जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: दिल्ली के ओल्ड राजेंद्र नगर में बारिश का पानी भरने से तीन छात्रों की मौत ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। हादसे के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने साफ आदेश दिए थे कि अब किसी भी स्वीकृत बेसमेंट का इस्तेमाल स्टोर रूम या पार्किंग के अलावा दूसरे प्रयोजन के लिए नहीं होगा। अवैध खुदाई और व्यावसायिक इस्तेमाल पर भी सख्त रोक लगाने को कहा गया था।
अपर सचिव आवास ने ये निर्देश सभी विकास प्राधिकरणों को भेजे थे, लेकिन मेरठ में यह आदेश कागजों तक सीमित रह गए। बेगमपुल रोड स्थित कुमार प्लाजा इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। यहां बेसमेंट में ‘क्वींस-2 बार एंड रेस्टोरेंट’ बेरोकटोक के चल रहा है। मेडा के दस्तावेजों में यह जगह सिर्फ स्टोर रूम दर्ज है। सवाल ये कि जब मेडा को हर इंच निर्माण की जानकारी होती है, तब इस बार और रेस्टोरेंट पर चुप्पी क्यों? यही नहीं, शहर में और भी कई रेस्टोरेंट और जिम बेसमेंट में चल रहे हैं। आदेशों की धज्जियां उड़ रही हैं, लेकिन मेडा प्रशासन सब नजरअंदाज किए है। आखिरकार जिम्मेदार अधिकारी किसके दबाव में हैं? और क्या अपर सचिव आवास के आदेश सिर्फ फाइलों में रखने के लिए ही जारी किए जाते हैं? बड़ा सवाल यही है कि जब अपने प्रधान सचिव के आदेशों को ही मेडा गंभीरता से नहीं लेता, तो शहर में निर्माण नियमों और सुरक्षा का भरोसा कैसे रहेगा? दिल्ली जैसे हादसे से सबक लेने के बजाय मेरठ में मेडा ने सिस्टम को खुला खेल बना दिया है। नतीजा-आम जनता फिर से खतरे के मुंह में धकेली जा रही है। इधर, मेडा के उपाध्यक्ष संजय मीणा ने बताया कि यह मामला मेरे कार्यकाल से पहले का हो सकता है। जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

