Wednesday, May 13, 2026
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उत्खनन में मिले पुरावशेष और प्रमाण बेहद रहस्यमय

  • अभी तक जो साक्ष्य खुदाई में मिले, चल रही गहनता से जांच
  • जांच के बाद फाइनल परिणाम में लग सकता वक्त

जनवाणी संवाददाता |

हस्तिनापुर: महाभारत कालीन तीर्थ नगरी स्थित उल्टा खेड़ा टीले पर भारतीय पुरातत्व विभाग द्वारा किये जा रहे उत्खनन कार्य में मिले पुरावशेष और प्रमाण बेहद रहस्य मय और चौंकाने वाले हैं। भारतीय पुरातत्व विभाग की टीम का अनुमान है कि साइट से प्राप्त दुर्लभतम पुरावशेषों में कुछ ऐसी कुछ चीजें सामने आई हैं, जो लगभग 2300 साल पुराने कुषाण और मौर्र्य काल के कई राज खोलेगी। स्थानीय लोगों के लिए यह कौतुहल का विषय है। अभी तक जो साक्ष्य यहां हुई खुदाई में मिले हैं। उनकी गहनता से जांच चल रही है। पुरातत्व विभाग के शोधार्थी यहां से प्राप्त पुरातात्विक अवशेषों को लेकर खासे उत्साहित हैं। उत्खनन में मिले पुरावशेषों को गहन जांच के लिए एकत्र किया जा रहा है। जांच के बाद भी फाइनल परिणाम आने में वक्त लग सकता है।

बता दे कि पुरातत्व विभाग द्वारा प्राचीन चीजों के लिए समय समय पर उत्खनन किया गया। वर्ष 2005 में सिनौली में वरिष्ठ पुरातत्वविद डा. डीवी शर्मा के निर्देशन में एएसआई द्वारा प्रथम चरण की खुदाई कराई। यहां पर 177 मानव कंकाल, सोने के कंगन, मनके, तलवार के साथ-साथ एक विशाल शवाधान केंद्र की पुष्टि हुई। इसके बाद 15 फरवरी 2018 को सिनौली साइट पर एएसआई लालकिला संस्थान के निदेशक डा. संजय मंजुल के निर्देशन में लगभग साढ़े तीन माह तक उत्खनन हुआ।

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आठ मानव कंकाल, तीन एंटीना सोर्ड यानी तलवारें, काफी संख्या में मृदभांड़, विभिन्न दुर्लभ पत्थरों के मनके, सर्वाधिक महत्वपूर्ण प्राप्ति के रूप में पांच हजार साल प्राचीन मानव योद्धाओं के तीन ताबूत तांबे से सुसज्जित, भारतीय योद्धाओं के तीन रथ प्राप्त हुए, जो इतिहास की दुर्लभ घटना साबित हुई। बुधवार को उत्खनन के दौरान टीम को एक बार फिर चौकाने वाला तथ्य मिला। उत्खनन के दौरान टीम को एक कंकाल मिला। पुरातत्वाादियों की माने तो उत्खनन के दौरान मिला कंकाल किस का है यह अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन उत्खनन के दौरान मिला कंकाल लगभग 2300 साल पुराना होने का अनुमान है।

हरिदास कुटी पर मिले प्राचीन सिक्के

बुधवार को कस्बे में प्राचीनता का एक और प्रमाण मिला। जम्बुद्वीप मालीपुर मार्ग पर स्थित हरिदास कुटी पर बुधवार को महंत रणधीर उपाध्याय को चूहों के बिल के समीप सात प्राचीन पीली धातु के सिक्के मिले।

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महंत रणधीर उपाध्याय ने बताया कि बुधवार सुबह जब वे कुटी की साफ-सफाई कर रहे थे तो कुटी में स्थित कूप पर चूहों के बिल के समीप सात पीली धातु के सिक्के मिले। जिन्हे वे आज पुरातत्व विभाग की टीम को सौंप देंगे।

तीन दिन पहले मिले थे बुनकर उद्योग के प्रमाण

उत्खनन के दौरान पुरातत्व विभाग की टीम को पूर्व सप्ताह में हस्तिनापुर में बडेÞ स्तर पर कपडेÞ के व्यापार होने के प्रमाण मिले थे। पुरातत्व विशेषज्ञों की माने तो हस्तिनापुर नगरी का गंगा किनारे बसी होने के चलते कई बार विनाश हुआ, लेकिन आज से लगभग 2300 साल पूर्व मौर्र्य काल के दौरान हस्तिनापुर में बड़े स्तर पर कपडेÞ के व्यापार होता था। ऐसे प्रमाण टीम को उत्खनन के दौरान मिले हैं। जिन्हे जांच के लिए सुरक्षित किया गया है।

छह मीटर गहराई में मिला कंकाल

पांडव टीले पर चल रही खुदाई के दौरान बुधवार को पुरातत्व विभाग की टीम को एक ट्रेंच में करीब छह मीटर की गहराई पर जाने पर प्राचीन दीवारें और कई प्राचीन अवशेष प्राप्त हुए जिन्हें करीब 2300 वर्ष पुराना माना जा रहा है। वहीं, एक सबसे बड़ा रोचक तथ्य टीम को यहां से प्राप्त हुआ। जिसमें एक बड़ी पैर की हड्डी का अवशेष पुरातत्व विभाग की टीम को प्राप्त हुआ है। यह अवशेष जानवर का है या मनुष्य का इस बात की स्पष्ट जानकारी तो पुरातत्व विभाग की लैब में इसकी जांच होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी, परंतु विभागीय अधिकारियों का मानना है कि यह करीब 2300 वर्ष पुराना है।

इसके साथ ही पुरातत्व विभाग की टीम ने ट्रेंच प्राप्त हो रही प्राचीन दीवारों को तराशा और गहनता से उनका अध्ययन किया। इस दौरान कई स्थानों से कार्बन डेटिंग के लिए मिट्टी के सैंपल लिए गए। टीम का मानना है कि अभी तक प्राप्त हुए तथ्य ऐतिहासिकता को दर्शाते हैं। वहीं, अभी तक प्राप्त हुए कई अवशेष ऐसे हैं, जो जांच के बाद प्राचीनता के रहस्य को खोलेंगे। हालांकि प्राप्त हो रहे इन अवशेषों से अंदाजा लगाया जा रहा है कि प्राचीन समय की संस्कृति में किस तरह का प्रचलन था।

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