शिखा चौधरी
जितनी सुविधाएं इंसान की जिंदगी में बढ़ती जा रही हैं, उतनी ही बीमारियां उसे घेर रही हैं। पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में बीमारियों एवं रोगों से लड़ने की ज्यादा क्षमता होती है, लेकिन महिलाएं अपने शरीर के प्रति ज्यादा लापरवाह रहती हैं। उनका पूरा ध्यान अपने परिवार की देखभाल में ही चला जाता है। वे अपना ख्याल नहीं रख पातीं। अपनी जीवन शैली और खान-पान में लापरवाही के चलते महिलाएं अक्सर बीमारियों एवं रोगों की शिकार हो जाती हैं।
थायराइड
थायराइड शरीर की एक ग्लैंड या ग्रंथि है जो शरीर में होने वाली विभिन्न क्रियाओं को नियंत्रित करती है। जब यह ग्लैंड ज्यादा सक्रिय हो जाता है तो थायराइड हार्मोन की मात्रा भी ज्यादा बढ़ जाती है, या जब भी थायराइड ग्लैंड कम सक्रिय हो जाता है तो थायराइड हार्मोन की मात्रा कम हो जाती है। दोनों ही स्थितियां गलत हैं और बीमारी पैदा करती हैं। ज्यादातर महिलाएं हाइपर थायराइड से ग्रसित होती हैं। थायराइड बीमारी को उसके लक्षणों द्वारा आसानी से पहचाना जा सकता है। इन लक्षणों में नाखून टूटना, सुस्त होना, वजन बढ़ना, नींद अधिक आना, थकान ज्यादा महसूस होना, बाल झड़ना, डिप्रेशन, चिड़चिड़ापन एवं पीरियडस के दौरान परेशानी होना जैसे कम या ज्यादा ब्लीडिंग होना, त्वचा खुश्क होना, किसी काम में मन न लगना हैं। जब भी ये लक्षण महसूस हों, तुरंत अपना थायराइड टेस्ट कराएं। यह रोग किसी भी उम्र में हो सकता है। प्रेग्नेंसी के दौरान इससे परेशानी हो सकती है। यह आनुवंशिक रोग है।
आस्टियोपोरोसिस
इसमें धीरे-धीरे शरीर की हड्डियां कमजोर होकर टूटने लगती हैं। यह कैल्शियम और विटामिन डी की कमी से होने वाली बीमारी है। इसमें पहले हड्डियां कमजोर होती हैं, फिर वे धीरे-धीरे टूटने लगती हैं। ज्यादातर महिलाओं को इस बीमारी का पता तभी चलता है जब उनकी हड्डियों में फ्रैक्चर हो जाता है। टूटी हुई ये हड्डियां फिर आसानी जुड़ती भी नहीं हैं। यह बीमारी अधिकतर ज्यादा उम्र की महिलाओं में होती है चूंकि मेनोपॉज की वजह से शरीर में एस्ट्रोजन की मात्र कम हो जाती है। यह बीमारी मेनोपॉज के बाद शारीरिक श्रम न करने एवं आहार में विटामिन डी एवं कैल्शियम की कमी के कारण होती है इसलिए इसकी जरा भी शंका होते ही तुरंत जांच करवाएं। इसके लिए डेक्सा नामक एक्सरे का प्रयोग होता है। इससे पता चल जता है कि आपके शरीर में बोन फ्रैक्चर की क्या स्थिति है। इससे बचने के लिए अपने आहार में विटामिन डी एवं कैल्शियम वाले खाद्य पदार्थ लें एवं व्यायाम करें। यह बीमारी आनुवंशिक भी है।
एनीमिया
महिलाओं में सबसे ज्यादा होने वाली बीमारी है एनीमिया। एनीमिया के दौरान खून में हीमोग्लोबिन की मात्रा कम हो जाती है यानी कि शरीर में खून की कमी हो जाती है। ऐसा खून में आयरन की कमी के कारण होता है। इससे बचने का सही रास्ता है संतुलित आहार लें। वे खाद्य पदार्थ लें जिनसे आपके शरीर को आयरन मिले जैसे गुड़, काले चने, हरी पत्तेदार सब्जियां, फल, दूध साथ में विटामिन सी, फोलिक एसिड एवं विटामिन बी कांपलेक्स आदि।
ट्यूमर
जब शरीर के अंदर कोई गांठ बन जाती है तो वह ट्यूमर कहलाती है। औरतों में यह बीमारी ज्यादा होती है। 35 साल की उम्र के बाद अक्सर महिलाओं को इस बीमारी से ग्रसित देखा जा सकता है। यदि इसका आकार छोटा है और इसमें दर्द नहीं होता हो तो कोई घबराने वाली बात नहीं है। कभी-कभी अबार्शन की स्थिति, बांझपन या प्रेग्नेंसी के दौरान वेजाइना में गांठ हो जाती है। यह बाद में अपने आप ठीक हो जाती है लेकिन यदि इसमें दर्द हो या पीरियड में ज्यादा ब्लीडिंग हो रही हो तो इसका तुरंत इलाज किया जाना चाहिए वरना परिणाम भयंकर होता है। वैसे भी प्रत्येक महिला 35 साल की उम्र के बाद अपना गाइनी चेकअप जरूर कराएं ताकि इस तरह की समस्याओं से निपटा जा सके।
डायबिटीज
शरीर में इंसुलिन की कमी तथा ब्लड में शुगर की अधिकता के कारण डायबिटीज होती है। महिलाओं में प्राय: डायबिटीज के अलग ही कारण होते हैं जैसे कि प्रेग्नेंसी के दौरान दबाव पड़ने से ब्लड में शुगर का लेवल बढ़ जाता है। यही कारण है डायबिटीज होने का। यह प्रेगनेंसी के बाद ठीक भी हो जाती है।
कमर दर्द व पीठ दर्द
महिलाओं को अक्सर कमर एवं पीठ दर्द में शिकायत होती है। कम उम्र में ही महिलाएं इस परेशानी से ग्रसित होती हैं। ऐसा उल्टे-सीधे तरीके से उठने-बैठने की वजह से होता है। दिन भर कुर्सी पर पीठ लगाकर बैठने से काम करने से यह समस्या उत्पन्न होती है। मूव वगैरह की मालिश करने से इसका सही निवारण नहीं हो सकता। नियमित चलने-फिरने एवं एक्सरसाइज से ही इसका सही इलाज हो सकता है। इसके अलावा महिलाओं में डिप्रेशन, लो ब्लड प्रेशर, गठिया आदि अन्य बीमारियां हो जाती हैं। ऐसा खान-पान में कमी की वजह से होता है, इसलिए महिलाओं को भी संतुलित आहार लेना चाहिए और नियमित व्यायाम करना चाहिए ताकि कोई समस्या न सामने आने पाए।


