Tuesday, May 26, 2026
- Advertisement -

कोरोना ने छीन लिया रोजी-रोटी का आधार

  • शिवजी के लिये कांवड़ बनाने वाले मुस्लिम परिवार परेशान
    50 सालों से परिवार बना रहा कांवड़, पहले से हो जाती थी बुकिंग

जनवाणी संवाददाता |

 मेरठ: श्रावण मास की कांवड़ को लेकर भले ही उत्तराखंड सरकार और उत्तर प्रदेश की सरकार में रस्साकस्सी चल रही हो लेकिन सबसे ज्यादा पिस रहे पूर्वा ताहिर हुसैन के वो परिवार जो पिछले 50 सालों से शिवभक्तों के लिये कांवड़ बनाते आ रहे हैं। दो साल से इन परिवारों ने कांवड़ नहीं बनाई है|

इनका मानना है कि एक तो कोरोना और दूसरा हरिद्वार में दुकानों का किराया बेतहाशा बढ़ने से अब कांवड़ बनाने की हिम्मत नहीं पड़ रही है। ऐसे परिवारों को उम्मीद है कि अगर कांवड़ की अनुमति मिल जाए तो वो बर्बादी से थोड़ा बच सकते हैं।

घंटाघर के पास केले वाली गली में घुसते ही एक पतली गली पूर्वा ताहिर हुसैन में खुलती है। इस गली में घुसने के लिये साहस की जरुरत है। गंदगी से अटी पड़ी नालियां और बदहाल सड़क में खड़े ठेलों के पास बीस से पच्चीस परिवार बांस की टोकरियां बनाने का काम करते है।

इनमें सांप रखने की टोकरी हो या फिर मिठाई, फल और शादी ब्याह में काम आने वाली टोकरियां यहां की मुस्लिम महिलाएं बनाती है। ये परिवार 50 सालों से कांवड़ बनाने का काम करते आ रहे है। सावन के लगते ही इनका काम तेज हो जाता है और कांवड़ बनकर घंटाघर पर एसपी सिटी के ऑफिस  के सामने चौराहे के पास बिकने के लिये रख दी जाती हैं।

सावन महीने में सदियों से निकलती आ रही कांवड़ को लेकर अभी स्थिति साफ नहीं हुई है। उत्तराखंड सरकार ने फिलहाल अनुमति नहीं दी है, लेकिन प्रदेश सरकार ने कांवड़ को लेकर अनुमति प्रदान कर दी है। अब मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया है। कांवड़ बनाने वाले हसीन ने बताया कि दो साल से कांवड़ न बनने के कारण यह व्यवसाय पूरी तरह से बंद हो गया हैं।

परिवार की महिलाएं भी इसमें खुल कर साथ दे रही है। हसीन ने बताया कि कांवड़ के लिए हरिद्वार में दुकाने लेना अब बस कि बात नहीं रही। वहां दुकानें महंगी मिल रही है। कांवड़ बनाने वालो ने बताया कि एक कांवड़ बनाने में 100 से 150 रुपए का खर्च आता है जो 400 तक में बिक जाती है।

अब उम्मीद नहीं है कि इस बार कांवड़ निकल पाए। मोहम्मद सलीम, मोहम्मद रियासत ने बताया कि इस बार अभी तैयारी भी शुरु नहीं हुई है। बांस और खिलौने तक नहीं लाये गए है। पहले तस्वीर साफ हो जाए फिर देखते हैं। महिला नसीमा ने बताया कि अब टोकरियां बनाने का काम करूंगी क्योंकि कांवड़ बनाकर रखने से कोई फायदा भी तो नहीं है।

यह काम छूटने के बाद परिवार के मर्द दूसरे काम में लग गए है। ठेला चलाकर परिवार का पेट पाल रहे हैं। इनका मानना है कि सावन के महीने में जब श्रद्धालु कांवड़ लेकर निकलते हैं तो खुशी होती है कि उनके हाथ की बनी कांवड़ एक धार्मिक काम के लिये प्रयोग की जा रही है।

spot_imgspot_img
[tds_leads title_text="Subscribe" input_placeholder="Email address" btn_horiz_align="content-horiz-center" pp_checkbox="yes" pp_msg="SSd2ZSUyMHJlYWQlMjBhbmQlMjBhY2NlcHQlMjB0aGUlMjAlM0NhJTIwaHJlZiUzRCUyMiUyMyUyMiUzRVByaXZhY3klMjBQb2xpY3klM0MlMkZhJTNFLg==" f_title_font_family="467" f_title_font_size="eyJhbGwiOiIyNCIsInBvcnRyYWl0IjoiMjAiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIyMiIsInBob25lIjoiMzAifQ==" f_title_font_line_height="1" f_title_font_weight="700" msg_composer="success" display="column" gap="10" input_padd="eyJhbGwiOiIxNXB4IDEwcHgiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIxMnB4IDhweCIsInBvcnRyYWl0IjoiMTBweCA2cHgifQ==" input_border="1" btn_text="I want in" btn_icon_size="eyJsYW5kc2NhcGUiOiIxNyIsInBvcnRyYWl0IjoiMTUifQ==" btn_icon_space="eyJwb3J0cmFpdCI6IjMifQ==" btn_radius="3" input_radius="3" f_msg_font_family="394" f_msg_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsInBvcnRyYWl0IjoiMTEiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIxMiJ9" f_msg_font_weight="500" f_msg_font_line_height="1.4" f_input_font_family="394" f_input_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsInBvcnRyYWl0IjoiMTEiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIxMiJ9" f_input_font_line_height="1.2" f_btn_font_family="394" f_input_font_weight="500" f_btn_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsImxhbmRzY2FwZSI6IjExIiwicG9ydHJhaXQiOiIxMCJ9" f_btn_font_line_height="1.2" f_btn_font_weight="700" f_pp_font_family="394" f_pp_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsImxhbmRzY2FwZSI6IjEyIiwicG9ydHJhaXQiOiIxMSJ9" f_pp_font_line_height="1.2" pp_check_color="#000000" pp_check_color_a="var(--metro-blue)" pp_check_color_a_h="var(--metro-blue-acc)" f_btn_font_transform="uppercase" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLWJvdHRvbSI6IjYwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9LCJsYW5kc2NhcGUiOnsibWFyZ2luLWJvdHRvbSI6IjUwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9LCJsYW5kc2NhcGVfbWF4X3dpZHRoIjoxMTQwLCJsYW5kc2NhcGVfbWluX3dpZHRoIjoxMDE5LCJwb3J0cmFpdCI6eyJtYXJnaW4tYm90dG9tIjoiNDAiLCJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBvcnRyYWl0X21heF93aWR0aCI6MTAxOCwicG9ydHJhaXRfbWluX3dpZHRoIjo3NjgsInBob25lIjp7ImRpc3BsYXkiOiIifSwicGhvbmVfbWF4X3dpZHRoIjo3Njd9" msg_succ_radius="2" btn_bg="var(--metro-blue)" btn_bg_h="var(--metro-blue-acc)" title_space="eyJwb3J0cmFpdCI6IjEyIiwibGFuZHNjYXBlIjoiMTQiLCJhbGwiOiIxOCJ9" msg_space="eyJsYW5kc2NhcGUiOiIwIDAgMTJweCJ9" btn_padd="eyJsYW5kc2NhcGUiOiIxMiIsInBvcnRyYWl0IjoiMTBweCJ9" msg_padd="eyJwb3J0cmFpdCI6IjZweCAxMHB4In0=" f_pp_font_weight="500"]

Related articles

एआई पर बदला सैम ऑल्टमैन का नजरिया, बोले- इंसानों की जगह लेना आसान नहीं

जनवाणी ब्यूरो | नई दिल्ली: ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन...
spot_imgspot_img