Sunday, May 3, 2026
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अभी 13 तक बरसेंगे बदरा

  • मेरठ समेत आसपास के क्षेत्रों में होगी झमाझम बारिश

जनवाणी संवाददाता |

मोदीपुरम: तीन दिन तक रुक-रुक बारिश होने के अभी वैज्ञानिक संकेत दे रहे हैं। इस बारिश ने जहां लोगों का जनजीवन प्रभावित कर दिया है। वहीं, किसानों के लिए भी परेशानी खड़ी कर दी है। वैज्ञानिकों का कहना है कि 13 अक्टूबर तक बारिश का असर मेरठ और आसपास के क्षेत्रों में रहेगा।

यह बारिश देश भर में हो रही है। इस बारिश का अच्छा खासा असर वेस्ट यूपी में देखने को मिल रहा है। वेस्ट यूपी में बारिश अत्यधिक हो रही है। जिसके कारण किसानों को परेशानी होने लगी है। हालांकि इसबारिश को अभी 13 अक्टूबर तक होने की उम्मीद जाहिर की जा रही है। सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिक विवि के मौसम वैज्ञानिक डा. यूपी शाही का कहना है कि अभी मौसम में बदलाव नही होगा।

क्योकि बारिश का असर देखने को रहेगा। 13 अक्टूबर तक बारिश मेरठ समेत आसपास के क्षेत्रों में होगी। राजकीय मौसम वैधशाला पर सोमवार को दिन का अधिकतम तापमान 22.6 डिग्री एवं न्यूनतम तापमान 19.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। अधिकतम आर्द्रता 98 एवं न्यूनतम आर्द्रता 93 प्रतिशत दर्ज की गई। बारिश 01.1 मिमी दर्ज की गई।

बारिश से किसानों को भारी नुकसान

बारिश किसानों के लिए आफत बन गई है। फसलों में जलभराव की स्थिति हो गई है। जिससे किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। देश में हो रही बारिश के कारण आम लोगों के साथ-साथ किसानों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बीतों दिनों हुई बारिश के कारण खेतों में पानी भरने से किसानों को भारी नुकसान हुआ। खरीफ सीजन की फसलें पकने को तैयार थी।

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लेकिन बैमौसम बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। भारी बारिश उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए आफत बनकर आई है। राज्य के कई जिलों में आलू, धान, सोयाबीन आदि के खेतों में पानी भर गया। जिसके चलते किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। उत्तर प्रदेश में पहले समय से बारिश न होने की वजह से उत्पादन में कमी की आशंका जाहिर की गई थी। अब बेमौसम हुई बारिश ने पूरी कर दी है।

15 फीसदी धान की फसल को नुकसान

भारी बारिश के कारण लगभग 15 फीसदी तक धान की फसलें बर्बाद हो चुकी है। खेतों में फसलें जलमग्न हो चुकी है। इसके अलावा गन्ना, फूलगोभी, बैंगन, हरी मिर्च, पालक, मूली आदि की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है।

आलू की बुवाई में हो गई देरी

सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के प्रो. डॉ. आरएस सेंगर ने बताया चार-पांच दिन से लगातार हो रही बारिश के कारण धान की फसल के साथ-साथ कई अन्य फसलों को भी भारी नुकसान हुआ है। आगामी सीजन में वही जाने वाली सरसों एवं आलू की फसल भी प्रभावित हुई है।

क्योंकि इस बारिश के चलते खेतों में कम से कम 10 या 15 दिन तक दवाई नहीं हो सकती। जब खेत बुवाई के लिए तैयार होंगे तब तक समय से बोई जाने वाली फसलों में देरी हो जाएगी और उससे उत्पादकता पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा। किसानों को ऐसे बीजों का चुनाव करें जो की देरी से वही जाने के लिए वैज्ञानिकों द्वारा संतुष्ट की गई हो।

क्योंकि समय से बोए करने वाली प्रजातियों का समय तो इस समय निकल जाएगा। इसलिए उनको कोशिश करनी चाहिए कि वह ऐसी प्रजाति का चुनाव करें। जोकि 20 और 25 अक्टूबर के बाद वह जाने के लिए संस्तुति की गई हो।

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