- 2025 तक भारत को टीबी मुक्त करने का है सरकार का संकल्प
जनवाणी ब्यूरो |
सहारनपुर: सरकार के संकल्प के अनुरूप स्वास्थ्य विभाग टीबी उन्मूलन के खात्मे की दिशा में प्रयत्नशील है। इस बाबत जनपद में दो माह का एक्टिव केस फाइंडिंग (एसीएफ) और निक्षय पोषण योजना (डीबीटी) नामक अभियान की शुरूआत कर दी गई है। दो सितंबर से शुरू हुए इस अभियान को एक नवंबर तक चलाये जाने का निश्चय निर्णय किया गया है। फिलहाल, टीबी के नए मरीजों की खोज की जा रही है,। साथ ही उनका उपचार भी किया जा रहा है।
सहारनपुर जनपद में अभियान गत दो सितंबर से शुरू किया गया है। इस संबंध में जिला क्षय रोग अधिकारी डा.क्टर रणधीर सिंह ने बताया -कि यह अभियान एक नवंबर तक चलाया जाएगा। अभियान चार चरणों में चलेगा। पहला चरण दो से छह सितबंर तक चलाया जा चुका है।
उन्होंने बताया कि -इसमें एनटीईपी कर्मियों ने अनाथालय, वृद्धाघाश्रम, नारी निकेतन, बाल संरक्षण गृह, मदरसा, नवोदय विद्यालय, कारागार आदि जगहों पर जा-जाकर टीबी के मरीजों की खोज की। पहले चरण में टीबी के दो नए मरीज मिले। डा.क्टर रणधीर सिंह के अनुसार दूसरा चरण शुरू गया है। सात सितबंर से इसकी शुरूआत की गई है। यह अभियान 16 सितबंर तक चलाया जाएगा।
उन्होंने बताया- इसके अभियान के तहत शहरी एवं ग्रामीण मलिन बस्तियों और हाई रिस्कअति जोखिम जनसंख्या वाले लोगों (एचआईवी एवं डायबिटीज) पर फोकस रहेगा। इसमें स्वास्थ्य कर्मी घर-घर जाकर टीबी के रोगियों को चिह्नित करेंगे। तीसरा चरण 17 से 30 सितबंर तक चलेगा। इसमें सब्जी मंडी, फल मंडी, लेबर मार्केट, निमाणार्धीन प्रोजेक्ट, ईंट भट्ठों, स्टोन क्रेशरों, खदानों और साप्ताहिक बाजारों में रोगी खोजे जाएंगे। अंतिम और चौथा चरण एक से 31 अक्तूबर तक चलेगा।
इसमें जिले के निजी चिकित्सकों से संपर्क किया जाएगा। इसमें सभी एनटीईपी के अधिकारी और कर्मचारी शामिल रहेंगे। उन्होंने बताया प्रधानमंत्री ने देश को 2025 तक टीबी से मुक्त करने का लक्ष्य रखा है। अभियान में शामिल कर्मचारियों को निर्देश दिए हैं कि अभियान के दौरान जो भी संदिग्ध लक्षणयुक्त मरीज मिले तुरंत उसकी ट्रू नाट या सीबी नॉट मशीन से जांच कराई जाए। टीबी की पुष्टि होने पर इलाज तो शुरू कराया जाए,। साथ ही टीबी की पुष्टि को पोर्टल पर अपडेट भी करना होगा।
जिले में टीबी रोगियों की संख्या
जनपद में वर्तमान में टीबी के करीब 5100 मरीज हैं। इनमें सामान्य टीबी के मरीजों की संख्या 4700 है। शेष 400 मरीज एमडीआर (मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट) टीबी के हैं। इन सभी रोगियों को टीबी की दवा मुफ्त दी जाती है। फिलहाल, सरकार की मंशा है कि सन 2025 तक देश को टीबी मुक्त किया जाए। इसी के अनुरूप स्वास्थ्य विभाग पूरी तत्परता से अभियान चलाकर टीबी रोगियों का इलाज करा रहा है।

