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सियासतमय में हो गया मंजूर परिवार

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सियासतमय में हो गया मंजूर परिवार
  • मेरठ की विभिन्न सीटों से पांच बार विधायक रहे मंजूर अहमद

जनवाणी संवाददाता |

किठौर: कोशिशें जन्मजात कला को प्रखर करती हैं। प्रखरता आते ही चुनौतियां धड़ाम और व्यक्ति सफलता के नए आयाम छूता चला जाता है। लोग उसकी कला का लोहा मानने लगते हैं। बस यही किया पूर्व विधायक मंजूर अहमद ने। किठौर में जन्में मंजूर अहमद राजनीतिक परिवार से तो नहीं थे मगर नेतृत्व क्षमता उनमें कूट-कूटकर भरी थी। राजनीति की फर्स्ट स्टेज ग्राम प्रधानी के चुनाव में हार के बाद इस शख्सियत ने सियासत के जिस फलसफे पर काम किया उससे नसिर्फ मेरठ बल्कि वेस्ट में इस परिवार की एक अलग राजनीतिक पहचान बन गई।

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मंजूर अहमद के सियासी सफर पर बात करें तो सर्वप्रथम उन्होंने 1964 में किठौर में ग्राम प्रधान चुनाव लड़ा और चंद वोटों से हार गए। लेकिन हौंसले ने साथ नहीं छोड़ा। 1967 में एसएसपी के टिकट पर किठौर से पहला विधानसभा चुनाव लड़ा और यहां 10 साल से प्रतिनिधित्व कर रही श्रद्धा देवी को 16000 मतों से हराया। 1969 में पुन: किठौर से एसएसपी के विधायक बनें।

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तत्पश्चात कांग्रेस में शामिल हुए और 1974 का चुनाव गढ़मुक्तेश्वर से जीतकर विधानसभा पहुंचे। 1975 में इमरजेंसी के बाद कांग्रेस की स्थिति बिगड़ी और प्रदेश से पार्टी का लगभग सफाया हो गया। ऐसे हालात में 1977 के विस चुनाव में मंजूर अहमद ने जनसंघ का गढ़ बन चली मेरठ शहर सीट पर दिग्गज नेता मोहनलाल कपूर को हराकर कांगे्रस का परचम लहराया।

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इतना ही नहीं उन्होंने मेरठ में कांगे्रस का कार्यक्रम कराया जिसमें इंदिरा गांधी बतौर मुख्यातिथि बुलाईं गईं। 1980 में मंजूर पुन: इस सीट पर विजयी हुए।

यादों में जिंदा हैं मंजूर

निजामुद्दीन किठौर और साबिर अली पुंडीर बड्ढा कहते हैं कि लीडर मंजूर को दुनिया से विदा हुए साढ़े 22 बरस बीत गए। मगर यहां के लोगों की यादों में वो आज भी जिंदा हैं। आफताब चौहान मंजूर अहमद का संस्मरण सुनाते हुए कहते है कि 1980 में मेरठ शहर सीट से प्रत्याशी थे।

नादिर अली बिल्डिंग में बैठे समर्थकों से बातें कर रहे थे। अचानक उठे और बोले मेरे साथ चलो। पूछने पर डांट दिया और सीधे अपने प्रतिद्वंद्वी मोहनलाल कपूर के घर जा पहुंचे। वहां उनकी मां से जीत का आशीर्वाद मांगा। मोहनलाल कपूर की मां ने अपने बेटे के चुनाव लड़ने का हवाला दिया तो मंजूर बोले मां मैं भी तो तेरा बेटा हूं। और आर्शिवाद लेकर लौटे।

इंदिरा और राजीव के करीब थे मंजूर

मंजूर अहमद पूर्व पीएम इंदिरा व राजीव गांधी के बहुत करीब थे। कहा जाता है कि 1977 में मेरठ शहर से विधायक बनने के बाद इंदिरा गांधी भी मंजूर अहमद को लीडर मंजूर कहकर भी पुकारती थीं। बताया कि 1980 में जनसभा करने मेरठ पहुंची इंदिरा का हेलीकॉप्टर खराब हो गया। सभा के बाद हेलीकॉप्टर रिपेयर होने तक तत्कालीन डीएम और एसएसपी उन्हें कुछ देर के लिए सर्किट हाउस ले जाने लगे, लेकिन इंदिरा ने मना कर दिया और वह मंजूर अहमद के घर ठहरीं।