जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: वर्ष 2013 के चर्चित यौन उत्पीड़न मामले में पूर्व तहलका संपादक तरुण तेजपाल को बॉम्बे हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने निचली अदालत के बरी करने के फैसले को रद्द करते हुए उन्हें दुष्कर्म और महिला की मर्यादा भंग करने का दोषी ठहराया है। यह मामला 2013 में एक महिला सहकर्मी के साथ कथित यौन उत्पीड़न से जुड़ा है, जिसने उस समय देशभर में व्यापक चर्चा बटोरी थी।
न्यायमूर्ति नीला गोखले और न्यायमूर्ति अमित जमसंडेकर की खंडपीठ ने तरुण तेजपाल को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 376(2)(एफ) (विश्वास या अधिकार की स्थिति का दुरुपयोग कर दुष्कर्म), धारा 354(ए) (यौन उत्पीड़न) और धारा 354(बी) (महिला के कपड़े उतारने की नीयत से हमला या बल प्रयोग) के तहत दोषी ठहराया है।
सजा में नरमी की मांग
दोषसिद्धि के बाद सजा पर सुनवाई के दौरान तेजपाल के वकील ने अदालत से नरमी बरतने की अपील की। उन्होंने दलील दी कि तेजपाल राजनीतिक कारणों से निशाना बनाए गए हैं और वे दो बेटियों के पिता हैं। इन तथ्यों को आधार बनाते हुए वकील ने अदालत से सजा तय करते समय राहत देने का अनुरोध किया। हालांकि, अदालत ने फिलहाल केवल दोषसिद्धि पर फैसला सुनाया है और सजा की अवधि पर अंतिम आदेश अभी आना बाकी है।
दोपहर 2:30 बजे आएगा सजा पर फैसला
गोवा के एडवोकेट जनरल देविदास पंगम ने बताया कि अदालत ने सजा की अवधि के मुद्दे पर आरोपी का पक्ष सुन लिया है। उन्होंने कहा, “कोर्ट सजा पर अपना आदेश आज दोपहर 2:30 बजे सुनाएगी।”
जांच अधिकारी ने क्या कहा?
मामले की जांच अधिकारी और गोवा पुलिस की अधिकारी सुनीता सावंत ने कहा कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष और तथ्यों के आधार पर की गई थी। उनके अनुसार, जांच के दौरान सामने आए सभी साक्ष्य अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए गए थे। उन्होंने कहा कि ट्रायल कोर्ट सबूतों का सही आकलन नहीं कर सका, लेकिन हाईकोर्ट में सभी पहलुओं पर विस्तार से सुनवाई हुई, जिसके बाद बरी करने का फैसला रद्द कर दिया गया।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला नवंबर 2013 का है। आरोपों के अनुसार, उस समय तहलका में कार्यरत एक जूनियर महिला पत्रकार ने शिकायत की थी कि गोवा में आयोजित थिंकफेस्ट कार्यक्रम के दौरान होटल की लिफ्ट में दो अलग-अलग मौकों पर तरुण तेजपाल ने उनके साथ यौन उत्पीड़न और दुष्कर्म किया। शिकायत के बाद 30 नवंबर 2013 को गोवा पुलिस ने तेजपाल को गिरफ्तार किया था। इसके बाद यह मामला लंबे समय तक न्यायिक प्रक्रिया में रहा और अब बॉम्बे हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए उन्हें दोषी करार दिया है।

