- हिंदू-मुसलमान के बहाने भाजपा खेल रही भावनात्मक कार्ड
- किसान का नारा चलेगा या दंगे पर बंटवारा?
- क्या जाट वोटरों को दंगे के नाम पर बांट पाएगी भाजपा?
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: यूपी चुनाव का सारा दारमोदार इस बार वेस्ट की हवा पर केंद्रित है। यहां किसानों की फसलों के उचित दाम और उनके गन्ना भुगतान का एक बड़ा मुद्दा है, मगर मतदान से पहले भाजपा ने साम्प्रदायिक दंगे को एक बार फिर हवा देकर हिंदु मतों का ध्रुवीकरण करने की कोशिश शुरु कर दी है।
अब ऐसे में पहली चरण का मतदान तय करेगा कि यूपी में किसानों का नारा पश्चिमी से पूरब तक चलेगा या फिर दंगे पर किसानों के वोटों का भी बंटवारा होगा? इतना ही नहीं क्या इस बार भी दंगे के नाम पर जाट वोटरों को बांटने में भाजपा कामयाब हो पाएगी? इन सब बातों पर ही आगे की चुनावी हवा का रुख तय होगा।
गौरतलब है कि, उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के प्रथम चरण में आगामी दस फरवरी को वोट डाले जाने हैं। यह चरण गन्ना किसान और खासकर जाट बहुल है। पहले चरण में मेरठ व सहारनपुर मंडल के सहारनपुर को छोड़कर बाकी आठ जिले शािमल हैं। वहीं, आगरा, मथुरा और अलीगढ़ जिले की 21 सीटों पर भी इसी चरण में मतदान होना है। इस प्रकार प्रथम चरण में चार मंडल के 11 जिलों की 58 सीटों पर जहां वोटिंग हैं, वहां पर बड़ी किसान आबादी खासकर जाट बिरादरी का बाहुल यह क्षेत्र हैं।
किसान आंदोलन के बाद इस बार के चुनाव में यहां भाजपा को छोड़ बाकी सियासी दलों ने किसानों की फसलों के दाम से लेकर समय पर गन्ना भुगतान तक की बात की है। किसान बिरादरी के बीच रालोद-सपा गठबंधन की पैठ बनती देख फिर से वेस्ट यूपी की इस बेल्ट में भाजपा के चाणक्य मुजफ्फरनगर के साम्प्रदादियक दंगे की चर्चा कर इसको बड़े चुनावी हथियार के रुप में ले आए हैं।
इसके सहारे भाजपा का मकसद एक बार फिर से यहां भावनात्मक कार्ड खेलना है। बीजेपी नेताओं की पूरी कोशिश दंगे के बहाने हिंदु मतों का ध्रुवीकरण कराने की है, मगर पहले चरण में यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा का यह प्रयास उसके मास्टर स्ट्रोक में तब्दील हो पाता है या नहीं? दंगे के नाम पर किसान खासकर जाट मतों में वह कितनी सेंधमारी कर पाएगी?
जनपद सीट
शामली तीन
मुजफ्फरनगर छह
बागपत तीन
मेरठ सात
हापुड़ तीन
गाजियाबाद पांच
गौतमबुद्धनगर तीन
बुलंदशहर सात
मथुरा पांच
अलीगढ़ सात
आगरा नौ
मतदान चरण-पहला
कुल जिले-11
कुल सीट-58

