Wednesday, May 6, 2026
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जीत का ज्यादातर सेहरा ठाकुर के सिर पर बांधता रहा देवबंद

  • बहुत दिलचस्प होता रहा है देवबदं सीट पर सत्ता का संग्राम

    जनवाणी संवाददाता |

सहारनपुर: गंगोह को सहारनपुर की राजनीतिक राजधानी जरूर कहा जाता है किंतु देवबंद की अपनी अलग अहमियत और पहचान है। हर चुनाव में लगभग सभी दलों की निगाहें देवबंद पर होती हैं। इस सरजमीं पर बड़े सियासतदां सभाएं भी करते रहे हैं।

हाल ही में सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने देवबंद में एटीएस ट्रेनिंग सेंटर की संग-ए-बुनियाद रखी तो इल्म की इस नगरी ने सियासी प्याले में तूफान उठा दिया। इस चुनाव में किस दल से कौन सूरमा मैदान में ताल ठोंकेगा, यह तो तय नहीं हुआ है किंतु यह तय है कि देवबंद में सत्ता संग्राम इस बार भी काफी दिलचस्प होगा।

बता दें कि देवबंद में कुल 3, 47, 527 मतदाता हैं। इसमें 1, 85,901 पुरुष जबकि 1, 61, 611महिला मतदाता हैं। हर बार यहां चुनाव बड़ा पेचीदा होता है। हिंदू मतों के ध्रुवीकरण पर इस बार ज्यादा ही जोर देखा जा रहा है किंतु तस्वीर अभी धुंधली है। अगर अतीत के व्यतीत को देखें तो सन 1952 से लेकर 2017 तक चुनावों का लब्बोलुआब ये रहा है|

कि यहां ठाकुर बिरादरी के ही ज्यादातर विधायक चुने गए हैं। केवल तीन दफा ही ऐसा रहा जबकि गैर राजपूत बिरादरी के विधायक चुने गए। सन 2016 के विधान सभा उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में माविया अली ने देवबंद सीट पर जीत दर्ज की।

इसके पहले सन 2007 के विधान सभा चुनाव में बसपा के टिकट पर गुर्जर बिरादरी के मनोज चौधरी ने सपा उम्मीदवार राजेंद्र सिंह राणा को परास्त किय था। थोड़ा और पीछे मुड़कर देखें तो सन 1977 के विधानसभा चुनाव में जनता पार्टी के टिकट पर मैदान मेंं उतरे मौलवी उस्मान ने ठाकुर महावीर सिंह को हराकर गैर राजपूत के रूप में देवबंद का प्रतिनिधित्व किया था। बाकी हर दफा इस सीट पर राजपूतों का ही दबदबा रहा।

इसी सीट पर तीन बार ठाकुर फूल सिंह ने विजय हासिल की। फूल सिंह ने 1952, 1962 और 1967 के विधानसभा चुनाव में भी मैदान मार लिया था। इनके तीन बार के रिकार्ड को छूने में सफल रहे थे ठाकुर महावीर सिंह। महावीर सिंह ने 1969, 1980 और 1985 में भी कांग्रेस के टिकट पर लड़कर चुनाव जीते थे। 1957 में निर्दलीय यशपाल सिंह ने भी जीत दर्ज की। यशपाल भी ठाकुर बिरादरी से थे। बाकी आगे भी यह सिलसिला चलता रहा।

1993 में भाजपा की शशीबाला ने जीत दर्ज की। वह भी ठाकुर बिरादरी से हैं। इससे पहले 1991 में जनता दल से वीरेंद्र सिंह ने यहां की रहनुमाई की। सन 2002 में राजेंद्र सिंह राणा ने देवबंद सीट बसपा के टिकट पर फतह की थी।

2012 के विस चुनाव में राजपूत बिरादरी के राजेंद्र राणा फिर चुने गए। यह और बात है कि इस बार राणा सपा के टिकट पर लड़े थे। सन 2017 में राजपूत बिरादरी से कुंवर ब्रजेश सिंह ने चुनाव जीता। अब जबकि विस चुनाव सिर पर है तो सभी दल जातीय समीकरणों को साध रहे हैं। किस दल से किसे टिकट मिलेगा, यह अभी पक्का नहीं है।

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