- कार्डधारकों को दिसंबर का राशन दिलाने में बेबस बना विभाग
जनवाणी संवाददाता |
फलावदा: सरकार ने चुनावी बयार में गरीबों को होली तक हर महीने मुफ्त राशन बटवाने की घोषणा तो कर दी, लेकिन योजना को अमली जामा पहनाने में शासन हांफ गया। मवाना तहसील की करीब पांच दर्जन दुकानों को खाद्यान मयस्सर नहीं होने के चलते लाखो गरीब फ्री राशन से महरूम रह गए। आपूर्ति विभाग ने हाथ खड़े करते हुए बेबसी का रोना रोना शुरू कर दिया है।
विधानसभा चुनाव के मद्देनजर सरकार ने होली तक फ्री राशन बटवाने की घोषणा की थी। योजना के तहत कार्ड धारकों को प्रत्येक महीने में नियमित रूप से मिलने वाले राशन के अतिरिक्त गेहूं नमक तेल चना आदि के साथ दूसरी मर्तबा भी गेहूं चावल का वितरण कराया जाना था। सरकार ने चुनावी बयार में यह घोषणा तो कर दी, लेकिन भंडार तक खाद्यान्न पहुंचने में शासन शुरू में ही हांफ गया।
गोदामों पर अभी तक खाद्यान्न की व्यवस्था पटरी पर नहीं आ रही है। नतीजतन गोदामों पर खाद्यान्न के अभाव के कारण दुकानों तक खाद्यान्न नहींं पहुंच पा रहा है। दुकानों पर किस्तों में खाद्यान्न पहुंच रहा है। वहीं दिसंबर माह में मिलने वाला दूसरा कोटा अधर में लटक गया। व्यवस्था न होने के चलते दिसंबर में खाद्यान्न हासिल करने से महरूम गरीब अभी तक बाट जोह रहे है।
दिसंबर में दुकानों तक राशन पहुंचाए बिना शासन ने निर्धारित तिथि पर ई पॉश मशीनें बंद कर दी। विभाग पहले तो वंचित दुकानदारों को बाद में खाद्यान्न दिलाने का राग अलाप रहा था, लेकिन जनवरी का वितरण पूरा होने के साथ फरवरी के वितरण की तिथि घोषित होते ही आपूर्ति विभाग मुकर गया।
बताया गया है कि मवाना तहसील के परीक्षितगढ़ व मवाना ब्लाक के करीब 60 अधिक दुकानों के लाखों गरीब खाद्यान्न से वंचित रह गए। कार्ड धारकों ने बताया कि उन्हें अभी तक दिसंबर का राशन नहींं दिया गया, सरकार जुमलेबाजी से काम ले रही है। बताते है कि फरवरी के कोटे के वितरण की डेट घोषित कर दी गई लेकिन गोदाम पर खाद्यान्न उपलब्ध ही नहीं है। अभी अगले दस दिनों तक दुकानों पर खाद्यान्न पहुंचने के आसार नहींं हैं। लोगों का कहना है की सरकार उन्हें घोषणाओं से छलने का प्रयास कर रही है।
वहीं, डीएसओ राघवेंद्र सिंह का कहना है कि गेहूं और चावल के साथ सरकार ने तेल नमक चना नियमित रूप से वितरित कराया है।अतिरिक्त गेंहू चावल का वितरण शासन स्तर से हुई कोताही के कारण दिसंबर माह में नहींं हो सका। अब दिसंबर के खाद्यान्न वितरण की कोई संभावना नहींं है।

