- तहसील को कुछ जमीन एनसीआरटीसी को देनी थी जो अभी तक नहीं मिली
- प्रमुख सचिव राजस्व को प्रशासन ने जमीन देने के लिए प्रस्ताव बनाकर भेजा
- रोडवेज की वर्कशॉप में रैपिड रेल का प्रस्तावित है अंडरग्राउंड स्टेशन
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: रैपिड रेल का प्रोजेक्ट जमीन नहीं मिलने पर लंबा खींच सकता है। जमीन के मामले प्रोजेक्ट को लटका रहे हैं। तहसील को कुछ जमीन एनसीआरटीसी को देनी थी, जो अभी तक नहीं मिली। ये मामला प्रमुख सचिव राजस्व को प्रशासन ने जमीन देने के लिए प्रस्ताव बनाकर भेज रखा है, जिसको लेकर अभी हरी झंडी नहीं मिली है।
ये मामला भी लंबा खींच रहा है। ये हालत तो सरकारी विभागों की है, जहां पर जमीन के मामलों को महत्व नहीं दिया जा रहा है, जिसके चलते मामले लटकते जा रहे हैं। रोडवेज की वर्कशॉप में रैपिड रेल का अंडरग्राउंड स्टेशन प्रस्तावित है। इसके लिए भी छह माह से पत्र व्यवहार चल रहा है। क्योंकि जमीन मिलने के बाद ही काम चलेगा।
बताया गया कि भूमिगत रेलवे स्टेशन होगा तथा उसके ऊपर रोडवेज बस स्टैंड चलेगा। इस तरह का प्रस्ताव तैयार किया गया है। यह पूरी तरह से राजीव चौक स्टेशन व बस स्टैंड की तरह का होगा। ये तो सरकारी जमीन के मामले फाइलों में चल रहे हैं, जबकि प्राइवेट जमीन खरीदने के मामले तो दर्जन भर से ज्यादा है।

प्राइवेट लोगों से भी अभी जमीन की खरीद-फरोख्त नहीं हो पाई है। इसमें भी कुछ अवरोध बने हुए हैं। इन अवरोध को दूर करने के लिए प्रशासन कतई रूचि नहीं ले रहा है, जिसके चलते यह प्रोजेक्ट जिस स्पीड़ से चल रहा था, उसकी गति धीमी हो सकती है। इस बात को एनसीआरटीसी के अधिकारी भी स्वीकारते हैं।
दिल्ली मेरठ हाईस्पीड रैपिड रेल प्रोजेक्ट की राह में लोन की अड़चन भी अब खत्म हो गई है। अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थान एशियन डिवेलपमेंट बैंक (एडीबी) ने इस प्रोजेक्ट के लिए फिलहाल 1.049 बिलियन डॉलर के लोन को मंजूरी दे दी है। इस धनराशि मिलने के बाद अब इस प्रोजेक्ट को और रफ्तार मिलेगी, लेकिन जो सरकारी जमीन का आदान-प्रदान होना बाकी है उस पर अफसरों को फोकस करना होगा।
इस कॉरिडोर का निर्माण कर रही सरकारी कंपनी एनसीआर ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन के सूत्रों का कहना है कि एडीबी के साथ ही दो और इंटरनेशनल वित्तीय संस्थाओं से भी एक हजार मिलियन डॉलर का लोन मिलने की उम्मीद है। उनके साथ अभी औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। हालांकि यह राशि टुकड़ों में जरूरत के मुताबिक ही ली जाएगी, लेकिन एडीबी बोर्ड की मंजूरी के बाद अब इस प्रोजेक्ट के लिए धनराशि अड़चन नहीं बनेगी।
2 प्रतिशत सालाना ब्याज पर मिल रहा है पैसा
सूत्रों का कहना है कि अभी इस प्रोजेक्ट के लिए जो काम चल रहा है, उसके लिए पहले ही यूपी, दिल्ली और केंद्र सरकार की ओर से कुछ राशि मिल चुकी है। एडीबी की ओर से यह लोन दो फीसदी सालाना ब्याज दर पर मिल रहा है। इस लोन की खासियत यह है कि यह टाइड लोन नहीं है यानी यह लोन लेने के लिए एडीबी की ऐसी कोई शर्त नहीं है कि इस प्रोजेक्ट के लिए कुछ सामान किसी खास कंपनी या किसी खास देश से खरीदना होगा। यह अपनी तरह का पहला ऐसा प्रोजेक्ट है, जिस पर हाईस्पीड रैपिड रेल के साथ ही मेरठ के कुछ हिस्से में मेट्रो ट्रेनें भी चलेंगी। इस तरह से ये टू इन वन प्रोजेक्ट है, जिसके तहत एक ही ट्रैक पर दो तरह की ट्रेनें चलाई जाएंगी।
छह-आठ माह में दिल्ली में शुरू हो सकता है काम
इस प्रोजेक्ट के लिए मेरठ की ओर से निर्माण कार्य शुरू किया जा चुका है और अब 10 पिलर बनाये जा रहे हैं, जिस पर तेजी से काम चल रहा है। जल्द ही इस प्रोजेक्ट का आगे के हिस्से का निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा, ताकि उसे तय वक्त पर पूरा किया जा सके। अधिकारियों के मुताबिक दिल्ली मेरठ कॉरिडोर में लगभग 50 किमी के हिस्से में निर्माण कार्य चल रहा है। इसके अलावा दिल्ली में भी कंस्ट्रक्शन से पहले की गतिविधियां चल रही हैं, जिनमें जमीन के नीचे पाइप लाइनें और अन्य वायरिंग वगैरह शिफ्ट करने का काम शामिल है। मेरठ में भी भूमिगत बिजली की लाइन दबाई जा रही है। उम्मीद की जा रही है कि अगले छह से आठ महीने में इस प्रोजेक्ट से जुड़ा निर्माण कार्य दिल्ली में भी शुरू हो जाएगा। इस प्रोजेक्ट का कुछ हिस्सा 2023 तक पूरा किया जाना है, जबकि दिल्ली और मेरठ के बीच कॉरिडोर 2025 तक चालू करने का टारगेट रखा गया है।

