Saturday, October 23, 2021
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Homeसंवादनजरिया: कोरोना से भी खतरनाक है डिजीज-एक्स वायरस

नजरिया: कोरोना से भी खतरनाक है डिजीज-एक्स वायरस

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योगेश सोनी
दुनिया को संकट में डालने वाले कोरोना वायरस से अभी निकले नहीं कि एक और नए वायरस ने दस्तक दे दी। बीते शनिवार अफ्रीका के कांगो में एक महिला में अजीब से लक्षण दिखे, जिसे डॉक्टर ने साधारण बीमारी न मानते हुए किसी वायरस का शिकार समझा। लक्षण दिखने के बाद मरीज को आइसोलेट किया और उसके बाद इबोला टेस्ट के लिए सेंपल भेजे और रिपोर्ट नेगेटिव आई। इसके बाद पूरे देश में हलचल मच गई व दुनिया के बडेÞ वैज्ञानिकों व शोधकर्ताओं के अनुसार यह वायरस दुनिया में बहुत तेजी से फैल सकता है। अज्ञात बीमारी होने के कारण अभी तक इस वायरस को डिसीस-एक्स का नाम दिया है।
कांगो की मीडिया के अनुसार जो डॉक्टर इस वायरस से पीड़ित महिला का इलाज कर रहे हैं, उनका कहना है कि यह बीमारी कोई काल्पनिक नहीं है। जिस तरह कोरोना व इबोला जैसे घातक वायरस के बारे किसी को जानकारी व यकीन नहीं हुआ था, उस ही तरह इस पर भी लोग जल्द भरोसा नहीं कर पा रहे हैं, लेकिन यह भी बहुत खतरनाक वायरस के रूप में फैल सकता है। इस वायरस को पहचानने व समझने के लिए वैज्ञानिकों ने सबूत जुटाने शुरू कर दिए व स्पष्ट शब्दों में कहा है कि हमें इस वायरस से भी डरने व बेहद सतर्क रहने की जरूरत है।
ज्ञात हो कि 1976 में प्रोफेसर टैम्फम ने इबोला वायरस की पहचान करके पूरी दुनिया को इस घातक वायरस से अवगत कराया था और अब इस नए वायरस की खोज पर भी काम कर रहे हैं। अस्सी के दशक में कांगो के यम्बुकु मिशन अस्पताल में पहली बार खतरनाक वायरस की पुष्टि हुई थी, जिसे इबोला का नाम दिया था। उस समय अस्पताल में काम कर रहे 90 प्रतिशत स्टॉफ व मरीजों की मौत हो गई थी। इसके बाद स्थिति को नियंत्रित करना किसी चुनौती से कम नही था। हर रोज कई जानें जाती रही थीं। लगभग एक वर्ष बाद स्थिति काबू में आई थी। इससे पहले व बाद में भी कई तरह के नए वायरस आए, लेकिन जल्द ही उनको नियंत्रित कर लिया लेकिन 2019 में आए कोरोना ने पूरी दुनिया को इस कदर हिला रखा है कि लाखों लोगों की जानें लेने के बाद भी यह वायरस काबू में नहीं आ रहा है।
यदि ऐसे स्थिति में डिसीस-एक्स ने भी अपने पैर पसार लिए तो दुनिया तबाही की ओर जा सकती है। चूंकि कोरोना में अपने आप को दुनिया की सबसे बड़ी शक्ति कहने व मानने वाले देशों की पोल खुलती दिखी। अमेरिका व रूस समेत जिन देशों का यह कहना था कि वह किसी भी बड़ी से बड़ी व खतरनाक घटना पर नियंत्रण पा सकते हैं, वो भी पूर्ण रुप से विफल होते नजर आए। तमाम विकासशील देश अब तक वैक्सीन नहीं बना पाए, जिससे यह तो तय हो गया वायरस के रूप में अज्ञात व अदृश्य शत्रु से लड़ना और उस पर विजय पाना मुश्किल है। अब ऐसे वायरसों से डरना जरूरी हो गया। चूंकि अब तक कोरोना को लेकर यह भी पता नहीं लगा कि यह प्राकृतिक वायरस है या अप्राकृतिक? तीन दिन पूर्व  ब्रिटेन के स्वास्थ्य मंत्री मैट हैनकॉक ने कहा कि साउथ अफ्रीका से आए दो यात्रियों में पहले से ज्यादा संक्रामक वायरस मिला है। जिससे बडेÞ स्तर पर इंफेक्शन फैल सकता है। इसके अलावा इससे पहले स्ट्रेन मिला था, जो ब्रिटेन के साउथ-वेस्ट, मिडलैंड और नॉर्थ इंग्लैंड में भी पहुंच गया है। इस वजह से अब तक चालीस देश ब्रिटेन में ट्रैवल बैन लगा चुके हैं। यदि वायरसों की वजह के इस तरह बैन लगते रहे तो पूरे विश्व की इकोनॉमी बडेÞ स्तर प्रभावित होगी। दुनिया में ज्यादा देश रोजमर्रा वाली तर्ज पर जिंदगी जीते हैं। यदि हमारे देश के परिवेश में बात की जाए तो कोरोना के प्रभाव से अभी तक भी पूर्ण रूप से नही उभरे हैं। हर रोज नई चुनौतियां इस तरह सामने आ रही हैं। सरकारों का अपने स्तर पर इस भयावह संकट से निकालना जारी है, लेकिन हर कोई व्यापार या नौकरी एक दूसरे से पूरक होकर संचालित होती है। आसान भाषा में समझने के लिए गाड़ी के चारों पहिए जब चलते हैं, तभी गाड़ी चलती है। इस ही प्रकार सभी देश एक-दूसरे से व्यापार करके अपनी गति को बढ़ावा देते हैं, जिससे सालाना करोड़ों-अरबों का व्यापार होता है। यदि इस तरह वायरसों की वजह से प्रतिबंध लगता रहा तो दुनिया का भविष्य अच्छा नही होगा। प्रतिबंध से अस्थिरता आ रही है, जिस वजह से व्यापारी माल का लेने-देन करने में संकोच महसूस कर रहे हैं। पेमेंट फंसने से लेकर वस्तुओं व खाद्य पदार्थों की डिलीवरी नहीं हो रही। अर्थात जिस धारा में व्यापार चलने चाहिए वैसे नहीं चल रहे।
बहरहाल, यदि इस ही तरह नए-नए वायरस आते रहे तो दुनिया में भारी असमंजसता फैल जाएगी। यदि ऐसे वायरसों पर नियंत्रण नहीं पाया गया तो मानव जीवन पर इस तरह के प्रहार मानव जाति को खत्म कर देंगे। इसलिए सफाई व सोशल डिस्टेंसिंग के अलावा शासन-प्रशासन द्वारा अन्य सभी तरह के एहतियात बरतने की जरूरत है, जिससे आप और हम सुरक्षित रहें।

 


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