- 22 जनवरी को आयोजित की जायेगी लोक अदालत, वादों का होगा निस्तारण
जनवाणी संवाददाता |
मुजफ्फरनगर: उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण तथा जिला जज व अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण मुजफफरनगर चवन प्रकाश, के दिशा निर्देशन, व परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश पंकज कुमार अग्रवाल की अध्यक्षता में वैवाहिक वादों के निस्तारण के लिए 22 जनवरी को आयोजित होने वाली विशेष लोक अदालत के पूर्व प्री-सिटिंग बैठक का आयोजन किया गया। प्री- सिटिंग बैठक में काफी संख्या में पक्षकार उपस्थित रहे।
वैवाहिक विवादों के पक्षकारों के मध्य सुलह समझौते के लिए प्रयास को प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय पंकज कुमार अग्रवाल, अपर प्रधान न्यायाधीशगण रामनेत, दीप कान्त मणि की अध्यक्षता में कुल तीन पीठों का गठन किया गया था। इन पीठों के द्वारा पक्षकारों के मध्य वैवाहिक विवादों को सुलझाने के लिए सुलह समझौते के प्रयास किये गये।
सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण मुजफफरनगर सलोनी रस्तोगी, द्वारा अवगत कराया गया कि माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद एवं उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, के विशेष निर्देश पर इस प्री- लिटिंगेशन लोक अदालत का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें बिना मुकदमा दर्ज किये वैवाहिक वादों का निस्तारण कराया जा रहा है तथा इसके लिए न तो अधिवक्ता की आवश्यकता है और न ही कोई शुल्क देय है।
निरूशुल्क कानूनी सहायता के लिए किया जागरूक
राजकीय इण्टर कालेज के मैदान में आयोजित स्वास्थय मेले में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की और से पीएलवी शिवम एवं पीएलवी रजनी पवार द्वारा स्टाल लगा कर आम जनमानस को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की और से निरू शुल्क कानूनी सहायता प्रदान करने अधिकारों व कत्र्तव्यों के प्रति जागरूकता फैलाने,, लोक अदालतो का आयोजन कराने विवादों के निपटारे के लिए मध्यस्थता कराने, अपराध पीडित व्यक्तियों को मुआवजा दिलाने आदि कार्य करता है।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण मुजफफरनगर मे अधिवक्ताओ का पैनल है, जिसमें से पात्र व्यक्तियों द्वारा आवेदन करने पर निरू शुल्क अधिवक्ता मुकदमें की पैरवी करने के लिए दिलाया जाता है। उनके द्वारा यह भी बताया गया कि दो पक्षों के मध्य विवाद होने पर यदि वे मुकदमें की औपचारिकताओं से बचना चाहते है तथा समय व धन की बचत करना चाहते है तो मध्यस्थता केन्द्र में प्री लिटिगेशन का प्रार्थना पत्र दे सकते है।
प्रार्थना पत्र प्राप्त होने पर कार्यालय द्वारा विपक्षी को नोटिस जारी किया जाता है दोनो पक्षों की उपस्थिति होने पर उन्हे समझाते हुए सुलह कराने का प्रयास किया जाता है। यह प्रणाली वर्तमान में काफी कारगर सिद्ध हो रही है। पक्षकार अधिक धन समय व्यय किये बिना विवादित बिन्दुओं पर अपनी सहमति प्रकट करते है।

