- नया साल मनाने पहुंचने लगे पर्यटक
- नाचते मोर और हिरणों का झुंड बन रहा पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र
- इस वर्ष अधिक संख्या में पहुंचा विदेशी पक्षियों का झुंड
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: मुल्कों के बीच इंसानों की खींची सरहद की परवाह पंछी, नदिया और पवन के झोके नहीं करते। यह पक्तियां हस्तिनापुर अभ्यारण्य में आने वाले प्रवासी पक्षियों पर सटीक बैठती है। सरहद और सियासी बंदिशों को लांघकर प्रवासी पक्षी इस वर्ष अधिक संख्या में अभ्यारण्य में पहुंचे है। जिसकी वजह से इन दिनों हस्तिनापुर का नजारा अद्भुत हो चला है।
बता दें कि सर्दी के पांच महा बिताने के बाद मार्च में यह पक्षी अपने वतन लौटने लगते हैं। इन प्रवासी पक्षियों को देखने के लिए विभिन्न राज्यों से पर्यटक एवं पक्षी प्रेमी हस्तिनापुर पहुंचते हैं। यूरोपिय देशों से कई प्रजातियों के प्रवासी पक्षियों में से कुछ पक्षी प्रतिवर्ष हस्तिनापुर आने के लिए प्रति दिन दस हजार किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करते है।
भीकुंड की झीलों में 100 से अधिक साइबेरियाई हंसों ने अपना डेरा जमा लिया है। इनकी अठखेलिया पक्षी प्रेमियों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है। साइबेरिया, मध्य एशिया, चीन, पूर्वी यूरोप के पक्षियों के लिए अभ्यारण्य में मौजूद वेटलैंड निवास स्थान बन जाती है।

प्रवासी पक्षी अभ्यारण्य के गर्म मौसम में प्रजनन के लिए आते हैं। शहर की भीड़ भाड़ और शोर से दूर परिवार के साथ घूमने के लिए हस्तिनापुर अभ्यारण्य बेहतर विकल्प है। इन दिनों हस्तिनापुर में प्रकृति के अद्भुत नजारे देखने को मिल रहे हैं, क्योंकि हरियाली के बीच वन्यजीवों की यहां भरमार है। अभ्यारण्य में प्रवासी पक्षियों की चहचहाहट, नाचते मोर एवं हिरणों का झुंड पर्यटकों के लिए कौतुहल से कम नहीं है।
मेरठ से हस्तिनापुर की दूरी करीब 40 किलोमीटर है और गंगा के खादर क्षेत्र भीमकुंड जहां पर अधिकांश प्रवासियों को देखा जा सकता है। डीएफओ राजेश कुमार का कहना है कि इस समय हस्तिनापुर का नजारा बेहद सुदंर हो गया है। गत वर्षों की भांति इस वर्ष अधिक संख्या में वहां विदेशी पक्षी पहुंचे हैं।
ये पक्षी बढ़ा रहे हस्तिनापुर की शोभा
स्पून, बिल, सारस, क्रेन, इंडियन स्कीमर, ब्लेक नेक्ड स्टार्क, यूरेशियन कर्लीव समेत अन्य लगभग दो दर्जन प्रजातियों के पक्षी इस समय हस्तिनापुर की शोभा बढ़ा रहे हैं।

