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हस्तिनापुर में खिसक रहा बसपा का वोट बैंक

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हस्तिनापुर में खिसक रहा बसपा का वोट बैंक
  • बागी प्रत्याशी और बसपा से नाराज है कार्यकर्ता

जनवाणी संवाददाता |

हस्तिनापुर: 10 फरवरी को उत्तर प्रदेश विधानसभा के प्रथम चरण के होने वाले मतदान की तमाम प्रक्रिया पूरी हो गई है। महाभारतकालीन तीर्थ नगरी हस्तिनापुर में मुख्य मुकाबले की बात करें तो भाजपा और सपा के बीच है। बसपा प्रत्याशी की बात करें तो मुकाबले में दूर-दूर तक नजर नहीं आ रहे। जिसका मुख्य कारण बागी प्रत्याशी और बसपा के नाराज कार्यकर्ता है।

मतदान की तारीख नजदीक आती नजर आ रही है, लेकिन बसपा के बाहरी प्रत्याशी को बसपा कार्यकर्ता अभी तक स्वीकार करने को तैयार नहीं है। जिसके चलते बसपा का स्थाई वोट बैंक जाटव समाज भी बसपा से अन्य दलों की और भागता नजर आ रहा है। पिछले दो सप्ताह की बात करे तो कई दर्जन बसपा के मुख्य कार्यकर्ताओं सहित हजारों कार्यकर्ता अन्य दलों की सदस्यता ले चुकें हैं। ऐसे में बसपा मुकाबले से बाहर ही नजर आ रही है।

हस्तिनापुर की महाभारत का समय जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है। वैसे ही बसपा प्रत्याशी महाभारत से बाहर होते जा रहे हैं। बसपा कार्यकर्ताओं की माने तो बसपा प्रत्याशी की घोषणा एकदम से किये जाने और घोषणा से पूर्व कार्यकर्ताओं की राय न लिया जाना है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि क्षेत्र के ही बसपा के पुराने कार्यकर्ता विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रहे थे, लेकिन किसी को मौका नहीं दिया गया।

उल्टे एकदम से बाहरी प्रत्याशी को चुनाव मैदान में उतारकर सभी को चौका दिया है, जो वे स्वीकार नहीं कर रहे हैं। इसके बाद बसपा प्रत्याशी का कार्यकर्ताओं के प्रति रवैया भी ठीक नहीं है। जिसके चलते आये दिन दर्जनों कार्यकर्ता टूटकर अन्य दलों में जा रहे हैं। ऐसे में बसपा की नैय्या की पतवार किसी के हाथों में भी नजर नहीं आ रही है।

हस्तिनापुर विधानसभा की हस्तिनापुर नगर पंचायत से तीन बार के चेयरमैन भी बसपा प्रत्याशी से खफा नजर आ रहे हैं। कार्यकर्ताओं की माने तो उनकी नाराजगी का मुख्य कारण बसपा से टिकट न मिलाना है। वे सालों से हस्तिनापुर विधानसभा से तैयारी कर रहे थे, लेकिन ऐनवक्त पर किसी और को प्रत्याशी घोषित कर दिया गया।

सोशल मीडिया पर नाराजगी दिखा रहे कार्यकर्ता

खुले मैदान से लेकर सोशल मीडिया तक पर कार्यकर्ता बसपा प्रत्याशी से नाराज नजर आ रहे हैं। जिसको लेकर बसपा खेमे में शुरू से ही खलबली मची हुई है। इसके बाद बसपा प्रत्याशी का कार्यकर्ताओं के प्रति व्यवहार ठीक न होना बसपा के गले की फांस बनता नजर आ रहा है। बसपा प्रत्याशी कार्यकर्ताओं को जोड़ना तो दूर की बात, अपने कार्यकर्ताओं को ही संभालते नजर नहीं आ रहे हैं।