नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत और अभिनंदन है। आज 17 अगस्त को नाग पंचमी और सावन सोमवार का खास संयोग बन रहा है। एक ओर सावन सोमवार भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है, वहीं नाग पंचमी पर नाग देवता की पूजा की जाती है। दोनों पर्व एक ही दिन पड़ने से इस दिन शिव पूजा और नाग देवता की आराधना का महत्व और बढ़ जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नाग पंचमी पर नाग देवता की पूजा और सावन सोमवार को भगवान शिव का जलाभिषेक करने से सुख-शांति, परिवार की सुरक्षा और समृद्धि की कामना की जाती है। श्रद्धालु इस दिन व्रत, पूजा, मंत्र जाप और दान-पुण्य कर सकते हैं।
नाग पंचमी की पूजा का शुभ समय
17 अगस्त की सुबह नाग पंचमी की पूजा के लिए सुबह 6:04 बजे से 8:39 बजे तक का समय शुभ माना जा रहा है। हालांकि, अलग-अलग शहरों में सूर्योदय के समय में अंतर होने के कारण पूजा के मुहूर्त में थोड़ा बदलाव संभव है।
नाग पंचमी और सावन सोमवार का महत्व
हिंदू धर्म में नाग देवता को पूजनीय माना गया है। भगवान शिव के गले में नाग का विराजमान होना भी नाग पूजा और शिव आराधना के गहरे संबंध को दर्शाता है। इसी धार्मिक आस्था के चलते नाग पंचमी पर नाग देवता की पूजा करने की परंपरा चली आ रही है। वहीं, सावन के सोमवार को भगवान शिव की उपासना के लिए बेहद शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा से शिवलिंग पर जल चढ़ाने, बेलपत्र अर्पित करने और भगवान शिव का ध्यान करने से मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना की जाती है।
घर पर ऐसे करें नाग पंचमी की पूजा
नाग पंचमी के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूजा स्थल की सफाई करें। इसके बाद भगवान शिव और नाग देवता का ध्यान करते हुए पूजा का संकल्प लें।
सबसे पहले भगवान शिव का पूजन करें। शिवलिंग पर जल अर्पित करें और बेलपत्र, फूल, अक्षत तथा धूप-दीप चढ़ाएं। इसके बाद नाग देवता की प्रतिमा या चित्र पर फूल अर्पित करें। अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार नैवेद्य चढ़ाएं तथा नाग पंचमी की कथा का श्रवण करें। अंत में भगवान शिव और नाग देवता की आरती करें।
शिवलिंग पर क्या चढ़ाएं?
सावन सोमवार और नाग पंचमी के संयोग को देखते हुए शिवलिंग पर जल और बेलपत्र अर्पित करना विशेष रूप से शुभ माना जाता है। इसके अलावा फूल, अक्षत और फल भी चढ़ाए जा सकते हैं। पूजा में दिखावे के बजाय श्रद्धा और भक्ति को अधिक महत्व देना चाहिए। अपनी सामर्थ्य के अनुसार की गई पूजा को ही पर्याप्त माना जाता है।
नाग पंचमी पर इन बातों का रखें ध्यान
नाग पंचमी के दिन जीवित सांपों को पकड़ने, उन्हें परेशान करने या दूध पिलाने से बचना चाहिए। नाग देवता की पूजा के लिए मंदिर में स्थापित प्रतिमा या चित्र का पूजन किया जा सकता है।
इस दिन किसी भी जीव-जंतु को नुकसान न पहुंचाने और प्रकृति के प्रति संवेदनशील रहने का प्रयास करना चाहिए। साथ ही पूजा के दौरान क्रोध, विवाद और नकारात्मक विचारों से दूर रहना बेहतर माना जाता है।
कालसर्प दोष से भी जुड़ी हैं मान्यताएं
ज्योतिषीय मान्यताओं में नाग पंचमी को राहु-केतु और नाग से संबंधित दोषों की शांति के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी वजह से कई लोग इस दिन नाग देवता की पूजा और भगवान शिव का अभिषेक करते हैं। हालांकि, किसी व्यक्ति की कुंडली में कालसर्प दोष या किसी अन्य ग्रह दोष का प्रभाव जानने के लिए व्यक्तिगत जन्मकुंडली का अध्ययन जरूरी होता है। केवल किसी पर्व पर की जाने वाली सामान्य पूजा को किसी व्यक्ति की कुंडली का निश्चित उपचार नहीं माना जाना चाहिए।
सावन सोमवार पर करें ये आसान काम
17 अगस्त को सावन सोमवार होने के कारण भगवान शिव को जल अर्पित करके ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप किया जा सकता है। श्रद्धालु अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार व्रत रख सकते हैं।
इसके अलावा मंदिर में शिवलिंग के दर्शन-पूजन, जरूरतमंदों को भोजन कराने और सामर्थ्य के अनुसार दान करने को भी शुभ माना जाता है। इस विशेष संयोग पर श्रद्धा, संयम और सेवा भावना के साथ पूजा-अर्चना करना धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।

