Friday, March 13, 2026
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पश्चिमी यूपी से चली उलटी सियासी हवा

  • कैराना पलायन हो या फिर मुजफ्फरनगर के दंगे भाजपा ने पूरा किया फोकस

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: पश्चिमी की सियासी हवा उलटवासी हो चली हैं। पूर्वाचल की सियासी जमीन पर क्या होगा? इस पर भी निगाहें लगी हुई हैं। पश्चिमी यूपी ने उन मुद्दों को खारिज कर दिया, जिसको लेकर भाजपा ने पूरा फोकस किया। यहां सौहार्द की बयार बही। कैराना पलायन हो या फिर मुजफ्फरनगर के दंगे, इस पर भाजपा ने पूरा फोकस किया, मगर मतदान का रुझान जिस तरह का रहा, उसको देखकर लगता है कि उन मुद्दों को पश्चिम के लोगों ने खारिज कर दिया।

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पश्चिम में तो भाजपा के मुद्दे दंगा, पलायन जैसे थे, लेकिन पूर्वांचल के मुद्दे कौन से होंगे? यह भी बड़ा सवाल है। 2017 में भाजपा के चमत्कारिक प्रदर्शन के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का जादू चला था, लेकिन पूर्वांचल में क्या पीएम नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का जादू फिर से चलेगा या फिर नहीं? सबसे बड़ी मुश्किल ये है कि दिल्ली से चले मुद्दे बनारस होते हुए लखनऊ पहुंच रहे हैं। प्रवासी मजदूरों का भी मुद्दा विपक्ष बना सकता हैं। बेराजगारी को भी मुद्दा बना सकता है।

किसानों पर चढ़ाई गाड़ी को लेकर भी विपक्ष ने अपना हथियार बना लिया है। महंगाई भी एक मुद्दा है। देश में जो निजीकरण भी मुद्दा बना हुआ है। पश्चिम की तरह से पलायन व दंगा पूरब में कोई मुद्दा नहीं हैं। मथुरा में श्रीकृष्ण मंदिर की सुगबुगाहट पश्मिच में थी, लेकिन पूरब में शायद ये मुद्दे नहीं होंगे। भाजपा को यहां अपने विकास की रेखा खींचनी होगी। अब देखना यह है कि भाजपा के परिस्थिति अनुकूल होगी या फिर विपरीत। यह देखना होगा। पश्चिमी यूपी में पिछली बार 58 में से 54 सीटें जीतने वाली भाजपा के लिए चौंकाने वाले परिणाम हो सकते हैं।

वोटों का बिखराव और पार्टियों के गठबंधान ने चुनाव को मुश्किल भरा बना दिया। जिन्हें सुरक्षित सीटें माना जा रहा था, वहीं भी चुनाव काफी कड़े मुकाबले में देखा गया। कोई कुछ भी कहे, लेकिन भाजपा से लेकर रालोद गठबंधन तक के लिए चुनाव काफी फंसा हुआ है। मतदान के बाद सियासी गलियारों में इस बात का नफा-नुकसान लगाया जाता रहा कि कौन कहां चला।

सबसे बड़ा सवाल जाट मतदाताओं को लेकर था। रालोद के साथ आने के बाद गठबंधन यह दावा कर रहा था कि इस समाज का वोट उसको ही मिलेगा। मतदान के बाद भाजपा ने दावा किया कि इस समाज ने सुरक्षा के नाम पर उसको भी बहुतायत के नाम पर वोट किया है। वोटों का बिखराव सभी जगह हुआ है।

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