- पश्चिमी उत्तर प्रदेश रहा है पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह का गढ़
- पिछले दो लोकसभा और एक विस चुनाव में भाजपा पा चुकी है किले पर फतेह
- यहां बड़ी तादाद में जाटों को टिकट, हिंदुत्व के कार्ड को फिर भुनाने की कोशिश
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: यूपी का बड़ा गन्ना बहुल क्षेत्र वेस्ट यूपी किसान नेता पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह का गढ़ रहा है। पश्चिमांचल सियासी तौर पर भी उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा भाग है और चौधरी साहब की सियासी विरासत कहा जाता है, मगर मुजफ्फरनगर में वर्ष 2013 के साम्प्रदायिक दंगे से भारतीय जनता पार्टी ने इस विरासत में हिंदुत्व का तड़का लगा दिया। इसी तड़के की बदौलत भाजपा ने 2014 के लोकसभा, 2017 के विधानसभा और फिर 2019 के लोकसभा चुनाव में यहां से बड़ी जीत दर्ज की। इस बार भी विधानसभा चुनाव में भाजपा हिंदुत्व कार्ड के सहारे बड़े चौधरी की विरासती वोटों का धुव्रीकरण करने को कड़ी मशक्कत कर रही है।

गौरतलब है कि, वर्तमान में वेस्ट यूपी में भाजपा के कई सांसद और दर्जनभर विधायक जाट बिरादरी से हैं। दंगे के बाद बने माहौल का फायदा उठाकर भाजपा ने कुछ जाट नेताओं को टिकट देकर यहां के जाट वोटरों को अपने पक्ष में किया था। इसके बाद चौधरी साहब की सियासी विरासत का किला दरक गया था। इसी का बात का लाभ उठाकर पिछले तीन चुनाव में भाजपा ने वेस्ट यूपी में बड़ी जीत का स्वाद चखा है। किसानों के आंदोलन के बाद यहां फिर से जीत के लिए हाथ-पैर मार रही भाजपा चुनाव में हिंदुत्व के नाम पर फिर से जाट मतदाताओं पर डोरे डाल रही है। यही वजह है जो पहले चरण के चुनाव में बड़ी संख्या में जाट बिरादरी के प्रत्याशियों को उसने मैदान में उतार दिया है।
भाजपा की यह चाल इस बार कितनी सफल होती है, यह तो चुनाव परिणाम के बाद ही पता चलेगा, मगर फिलहाल इतना जरुर है कि पार्टी के शीर्ष स्तर के नेता दौरा कर जाटों की नब्ज को टटोलने में लगे हैं और वोटों के धुव्रीकरण की पुरजोर कोशिश की जा रही है। उधर, शनिवार को जाट बाहुल्य क्षेत्र शामली, बागपत और मेरठ में केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपना चुनावी दौरा किया। इस दौरान उन्होंने कैराना के पलायन का जहां फिर से राग अलापा, वहीं चौधरी साहब की शान में जमकर कसीदे भी पढ़े।
भाजपा के चाणक्य की कोशिश है कि किसी तरह प्रथम चरण के चुनाव से पहले वेस्ट यूपी के नाराज जाट मतदाताओं को भाजपा के पाले में फिर लाया जाए। इतना ही नहीं भाजपा की लगातार कोशिश फिर से बड़े चौधरी की सियासी विरासत में हिंदुत्व का कार्ड खेलने की है। हिंदुत्व के मुद्दे को धार देकर वह किसान आंदोलन से पटी साम्प्रदाय की खाई को फिर से गहराने की फिराक में हैं। यहीं वजह है कि वर्चुअल चुनाव प्रचार होने के बाद भी गृह मंत्री का दौरा जाटलैंड में हो रहा है। इस बार यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या फिर से बड़े चौधरी के सियासी गढ़ में भाजपा का हिंदुत्व कार्ड चलता है या फिर किसान आंदोलन के बाद चौधरी साह के दल रालोद को संजीवनी मिलती है?
हिंदुत्व की लहर में दरकता रहा जाटों का गढ़
देश में हिंदुत्व की लहर में वेस्ट यूपी के जाटों का किला दरकता रहा है। 1992 की राम लहर के बाद भाजपा के सोमपाल शास्त्री ने स्व. चौधरी अजित सिंह को बागपत लोकसभा सीट पर हरा दिया था। इस लहर का असर 1998 तक पश्चिमी उत्तर प्रदेश में रहा था। इसके बाद भाजपा फिर से यहां सियासी हाशिए पर चली गई थी और रालोद फिर से सियासी वजूद में आया था। इसके बाद 2013 के साम्प्रदायिक दंगों से इस क्षेत्र में फिर से हिंदुत्व की आंधी चली और भाजपा ने देश और प्रदेश दोनों जगहों पर सरकार बनाई। वेस्ट यूपी के 17 जिलों की 136 विधानसभा सीटों पर पिछले चुनाव की बात करें तो हिंदुत्व की आंधी में भाजपा ने 109 सीट जीती थी। विपक्ष के हाथ यहां केवल 27 सीट आई थी।

