Sunday, June 14, 2026
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23 कर्मचारियों की फर्जी नियुक्ति के मामले में एक और खेल उजागर

  • फर्जी नियुक्ति के मामले में सीबीसीआईडी में चल रही जांच में एक अन्य नियुक्ति में भी हुआ महाखेल
  • दो वर्ष पूर्व मृत आश्रित कोटे में महिला को मिली थी निगम में नौकरी
  • उसकी भी होगी 23 कर्मचारियों के साथ बर्खास्तगी या वह ड्यूटी पर रहेगी तैनात, निगम में मामला चर्चा का विषय बना

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: नगर निगम में कार्यरत 23 कर्मचारियों की फर्जी नियुक्ति का मामला शासन के द्वारा सीबीसीआईडी को भेजा गया है। जिसकी जांच अंतिम दौर में चल रही है। जिसमें सूत्रों की माने तो जल्द ही 23 कर्मचारियों की बर्खास्तगी तय मानी जा रही है। इन 23 कर्मचारियों में एक महिला कर्मचारी ऐसी भी है। जिसके पति की मृत्यु के बाद मृताश्रित कोटे में उसे दो वर्ष पूर्व ही निगम में नौकरी मिली है। सवाल उठाता है कि क्या उन 23 कर्मचारियों के साथ उनकी नियुक्ति रद होगी

और उसकी भी दो वर्ष के भीतर ही बर्खास्तगी हो जायेगी या फिर वह यथावत निगम में कर्मचारी के रूप में कार्य करती रहेगी। एक बड़ा सवाल उठता है कि जब महिला के पति की नियुक्ति फर्जी बताई जा रही है और अभी मामला जांच में लंबित है और उनकी पत्नी को मृत आश्रित कोटे में नौकरी जो दी गई है। उसमें जल्दबाजी हुई या फिर नियमानुसार निगम द्वारा कार्रवाई की गई।

नगर निगम में 23 कर्मचारियों की फर्जी नियुक्ति का मामला काफी समय से चल रहा है, लेकिन उन 23 कर्मचारियों की नियुक्ति सही है तो निगम के द्वारा शासन को सही तत्यों से अवगत क्यों नहीं कराया गया। वहीं, यदि फर्जी नियुक्ति उनकी हुई तो अधिकारियों के तमाम आदेशों के बावजूद उनका निलंबन एवं वेतन क्यों नहीं रोका गया। तमाम आरोप प्रत्यारोप के बीच मामला शासन तक पहुंचा तो शासन ने मामले को गंभीरता से लिया और

मामले की जांच सीबीसीआईडी को सौंप दी। इन 23 कर्मचारियों की फर्जी नियुक्ति के आरोप प्रत्यारोप व तमाम जांचों के दौरान अधिकतर कर्मचारी निगम में ही कार्य कर रहे हैं। इसमें एक महिला की मृत आश्रित कोटे से लगी नौकरी का फिलहाल चर्चा का विषय बना हुआ है कि दो वर्ष पूर्व ही उसकी नियुक्ति अपने पति की मृत्यु के बाद मृत आश्रित कोटे में हुई है, जोकि 23 कर्मचारियों में शामिल था।

जिनकी जांच चल रही है। सूत्रों की माने तो सीबीसीआईडी की जांच पूरी होते ही सभी उन 23 कर्मचारियों की बर्खास्तगी तय मानी जा रही है, जो फर्जी नियुक्ति के मामले में सीबीसीआईडी की जांच में शामिल है। अब सवाल है कि जिस महिला को अपने पति की मृत्यु के बाद मृत आश्रित कोटे में नियुक्ति मिली है। वह भी दो वर्ष की नौकरी निगम में करने के बाद उसकी भी नियुक्ति अवैध मानी जायेगी या फिर वह महिला यथावत निगम में नौकरी करती रहेगी।

चर्चा है कि निगम में सही कार्य के लिये तो फरियादी अक्षर चक्कर काटते देखे जा सकते हैं, लेकिन जो मामले विवादों से जुड़े होते हैं। उन पर जल्द कार्रवाई अमल में लाई जाती दिखाई देती है। फिलहाल 23 कर्मचारियों की फर्जी नियुक्ति के मामले के साथ दो वर्ष पूर्व जिस महिला को मृत आश्रित कोटे में नियुक्ति मिली है। वह मामला चर्चा का विषय बना है कि क्या इन 23 कर्मचारियों की बर्खास्तगी के साथ उसकी नौकरी जायेगी या फिर बचेगी।

मामला मेरे संज्ञान में आया है। निगम में मेरी तैनाती से पूर्व का यह मामला है। मृत आश्रित कोटे में नियमानुसार महिला की नियुक्ति दी गई है। जब तक सीबीसीआईडी का निर्णय नहीं आ जाता तब तक किसी को भी आरोपी नहीं कहा जा सकता।

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सीबीसीआईडी की जांच में जो भी निर्णय निकलकर सामने आयेगा उसके आधार पर ही अग्रिम कार्रवाई नगर निगम की तरफ से की जायेगी। -ममता मालवीय, अपर नगरायुक्त नगर निगम, मेरठ

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