलने वाली ऊर्जा का आकलन उसकी मैग्नीट्यूड यानी परिमाण से किया जाता है। इसके लिए आधुनिक समय में विभिन्न प्रकार के भूकंपीय मापन पैमानों का इस्तेमाल किया जाता है। रिक्टर स्केल इसका एक प्रसिद्ध पैमाना है।
भूकंप का परिमाण बढ़ने पर उससे निकलने वाली ऊर्जा भी तेजी से बढ़ती है। हालांकि, किसी क्षेत्र में भूकंप के झटके कितने तेज महसूस होंगे और कितना नुकसान हो सकता है, यह केवल मैग्नीट्यूड से तय नहीं होता। इसमें भूकंप की गहराई, आबादी, इमारतों की मजबूती और जमीन की प्रकृति जैसे कारक भी महत्वपूर्ण होते हैं।

