Thursday, April 2, 2026
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मौत का सबब बन गए खुले नाले, निगम के पास नहीं है कोई जवाब

  • गंगानगर क्षेत्र में खुले नालों के किनारों पर नहीं बनाई गई दीवार
  • नहीं होती है समय पर नालों की ठीक से सफाई

मनोज राठी |

मेरठ/गंगानगर: खुले नाले मौत का सबब बन रहे हैं। कई हादसों में लोग खुश किस्मत रहे कि उनकी जान बच गई। इनमें से कई नाले घनी आबादी के बीच से गुजर रहे हैं। नाले के किनारे पर खेलते हुए बच्चे अक्सर इनमें गिरकर हादसे का शिकार हो जाते हैं। नालों को ढकने या लोगों को हादसे से बचाने के लिए फिलहाल प्रशासन के पास कोई योजना नहीं है।

आबादी के बीच से गुजर रहे नालों में सबसे खतरनाक कसेरूखेड़ा का नाला है। इस नाले के बिल्कुल किनारे तक लोगों ने मकान बनाए हुए हैं। नाले के किनारे पर ही बच्चे खेलते रहते हैं। नाले की गहराई भी काफी अधिक है। वहीं, खुले नालों की वजह से कई लोगों की गिरकर मौत भी हो चुकी है। बावजूद इसके नगर निगम का इस ओर कोई ध्यान नहीं है। ऐसा लगता है जैसे निगम किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रही है।

गंगानगर क्षेत्र में मीनाक्षीपुरम, रक्षापुरम, अम्हेड़ा, कसेरूबक्सर में जगह-जगह मौत के नाले खुले हैं। जनवाणी संवाददाता ने जब खुले नालों की हालत देखी तो नाले में गंदगी, कीचड़ और दुर्गंध ही मिली। शहर के खुले नालों में लगातार हो रही वारदातों के कारण इन्हें मौत के नाले कहा जाए तो गलत नहीं होगा। नालों के किनारे किसी तरह की दीवार न होना भी हादसे की बड़ी वजह बन रहे हैं।

न तो प्रशासनिक अधिकारी इस और ध्यान दे रहे हैं और न ही नगर निगम के आलाधिकारी। उन नालों की सफाई भी नहीं होती है। शहर के कई प्रमुख इलाकों में नाली के ढक्कन टूटे पड़े हैं। बड़े-बड़े नालों सहित छोटी नालियों पर ढक्कन नहीं रहने के कारण राहगीरों को आवाजाही में खासी फजीहत उठानी पड़ रही है। इन नालों की चपेट में हर रोज राहगीर आ रहे हैं।

दुपहिया, आॅटो और रिक्शा सहित बड़ी-बड़ी गाड़ियां भी दुर्घटना के शिकार हो रहे हैं। शहर में कई जगह नाला इस तरह से क्षतिग्रस्त है कि रोजाना कोई न कोई वाहन अस्पताल में जाते समय या आते समय दुर्घटनाग्रस्त हो जाता है। जिसकी वजह से वाहन सवार या अन्य लोग हादसे के शिकार हो जाते हैं।

इसलिए क्षतिग्रस्त हैं नाले

शहर में अधिकतर नाले पुराने बने हुए हैं। जो ईंट से बने हुए हैं। नगर निगम इन नालों की जब सफाई कराता है तो जेसीबी मशीन से कराता है। जेसीबी मशीन से सफाई होने पर नालों की ईंट निकल जाते हैं, लेकिन इन निकले हुए नालों को नगर निगम ठीक नहीं कराता। इससे नाले क्षतिग्रस्त होते चले जाते हैं और हादसों को दावत देते हैं।

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