Saturday, April 17, 2021
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कांग्रेस पार्टी ने लगाया आरोप: राफेल सौदेबाजी में हुआ खुलासा, निष्पक्ष जांच की मांग

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जनवाणी ब्यूरो |

नई दिल्ली: फ्रांस से 36 राफेल खरीदने के मामले में कथित भ्रष्टाचार पर कांग्रेस ने केंद्र सरकार को घेरा। दिल्ली में कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मोदी सरकार पर जमकर हमला बोला। राफेल विमान डील पर कांग्रेस ने कहा कि 60 हजार करोड़ की सच्चाई सामने आई है।

राफेल खरीदी पर बिचौलिए और कमीशनखोरी को बढ़ावा दिया गया है। प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि फ्रांस की राफेल विमान बनाने वाली कंपनी द सॉल्ट ने स्वीकार किया है कि उसने भारत के साथ राफेल डील में एक मीडिलमैन को 1 मिलियन यूरो उपहार के तौर पर दिया है।

सुरजेवाला ने कहा कि कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट से इस पूरे मामले पर निष्पक्ष जांच की मांग करता है। हालांकि उन्होंने कहा कि सरकार के पास अब भी वक्त है इस मामले पर अपना रुख स्पष्ट करें।

देश के सबसे बड़े रक्षा सौदे में गड़बड़ी

सुरजेवाला ने कहा कि फ्रांस की जांच एजेंसी ने जब कंपनी की जांच की गई तो उसमें कमीशनखोरी के केस सामने आए। ऐसे में कांग्रेस इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग करती है। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी इस पर बात करने को तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि देश के सबसे बड़े रक्षा सौदे में भारत और फ्रांस की दोनों सरकार की संलिप्तता बराबर की है।

कंपनी की ऑडिट में हुआ भ्रष्टाचार का खुलासा

गौरतलब है कि राफेल विमान की खेप भारत में आने शुरू हो गए हैं। लेकिन इसी बीच फ्रांस की एक वेबसाइट ने राफेल नाम से एक आर्टिकल छापे हैं। इसमें दावा किया गया है कि सौदे में भ्रष्टाचार हुआ है। रिपोर्ट में लिखा गया है कि राफेल लड़ाकू विमान डील में गड़बड़ी का सबसे पहले जानकारी 2016 में फ्रांस की भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसी AFA को हुई थी। AFA ने जांच में पाया कि विमान बनाने वाली कंपनी दसौल्ट ने एक बिचौलिए को 10 लाख यूरो देने पर सहमति जताई है। हालांकि जिस कंपनी को पैसा दिया गया है उसके दलाल एक अन्य हथियार सौदे में गड़बड़ी का आरोपी है।

बिल भारत की कंपनी के नाम पर हुआ तैयार

रिपोर्ट के मुताबिक अक्टूबर 2018 में फ्रांस की भ्र्ष्टाचार निरोधक एजेंसी ने विमान तैयार करने वाली कंपनी का ऑड़िट किया । जिसमें कंपनी के 2017 के खातों की जाच का दौरान ‘क्लाइंट को गिफ्ट’ के नाम पर हुए 1 मिलियन यूरो के खर्च की जानकारी हाथ लगी।

इस पर AFA ने इस खर्च का बिल मांगा तो दसॉल्ट एविएशन ने  30 मार्च 2017 का बिल उपलब्ध कराया। जिसमें भारत की एक कंपनी के नाम पर पैसा मुहैया कराने का उल्लेख है। पैसों का इस्तेमाल राफेल लड़ाकू विमान के 50 बड़े ‘मॉडल’ बनाने में हुआ। हालांकि यह मॉडल बन नहीं पाए। यह बिल राफेल लड़ाकू विमान के 50 मॉडल बनाने के लिए दिए ऑर्डर का आधे काम के लिए था।हर एक मॉडल की कीमत करीब 20 हजार यूरो से अधिक थी।

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