Friday, March 27, 2026
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एमडीए की विकसित कॉलोनी को कायाकल्प का इंतजार

  • पार्कों का भी है बुरा हाल, लोगों ने डाली झोपड़ी, किये अवैध कब्जे
  • सड़क हुई बदहाल, डिवाइडर भी हुए क्षतिग्रस्त

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: मेरठ विकास प्राधिकरण (एमडीए) की शताब्दीनगर योजना को विकास की दरकार हैं। सड़क टूटी पड़ी हैं। जिन पार्कों में फूलों के पेड़ होने चाहिए थे, वहां अवैध कब्जे हैं। पार्क की दीवारों को भी तोड़ दिया गया हैं। अवैध कब्जेदार झोपड़ी डालकर रह रहे हैं, जिसकी शिकायत भी हुई, मगर एमडीए अधिकारियों को यहां के विकास की चिंता नहीं हैं। डिवाइडर रोड भी क्षतिग्रस्त हैं, जिसको ठीक एमडीए नहीं करा पा रहा हैं।

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प्राधिकरण की तरफ से शताब्दीनगर योजना उपेक्षा का शिकार हैं। यही वजह है कि एमडीए के जो पार्क का सौंदर्यीकरण होना चाहिए था, उसमें अवैध कब्जे करके लोग रह रहे हैं। इसको लेकर प्राधिकरण में शताब्दीनगर के लोग प्रदर्शन भी कर चुके हैं, लेकिन इसको आला अफसर अनदेखा कर रहे हैं। दो दशक पहले शताब्दीनगर योजना लॉच की गई थी। प्लाट भी आवंटन कर दिये गए थे, लेकिन वर्तमान में हालात ऐसे है कि आवंटियों को प्लाट पर भी कब्जे नहीं मिले हैं।

इस वजह से भी शताब्दीनगर विकास की दृष्टि से पिछड़ा हुआ हैं। शताब्दीनगर की मुख्य डिवाइडर रोड पर रैपिड रेल का यार्ड हैं, जिसके चलते यहां से ओवर लोडिड ट्रकों का आवागमन होता हैं, जिसके चलते तमाम सड़कें क्षतिग्रस्त हो गई हैं। सड़कों की मरम्मत नहीं तो एमडीए कर रहा है और नहीं रैपिड रेल। पिछले दिनों दिल्ली रोड पर एक महिला की स्कूटी गड्ढे में गिरने से मौत हो चुकी हैं, जिसके बाद लोगों में आक्रोश बढ़ गया था।

इसके बावजूद शताब्दीनगर की क्षतिग्रस्त डिवाइडर रोड का भी निर्माण नहीं कराया जा रहा हैं। आखिर इस रोड पर कोई दुर्घटना हो गई तो किसकी जवाबदेही होगी? भाजपा सांसद राजेन्द्र अग्रवाल भी पत्र लिख चुके है कि क्षतिग्रस्त सड़कों को ठीक कराया जाए। फिर भी शताब्दीनगर की सड़कों को ठीक नहीं कराया जा रहा हैं।

दो दशक से नहीं सुलझा जमीन का विवाद

शताब्दीनगर, प्राधिकरण की ऐसी योजना है, जिसकी करीब 200 एकड़ जमीन पर अभी किसानों से कब्जा नहीं मिला हैं। अर्जित की गई जमीन पर किसान खेती कर रहे हैं। किसानों की मांग है कि शताब्दीनगर की अर्जित की गई जमीन का नये जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया के तहत मुआवजा दिया जाए।

मुआवजा नहीं मिलने पर किसान इस जमीन को छोड़ नहीं रहे हैं तथा पूरी जमीन किसानों के कब्जे में हैं। यही वजह है कि किसान इस जमीन पर खेती कर रहे हैं। कई बार एमडीए ने प्रशासन के साथ मिलकर जमीन पर कब्जा लेने की कोशिश की, मगर कब्जा नहीं मिला। क्योंकि किसानों ने जमीन को लेकर बवाल कर दिया था। इसके बाद किसानों के कड़े रुख को देखकर ही एमडीए के अधिकारी बैकफुट पर आ जाते हैं।

करीब दो सौ एकड़ जमीन का मामला विवादित हैं, जिस पर एमडीए को कब्जा नहीं मिल रहा हैं। यही नहीं, किसानों का जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया के खिलाफ धरना भी शताब्दीनगर में चल रहा हैं। इसी वजह से एमडीए के अधिकारी यहां पर विकास कराने से पीछे हट रहे हैं। यदि पार्क की भूमि पर कोई अवैध कब्जा कर रहा है तो उसको भी अनदेखा किया जा रहा है।

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