Tuesday, March 24, 2026
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शोपीस बना एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर

  • आवारा कुत्तों को पकड़कर नसबंदी के लिए की गई थी व्यवस्था
  • सिर्फ आवारा कुत्तों को पकड़ने को चलाया जा रहा है अभियान

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: आवारा कुत्तों को पकड़ने के लिए बनाया गया एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर दिखावा बना हुआ है। आवारा कुत्तों को पकड़कर उनकी नसबंदी किये जाने की व्यवस्था के लिए इस सेंटर का निर्माण कराया गया था। लेकिन यह सिर्फ आवारा कुत्तों को पकड़ने तक ही सीमित रह गया है। शहर मेें आवारा कुत्ते बेखौफ होकर न सिर्फ घूम रहे हैं, बल्कि महिला, बच्चों व पुरूषों को काट भी रहे हैं। हर महीने लाखों रुपये खर्च करना भी फिजूल साबित हो रहा है।

महानगर में आवारा कुत्तों का खौफ बहुत ही बढ़ता जा रहा है। कई इलाकों में स्ट्रीट डॉग और पिटबुल जैसे खतरनाक प्रजाति के कुत्तों का आतंक बहुत बढ़ गया है। वैसे तो एनिमल बर्थ कंट्रोल प्रोग्राम के तहत नगर निगम ने परतापुर के बराल के शंकर नगर फेज-दो में एक नसबंदी सेंटर खोला था, लेकिन वह भी शोपीस के अलावा कुछ भी नहीं है।
हालत यह है कि औसतन प्रतिदिन करीब दो सौ से ज्यादा लोग खूंखार कुत्तों के काटने का का शिकार हो रहे हैैं।

बावजूद इसके, निगम की ओर से कोई सार्थक कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। हालांकि सेंटर संचालकों का दावा है कि उनके सेंटर पर 12 हजार छह सौ कुत्तों की नसबंदी की जा चुकी है। एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर के डॉ. जायसवाल ने बताया कि सेंटर पर 70 नर व मादा कुत्ते हैं, जिन्हें नसबंदी करने के बाद चिकित्सा उपचार में रखा गया है। प्रतिदिन निगम कर्मचारी शहर से कुत्तों को पकड़कर सेंटर पहुंचाते हैं।

एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर से कुत्तों की नसबंदी और उपचार के दौरान निकलने वाले मेडिकल कचरे को एक मेडिकल कालेज की गाड़ी इकट्ठा करती है। कुत्तों को पकड़ने, वैक्सीनेशन और नसबंदी करने का ठेका ओरैया की श्याम हेल्पपिंग इनसाइट कंपनी के पास है। प्रत्येक कुत्ते के पकड़ने, वैक्सीन लगाने और नसबंदी करने की एवज में 998 रुपये दिए जाते हैं, लेकिन इसके बाद भी शहर में कुत्ते खूंखार हो रहे हैं। पिछले साल 42563 लोगों को कुत्तों ने निशाना बनाया। ये तो वे लोग हैं जो जिला अस्पताल में एंटी रेबीज वैक्सीन लगवाने के लिए आए,

इनके अलावा ऐसे भी लोग हैं जिन्हें कुत्तों ने काटा और उनका रिकॉर्ड नहीं है। जिला अस्पताल में एंटी रेबीज वैक्सीन (वैक्सीन) लगवाने वालों की लंबी लंबी कतारें लग रही हैं। हालांकि नगर निगम का दावा है कि सेंटर अपना संचालन बखूबी कर रहा है। पशु चिकित्सा एवं कल्याण अधिकारी डॉ। हरपाल सिंह के अनुसार प्रतिमाह 1000 कुत्तों की नसबंदी व एंटी रेबीज वैक्सिनेशन का लक्ष्य रखा गया है। साल में 12000 कुत्तों की नसबंदी की जानी थी लेकिन ड़ेढ साल में यह संख्या 15000 तक पहुंच सकी है। जबकि एक अनुमान के मुताबिक नगर निगम क्षेत्र में आवारा कुत्तों की संख्या करीब 50,000 होगी।

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