जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: दिल्ली में कांग्रेस की 1 नवंबर को रामलीला मैदान में प्रस्तावित रैली को लेकर सियासत तेज हो गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर दिल्ली के व्यापारियों के प्रति समर्थन जताया। वहीं, दिल्ली के व्यापारिक संगठनों ने दिवाली के व्यस्त कारोबारी सीजन को देखते हुए कांग्रेस से रैली को त्योहार के बाद आयोजित करने की मांग दोहराई है। व्यापारियों को आशंका है कि रैली के कारण यातायात प्रभावित होने से बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही और कारोबार पर असर पड़ सकता है।
To every trader in Delhi: We love you and hear you.
The Govt shut the metro, sealed our roads and locked down our capital.
With a stolen vote nothing is safe – your shop, your savings, your children’s future.
Tell Modi to sack accused no. 4, Gyanesh Kumar and the protests will stop in 30 seconds.
दिल्ली के हर व्यापारी से: हम आपसे प्यार करते हैं, आपकी बात सुन रहे हैं।
मेट्रो सरकार ने बंद की, सड़कें सरकार ने सील की, राजधानी पर ताला सरकार ने लगाया।
जब वोट ही चोरी हो जाए, तो कुछ भी सुरक्षित नहीं – न आपकी दुकान, न आपकी बचत, न आपके बच्चों का भविष्य।
मोदी जी से कहिए – आरोपी नंबर 4, ज्ञानेश कुमार को हटाएं, 30 सेकंड में आंदोलन रुक जाएगा।
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) October 26, 2026
राहुल गांधी बोले- दिल्ली के हर व्यापारी की बात सुन रहे हैं
राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि दिल्ली के हर व्यापारी से वे प्यार करते हैं और उनकी बात सुन रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मेट्रो बंद करने, सड़कों को सील करने और राजधानी में आवाजाही प्रभावित होने के लिए सरकार जिम्मेदार है।
राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में वोट चोरी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि जब वोट ही चोरी हो जाए, तो कुछ भी सुरक्षित नहीं रहता। उन्होंने दुकानों, बचत और बच्चों के भविष्य का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग भी की। राहुल गांधी ने दावा किया कि ऐसा करने से 30 सेकंड में आंदोलन रुक जाएगा।
व्यापारियों ने रैली दिवाली के बाद कराने की मांग दोहराई
दिल्ली के व्यापारियों ने कांग्रेस की प्रस्तावित रैली को स्थगित कर दिवाली के बाद आयोजित करने की मांग की है। व्यापारियों ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के उस बयान का स्वागत किया, जिसमें उन्होंने रैली के आयोजन पर अंतिम निर्णय लेने से पहले पार्टी और विपक्षी गठबंधन के सहयोगियों के साथ चर्चा करने की बात कही थी।
व्यापारियों का कहना है कि दिवाली से पहले का समय कारोबार के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में बड़े राजनीतिक आयोजन के कारण यातायात बाधित होने या बाजारों तक ग्राहकों की पहुंच प्रभावित होने से कारोबारियों को नुकसान हो सकता है।
सीटीआई ने खरगे के बयान का किया स्वागत
व्यापारियों और उद्यमियों के संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बयान का स्वागत किया है। संगठन का कहना है कि रैली की तारीख पर दोबारा विचार करने की बात से व्यापारियों को उम्मीद जगी है।
सीटीआई के चेयरमैन बृजेश गोयल के मुताबिक, संगठन ने खरगे को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि दिवाली के व्यस्त कारोबारी सीजन को ध्यान में रखते हुए रैली को त्योहार के बाद आयोजित करने का फैसला लिया जाए।
व्यापारियों का कहना है कि धनतेरस से लेकर दिवाली और भाई दूज तक बाजारों में बड़ी संख्या में ग्राहक खरीदारी के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में इस अवधि के दौरान यातायात व्यवस्था प्रभावित होने से दुकानदारों की बिक्री पर असर पड़ सकता है।
दिल्ली के इन प्रमुख बाजारों पर पड़ सकता है असर
सीटीआई के अनुसार, रामलीला मैदान के आसपास करीब पांच किलोमीटर के दायरे में कई प्रमुख थोक और खुदरा बाजार स्थित हैं। इनमें चांदनी चौक, सदर बाजार, कश्मीरी गेट, चावड़ी बाजार, दरियागंज, कमला मार्केट, भागीरथ पैलेस, खारी बावली, नया बाजार, आजाद मार्केट, दरीबा ज्वैलरी मार्केट, किनारी बाजार, नबी करीम, करोल बाग, झंडेवालान और जामा मस्जिद जैसे इलाके शामिल हैं।
संगठन का दावा है कि इन बाजारों में करीब तीन लाख व्यापारी कारोबार करते हैं। दुकानदारों के परिवारों और कर्मचारियों को मिलाकर बड़ी संख्या में लोगों की आजीविका इन बाजारों पर निर्भर है।
व्यापारियों का कहना है कि यदि रैली में बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं, तो इसका असर केवल रामलीला मैदान के आसपास ही नहीं, बल्कि दिल्ली के अन्य कारोबारी इलाकों पर भी पड़ सकता है।
जंतर-मंतर प्रदर्शन का दिया उदाहरण
सीटीआई ने 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर हुए धरने-प्रदर्शन का हवाला देते हुए कहा कि उस दौरान दिल्ली के कई हिस्सों में यातायात और आवाजाही प्रभावित होने से कारोबार पर असर पड़ा था। संगठन का दावा है कि अक्टूबर में कारोबार को पहले ही हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
व्यापारियों ने आशंका जताई कि दिवाली के पीक सीजन में दोबारा ऐसी स्थिति बनने से कारोबारियों की परेशानी बढ़ सकती है। इसी वजह से उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से रैली की तारीख बदलने पर विचार करने की अपील की है।
रैली की तारीख पर फैसले का इंतजार
दिल्ली के व्यापारियों की मांग के बीच अब कांग्रेस नेतृत्व के अंतिम फैसले पर नजर है। एक ओर कांग्रेस की प्रस्तावित रैली और उससे जुड़े राजनीतिक मुद्दे चर्चा में हैं, तो दूसरी ओर व्यापारिक संगठन त्योहार के दौरान बाजारों की सामान्य गतिविधियां बनाए रखने पर जोर दे रहे हैं।
फिलहाल, व्यापारियों की मुख्य मांग यही है कि रैली को दिवाली के बाद आयोजित किया जाए, ताकि त्योहार के दौरान ग्राहकों की आवाजाही, यातायात और कारोबार पर संभावित असर को कम किया जा सके।

