Monday, March 9, 2026
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भ्रष्टाचारी कर्मचारी नगर आयुक्त की शरण में

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अफरशाही को स्पष्ट कर चुके हैं कि जीरो टोलरेंस पर काम होना चाहिए। भ्रष्टाचार को जीरो किया जाए। ये मुख्यमंत्री की प्राथमिकता में शामिल हैं, लेकिन नगर निगम में जीरो टोलरेंस पर नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार में लिप्त इंजीनियर और क्लर्कों को मलाईदार सीटों पर बैठा दिया गया है। सरकारी सिस्टम से भ्रष्टाचार कैसे खत्म होगा? इसके लिए जवाबदेही जिन अफसरों की है, वहीं अफसर भ्रष्टाचार को खाद-पानी देकर सीच रहे हैं। नगर निगम ही नहीं, बल्कि किसी भी सरकारी आॅफिस के लिए सर्विस बुक बेहद महत्वपूर्ण दस्तावेज होता हैं, लेकिन उसमें भी निगम में छेड़छाड़ कर कुछ कर्मचारियों को अतिरिक्त लाभ पहुंचाया जा रहा हैं? इसमें भी खूब भ्रष्टाचार हो रहा हैं। इसी तरह से भ्रष्टाचार में संलिप्त इंजीनियर को 2021 में तबदाला होने के बाद भी रिलीव नहीं किया जा रहा हैं। आखिर नगरायुक्त को इंजीनियर से क्या लालच है कि तबादला होने के बाद भी रिलीव नहीं कर रहे हैं। नगरायुक्त की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।

  • कौन करेगा कार्रवाई? कोरोना काल में नलकूप घोटाला रहा था सुर्खियों में
  • दागदार अफसरों की तैनाती से नगर आयुक्त की कार्य प्रणाली पर उठ रहे सवाल

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: नगर निगम में नलकूप घोटाला हुआ। कोरोना काल में तब यह मामला सुर्खियों में रहा था। जिन इंजीनियरों ने इस घोटाले में नाम सामने आये, वो वर्तमान में मलाईदार सीटों पर जमे हुए हैं। इस घोटाले में सहायक अभियंता दुष्यंत भारद्वाज का नाम भी सामने आया था। जलकल विभाग में सहायक अभियंता के महत्वपूर्ण पद पर वर्तमान में दुष्यंत भारद्वाज जमे हुए हैं। इनको नगर आयुक्त नहीं हटा पा रहे हैं। महत्वपूर्ण सीटों पर दागदार अफसरों की तैनाती नगर आयुक्त की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठा रही है।

दरअसल, दुष्यंत भारद्वाज कभी नगर निगम में जूनियर इंजीनियर के पद पर तैनात थे। इसी बीच इनका सहायक अभियंता के पद पर प्रमोशन हुआ। इस बीच में नलकूप घोटाला भी सामने आया। तत्कालीन नगर आयुक्त चौरसिया ने दुष्यंत भारद्वाज के लिए लिखा भी था। महत्वपूर्ण बात यह है कि दुष्यंत भारद्वाज जेई से एई भी बन गए और फिर भी मेरठ नगर निगम में ही जमे हुए हैं। प्रोमोशन के बाद नियमानुसार तबादला होना चाहिए, मगर तबादला नहीं हुआ। हालांकि 2021 में इनका तबादला इटावा में हो गया था, लेकिन फिर भी दुष्यंत भारद्वाज को नगर आयुक्त अमितपाल शर्मा ने रिलीव नहीं किया।

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चर्चा ये है कि नगरायुक्त से दुष्यंत भारद्वाज की गहरी सेटिंग हैं, जिसमें चलते वह इसी नगर निगम में एई के पद पर बने हुए हैं। तबादला होने के बाद भी उनको यहां से रिलीव नहीं किया गया। भ्रष्टाचार में संलिप्तता और फिर एक निश्चित अवधि से ज्यादा समय दुष्यंत का मेरठ नगर निगम में बीत गया है। फिर भी तबादला होने के बाद भी नगर आयुक्त उन्हें रिलीव नहीं कर रहे हैं। कहा जा रहा है कि दुष्यंत भारद्वाज नगर आयुक्त की विशेष कृपा से नगर निगम में महत्वपूर्ण पद पर जल निगम में जमे हुए हैं। उनको किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं है।

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क्योंकि नगर आयुक्त के चहेतों में से वह एक है। दुष्यंत भारद्वाज को रिलीव क्यों नहीं किया जा रहा है? नगर आयुक्त से उनकी क्या सेटिंग है? ये कई सवाल ऐसे हैं, जो जवाब मांग रहे हैं। आखिर सरकार के नियमों के विपरीत दुष्यंत भारद्वाज को नगर निगम में ही रोककर रखा गया है। जानबूझकर उनको यहां से रिलीव नहीं किया जा रहा है। इस पूरे प्रकरण में नगर आयुक्त की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

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