जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के बृहस्पति भवन में सोमवार को महामना मालवीय मिशन के स्थापना दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 मालवीय के विचारों की प्रसंगिता पर एक व्याख्यान का आयोजन किया गया। जिसमे मुख्य अतिथि के रूप में परमानंद निकेतन ऋषिकेश के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती मौजूद रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ विवि कुलपति प्रो,एनके तनेजा और मुनीश कुमार ने मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप जलाकर किया। मुनीश कुमार ने बताया की मालवीय मिशन संस्था बनारस विवि द्वारा बनाई गई संस्था है,लेकिन इस संस्था से बनारस विश्वविद्यालय के अलावा 75 प्रतिशत लोग बाहर से जुड़े हुए हैं।
मुख्य अतिथि स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि अंतिम सांस तक अपने आप को सही रखे। भारत रत्न मालवीय का जीवन हम सबके लिए मिसाल है। ऐसी मशाल थे जो दूसरों के लिए बचपन से ही जलने लगी थी। उन्होंने चुनौतियों का अपना पथ बनाया था और अपना जीवन सात्विकता के साथ जिया और लोगों को बताया कि कुछ भी असंभव नहीं है।
वही उन्होंने बताया कि मालवीय ने समाज को दिखाया की स्वाभिमान तो रहे लेकिन अभिमान न हो किसी बात का। देश बदल रहा है। मालवीय खुद चलते फिरते शिक्षा का मंदिर थे। नरेंद्र मोदी की सराहना करते हुए उन्होंने कहा की ये हमारा सौभाग्य है कि हमारे देश को ऐसे प्रधानमंत्री मिले हैं। पर्यावरण का संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि सभी को मिलकर अधिक से अधिक पौधे लगाने चाहिए।
ताकि जल और नदिया ने सुख सके। सरस्वती पहले ही सूख चुकी है गंगा ने सूखे इसके लिए सभी विश्वविद्यालयों, न्यायालय, जेल और सभी प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा अधिक से अधिक पेड़ लगाने के लिए लोगों को प्रेरित करना होगा। मेरठ के लोगों को भी कुछ अलग करना चाहिए ताकि लोगों को पता चल सके कि मेरठ में दूसरी क्रांति हो रही है।
देश की सराहना करते हुए स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि देश आगे बढ़ रहा है और विदेशों में भारत का नाम हो रहा है। पहले विदेशों में बिंदी साड़ी को अलग माना जाता था लेकिन विदेशी पर बिंदिया साड़ी को अपना रहे हैं। कार्यक्रम के दौरान स्मारिका का विमोचा भी किया गया। कार्यक्रम में ओपी शर्मा, पीपीएस चौहान,कर्ण सिंह,सतीश चंद्रा आदि मौजूद रहे।
शिक्षा में सुधार की जरूरत
स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि सभी विश्वविद्यालयों कॉलेजों को आगे आना होगा ताकि युवाओं में जो संस्कार खत्म हो रहे हैं उन्हें विकसित किया जा सके। उन्होंने कहा कि सड़कों पर कारों का काफिला बढ़ता जा रहा है और संस्कारों का काफिला हम ता जा रहा है। जरूरत है संस्कारों की ताकि देश का विकास सही तरह से हो सके। सभी को अपनी संस्कृति व जड़ों से जुड़ना जरूरी है।
युवा जागरुक करेंगे तो सब सेट होगा नहीं तो सब अपसेट हो जाएंगे। विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. एनके तनेजा ने कहा कि नई शिक्षा नीति के तहत कई तरह की योजनाएं तैयार की जा रही है ताकि छात्रों में संस्कारों को विकसित किया जा सके। वह इंटरनेट के बारे में उन्होंने कहा कि इंटरनेट के साथ भी चाहिए ताकि इसका संगम बन सके।

