Sunday, January 23, 2022
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Homeसंवादगांधी से डरने वाले कौन हैं?

गांधी से डरने वाले कौन हैं?

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रायपुर में आयोजित धर्म संसद में कालीचरण ने जिस तरह से गांधी के खिलाफ अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल कर गोडसे की सराहना की, वह दुर्भाग्यपूर्ण तो है ही, शर्मनाक भी है। हालांकि कालीचरण गिरफ्तार हो चुका है लेकिन यहां सवाल कालीचरण की गिरफ्तारी का नहीं है। सवाल यह है कि क्या हम कालीचरणों की भीड़ में गांधी से जुड़े सही तथ्य युवाओं तक पहुंचा पा रहे हैं? यह दुर्भाग्यपूर्ण ही है कि इस दौर में गांधी के विचारों का मजाक बनाने वाले नए-नए देशभक्त पैदा हो रहे हंै। सवाल यह है कि जिस विचारधारा से कालीचरण जैसे लोग ताल्लुक रखते हैं, उस विचारधारा द्वारा बार-बार गोडसे को देशभक्त साबित करने की कोशिश क्यों की जाती है? इस विचारधारा को गांधी से डर क्यों लगता है? दुखद है कि कालीचरण के बयान का समर्थन करने के लिए सोशल मीडिया पर तथाकथित बुद्धिजीवी भी पैदा हो जाते हंै और गाली गलौच पर उतर आते हैं। यह विचारधारा अपने निहित स्वार्थों के लिए गोडसे का महिमामंडन कर गांधी के बारे में गलत तथ्य पेश करती है। इसका प्रभाव युवा वर्ग पर पड़ता है और वह गांधी को खलनायक मानने लगता है।
अब हमें ठहरकर यह सोचना होगा कि हम युवाओं के सामने क्या परोस रहे हैं? किसी भी देश के विकास में युवाओं की अहम भूमिका होती है। इस समय हमारे देश के युवाओं में एक तरफ युद्धोन्माद पैदा किया जा रहा है तो दूसरी तरफ उग्र वक्तव्यों के माध्यम से युवाओं की मानसिकता को प्रभावित किए जाने की कोशिश भी जा रही है। जाहिर है, ऐसे माहौल में युवाओं के उग्र और हिंसक होने की आशंका बढ़ जाती है। इस प्रक्रिया से हमारे ज्यादातर राजनेताओं का काम आसान हो जाता है। महात्मा गांधी ने हिंसा और अहिंसा पर व्यापक चिन्तन किया था। यह विडम्बना ही है कि हमारे देश में युवाओं को गांधी के आदर्शों से जोड़ने की कोई पहल नहीं हुई। इस दौर में अगर हम युवाओं को गांधी से जोड़ने की पहल कर सकें तो यह एक बड़ी उपलब्धि होगी। यह दुर्भाग्यपूर्ण ही है कि हमारे देश के युवाओं में लगातार हिंसा की भावना बढ़ती जा रही है। ऐसी परिस्थितियों में आज के युवाओं को गांधी के विचारों की सबसे ज्यादा जरूरत है। युवा वर्ग हमेशा ही गांधी के चिंतन का केंद्र बिंदु रहा। गांधी ताउम्र युवाओं को सकारात्मक और उचित दिशा देने के लिए प्रयासरत रहे। आजादी से पहले उन्होंने उस दौर की युवा पीढ़ी को अंग्रजों के विरुद्ध सत्याग्रह करने का अद्भुत साहस प्रदान किया। सविनय अवज्ञा आंदोलन के समय भी उनकी सबसे बड़ी चिन्ता यही थी कि यह आन्दोलन हिंसा की चपेट में न आ जाए। उस समय उन्होंने कहा था कि इस आंदोलन को हिंसा से बचाने के लिए मैं हर दंड सहने को तैयार हूं , यहां तक कि मैं मृत्यु का वरण करने से भी पीछे नहीं हटूंगा। यह दुर्भाग्यपूर्ण ही है कि आज युवा वर्ग गांधी के नाम का इस्तेमाल मजाक के तौर पर कर रहा है। कुछ लोगों और संगठनों द्वारा ऐसी साजिश रची जा रही है, जिससे कि युवा वर्ग गांधी के सम्बन्ध में सही तथ्यों को न जान सके।

हालांकि जिन युवाओं ने गांधी को पढ़ा है, वे न केवल गांधी का सम्मान करते हैं बल्कि उनके विरुद्ध हो रहे षडयंत्र को भी समझते हैं। हमें यह समझना होगा कि आजादी के पहले गांधी का संपूर्ण व्यक्तित्व युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत रहा। गांधी ने आजादी की लड़ाई भी युवाओं के भरोसे ही लड़ी थी। यह दुर्भाग्यपूर्ण ही है कि आजादी के इतने वर्षों बाद आज युवा पीढ़ी गांधी के रास्ते पर चलने के लिए तैयार नहीं है। आज हमारे देश में हिंसा और प्रतिहिंसा की भावना बढ़ती जा रही है। समाज पर साम्प्रदायिक सोच हावी हो रही है। युवा वर्ग आतंकवादी गतिविधियों की तरफ बढ़ रहा है। विकास की प्रक्रिया में गांवों की आत्मा नष्ट हो रही है। छोटी-छोटी बच्चियों से बलात्कार की घटनाओं में निरन्तर वृद्धि हो रही है। एक तरफ युवा वर्ग में अवसाद और आत्महत्या की प्रवृत्ति बढ़ रही है तो दूसरी तरफ किसानों की आत्महत्याएं भी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही हैं। बेरोजगारी की समस्या भी मुंह बाए खड़ी है। क्या ऐसी स्थिति में गांधी के अलावा कोई रास्ता नजर आता है ? निश्चित रूप से ऐसी स्थिति में गांधी हमें रास्ता दिखा सकते हैं। दुखद यह है कि इस दौर में ज्यादातर युवा स्वतंत्रता संग्राम वाले गांधी को नहीं जानते हैं बल्कि ‘मजबूरी का नाम महात्मा गांधी’ वाले गांधी को जानते हैं। समाज की अधकचरी चर्चाओं और सोशल मीडिया के माध्यम से हम गांधी को सिर्फ इतना ही जान सकते हैं। इस दौर में हम सबका यह कर्तव्य है कि हम ‘मजबूती का नाम महात्मा गांधी’ वाले गांधी से युवाओं का साक्षात्कार कराएं। उससे पहले घर-परिवार के बड़े लागों को स्वयं भी गांधी के प्रति अपने पूर्वाग्रहों को त्यागना होगा।

आज की युवा पीढ़ी को सत्य, प्रेम और अहिंसा जैसे मानवीय गुणों की सबसे ज्यादा जरूरत है। गांधी ने जिस तरह इन मानवीय गुणों को अपनाकर दुनिया को एक नए परिवर्तन का रास्ता दिखाया, उसी प्रकार युवा वर्ग भी इन्हीं मानवीय गुणों के आधार पर एक नए भारत का निर्माण कर सकता है। हर काल में युवा राजनीति से प्रभावित होता रहा है और एक नया युवा वर्ग राजनीति में पदार्पण भी करता रहा है। हमारे देश में पिछले कुछ समय से नफरत की जो नई राजनीति शुरू हुई है, उसे आज का युवा ही खत्म कर सकता है। अगर हम आज के युवा को गांधी के आदर्शों का सही पाठ पढ़ा पाए तो न केवल राजनीति के एक नए युग का सूत्रपात होगा बल्कि एक साफ-सुथरी राजनीति का माहौल भी तैयार होगा। गाली देने से गांधी की प्रासंगिकता कभी कम नहीं होगी। जरूरत इस बात की है कि कालीचरणों की भीड़ में गांधी से जुड़े सही तथ्य युवाओं तक पहुंचाए जाएं।


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