- सड़कों पर खतरे बने ओवरलोड वाहनों से निगाहे फेर रहे अफसर
जनवाणी संवाददाता |
परीक्षितगढ़: कस्बे की सड़कों से रोज ओवरलोड वाहन बेखौफ होकर गुजरते हैं। इन भीमकाय वाहनों से भगवान ही बचाये, मौत के दूत बनकर सड़कों पर गुजर रहे हैं। इन ओवरलोड वाहनों को देखकर अधिकारियों से लेकर पुलिस तक की निगाहें झुक जाती है। ओवरलोड वाहन उनके सामने से ही गुजर जाते हैं। तमाम आदेशों के बावजूद इन पर लगाम नहीं कसी जा रही है।
आखिर कम लागत में ज्यादा मुनाफा कमाने के लालच ने वाहनों को ओवरलोड बना दिया है। इन वाहनों से होनी वाली मोटी कमाई ने अधिकारियों की आंख मूदने को मजबूर कर दिया है। प्रतिदिन हजारों ओवरलोड वाहन कस्बे के चौराहों से बेखौफ होकर गुजर जाते हैं, लेकिन अधिकारी ओवरलोड वाहनों की चेकिंग भी नहीं करते हैं, लेकिन सुनसान चौराहों पर सड़कों किनारे खड़े वाहन चालक और आरटीओ विभाग के कर्मचारियों द्वारा जरा-सी बात हुई नहीं कि ओवरलोड वाहन फिर से सड़कों पर दौड़ने लगते हैं।
पुलिसकर्मी भी चेकपोस्ट पर बैरियर लगाए खड़े रहते हैं। पुलिस कर्मी इन ओवरलोड वाहनोें को रुकने का इशारा बेखूबी करते हैं। कस्बे के मवाना, किठौर, मेरठ बस स्टैंड व चौराहों पर पुलिसकर्मी तैनात रहते हैं। आरटीओ के अधिकारी भी ओवरलोड वाहनों को देखकर नजरे चुरा लेते हैं। आरटीओ विभाग की ओर से ओवरलोड वाहनों को रोकने का दावे किए जाते हैं। जबकि दावे हकीकत से बिलकुल जुदा है। आरटीओ विभाग द्वारा अभियान चलाकर जनता और मीडिया से वाहवाही भी लूटी जाती है।
ओवरलोड वाहन बेखौफ सड़कों पर दौड़ते रहते हैं। जिससे आरटीओ विभाग की पोल खुल जाती है। ओवरलोड वाहनों से सरकारी राजस्व को भी नुकसान होता है। खतरनाक तरीके से दौड़ रहे ओवरलोड वाहनों से आम जनता व अन्य वाहन चालकों को खतरा बना रहता है। ओवरलोड वाहनों के कारण ही समय से पहले सड़कें क्षतिग्रस्त हो जाती है। जिसका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ता है।
कांवड़ पटरी को निगल रहे भारी वाहन
चौधरी चरण सिंह कांवड़ मार्ग गंगनहर पटरी को भारी वाहन निगल रहे हैं। प्रतिबंध के बाद पटरी पर भारी वाहन बिना रोक टोक फर्राटा भर रहे हैं। जिसके चलते गंगनहर पटरी फिर से क्षतिग्रस्त होने लगी है। थोड़ी सी लापरवाही के कारण करोड़ों रुपये की लागत तैयार हुए इस मार्ग को टूटने के लिए छोड़ दिया गया है। यदि भारी वाहनों पर रोक लगाई जाए तो गंगनहर पटरी की दशा को ठीक किया जा सकता है।

कांवड़ मार्ग गंगनहर पटरी वैसे तो कांवड़ यात्रा के लिए बनाया गया है। चौड़ीकरण के बाद से पटरी पर ट्रैफिक बढ़ गया है। भारी वाहन टोल से बचने के लिए गंगनहर पटरी से गुजरते हैं। इन भारी वाहनों के कारण आए दिन पटरी पर दुर्घटना भी होती रहती है। साथ ही गंगनहर पटरी भी क्षतिग्रस्त होने लगी है।
कहने को पटरी पर भारी वाहनों के आवागम पर प्रतिबंध लगा हुआ है। मगर पटरी पर भारी वाहन फर्राटा भर रहे हैं। गंगनहर पुल पर पुलिस पिकैट तैनात रहती है। मगर पुलिस भी भारी वाहनों को नहीं रोकती है। वर्तमान में पटरी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हालत में पहुंच चुकी है। यही हाल रहा तो पटरी की हालत बहुत जल्द जर्जर अवस्था में पहुंच जाएगी।

