Tuesday, April 21, 2026
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उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था के दावे और सच

Nazariya 22


Nirmala Raniउत्तर प्रदेश, देश का सबसे बड़ा ही नहीं बल्कि राजनैतिक दृष्टि से भी यह सबसे महत्वपूर्ण राज्य है। यह राज्य केवल हाई प्रोफाइल राजनीतिज्ञों, साहित्यकारों, कवियों, शायरों का ही नहीं बल्कि हाई प्रोफाइल अपराध व अपराधियों का भी गढ़ है। यहां के बेखौफ अपराधियों के लिए कभी भी और किसी भी जगह बड़े से बड़े अपराध को अंजाम देना मामूली बात है। फिर चाहे कोई व्यक्ति थाने में हो,पुलिस कस्टडी में या जेल में या भीड़ भाड़ के इलाके में या अपने को सुरक्षित समझते हुये अपने घर में चैन से सो रहा हो,किसी भी जगह हत्या को अंजाम देना ऐसे शातिर अपराधियों के लिए मामूली बात है। उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था का विषय अक्सर चुनावी मुद्दा भी बनता रहता है। प्रत्येक राजनैतिक दल एक दूसरे पर कानून व्यवस्था के मामले में असफल होने और अपराध को बढ़ावा देने का आरोप लगाते रहते हैं। राज्य की वर्तमान सरकार तो प्रदेश की कानून व्यवस्था को दुरुस्त करने का कुछ ज्यादा ही ढिंढोरा पीटती रहती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रदेश को अपराधमुक्त बनाने का जहाँ दावा करते रहते हैं वहीं वह यह बताने से भी नहीं चूकते कि पिछली (सपा) सरकार में माफिया व अपराधी बेखौफ घूमा करते थे। 17 सितम्बर 2023 को उनके गृह नगर गोरखपुर में दिया गया योगी के भाषण का यह अंश कानून व्यवस्था के प्रति उनके नजरिये को दर्शाता है या यह सिर्फ तालियां पिटवाने के लिए की गयी लफ़्फाजी थी, यह तो राज्य की आपराधिक घटनाएं ही बता रही हैं। उस समय मुख्यमंत्री योगी ने कहा था किकानून संरक्षण के लिए है। लेकिन कानून को बंधक बनाकर व्यवस्था में सेंध लगाने का प्रयास करने की इजाजत किसी को नहीं है। कानून सुरक्षा के लिए है, लेकिन यदि किसी ने बहन-बेटी के साथ छेड़खानी की तो अगले चौराहे पर उस शोहदे का इंतजार यमराज कर रहे होंगे। उसे यमराज के यहां भेजने से कोई रोक नहीं पाएगा। हमें सुरक्षा के बेहतरीन वातावरण देना होगा।

क्या मुख्यमंत्री की इस चेतावनी के बाद राज्य की कानून व्यवस्था खासकर महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों में कोई कमी आई या फिर यह भी महज फिल्मी डायलॉग या फिर जुमला साबित हुआ? राज्य में तो अब हाई प्रोफाइल महिला नेता भी सुरक्षित नहीं रहीं। यहां तक कि सत्ता से जुड़े लोगों को भी अपराधी बेखौफ अपना निशाना बना रहे हैं। ताजातरीन उदाहरण उत्तर प्रदेश में भाजपा के सहयोगी दल सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) की वरिष्ठ महिला नेत्री नंदिनी राजभर की हत्या का है। नंदिनी राजभर सुभासपा की महिला विंग की प्रदेश महासचिव थीं। पिछले दिनों कबीर नगर में खलीलाबाद के डीघा गांव में अज्ञात लोगों द्वारा उनके साथ उन्हीं के घर में घुस कर कथित तौर पर पहले सामूहिक दुष्कर्म किया गया और बाद में उनके शरीर को चाकुओं के वार से छलनी कर दिया गया। जिसके चलते मौके पर ही उनकी मौत हो गई। क्या इस हत्याकांड को अंजाम देने वालों को इस बात का जरा भी भय नहीं था कि ‘अगले चौराहे पर उनका इंतजार यमराज कर रहे होंगे’? चाक चौबंद कानून व्यवस्था का दावा कर अपनी ही पीठ थपथपाने वाला यही वह प्रदेश है जहां 15 अप्रैल, 2023 को पुलिस सुरक्षा के मध्य तीन हमलावरों ने पूर्व सांसद अतीक अहमद व उसके भाई अशरफ की उस समय गोली मारकर हत्या कर दी थी, जब यह दोनों भाई मेडिकल जांच के लिए प्रयागराज के काल्विन अस्पताल ले जाए जा रहे थे। उस समय तीन अपराधी पुलिस सुरक्षा की परवाह किए बिना पुलिस का घेरा तोड़कर इन दोनों भाइयों पर गोलियां बरसाने लगे जिसमें दोनों भाइयों की मौके पर ही मौत हो गई थी। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भी यूपी सरकार को फटकार लगाई थी। इसी तरह गत वर्ष 2 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले का वह हत्याकांड जिसमें मात्र 35 मिनट के भीतर दो परिवार के छह लोगों की हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड ने उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश में सनसनी फैला दी थी। उस समय भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दोषियों के विरुद्ध सख़्त कार्रवाई करने का आदेश दिया था और सत्ताधारी नेताओं की ओर से कहा गया था कि इस मामले में ऐसी कार्रवाई की जाएगी कि वह लोगों के लिए नजीर बन जाएगी। परंतु दरअसल ऐसी घटनाएं तो शासन की विफलता की ही नजीर पेश करती हैं। रहा सवाल सख़्त कार्रवाई करने के निर्देश का या अपराधियों को नजीर बनने वाली सजा देने या दुख प्रकट करने का तो इन लफ़्फाजियों से न तो मृतकों का जीवन वापस आ सकता है न ही अपराध में कमी आती दिखाई देती है।

योगीराज में इस तरह का हाई प्रोफाइल सामूहिक हत्याकाण्ड 17 जुलाई 2019 को उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के घोरावल थाना क्षेत्र के उभ्भा गांव में हुआ था जबकि लगभग 30 ट्रैक्टर में भरकर आए 150 सशस्त्र लोगों ने जिनके पास कथित तौर पर 10 से अधिक राइफलें थीं। जब इन सशस्त्र हमलावरों को रोकने के लिए गांव वालों ने गुहार लगाई तो उन्होंने उन पर ही गोलियों बरसानी शुरू कर दीं। नतीजतन 10 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। योगी सरकार के प्रदेश में चाक चौबंद कानून व्यवस्था के दावों के बीच अपराधियों द्वारा ऐसी अनेक आपराधिक घटनाएं प्रदेश में आए दिन अंजाम दी जाती हैं। महिलाओं के साथ भी आए दिन अपराध होते रहते हैं। परंतु इन वास्तविताओं को नजरअंदाज कर इन्हें उत्तर प्रदेश या मणिपुर जैसी डबल इंजन की सरकारों वाले राज्य की नहीं, बल्कि केवल बंगाल और केरल की आपराधिक घटनाएं ही नजर आती हैं। गोया इन्हें उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था के अपने ही दावों और उसकी हकीकत में कोई फर्क नजर नहीं आता।


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