- आर्थिक कठिनाइयों से जूझते परिवारों की बेटियां बुलंद हौसले के साथ देश के लिए पदक लाने में जुटी
- बेटियां पिता के सपनों को पूरा करने में बहा रही पसीना
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: क्रांतिधरा की बेटियां पिता के सपने को साकार करने में जुटी है। कभी बेटियां चुल्हा चौका तक सीमित रहती थी, लेकिन अब बेटियों ने उम्मीदों की उड़ान भर दी हैं। बेहद सीमित संसाधन, समाज की तमाम पाबंदियों के बावजूद हौसले में कोई कमी नहीं है।

देश के लिए मेडल लाना इनकी प्राथमिकता में शामिल है, जिसको लेकर यह दिन-रात पसीना बहा रही है। अब बेटियां राष्टÑीय पलक पर चमकने लगी हैं। उधर, मेरठ की दोनों बेटियां बुलंद हौसलों के साथ इस समय देश के लिए मेडल लाने की तैयारी कर रहीं है। अगर इनको थोड़ी सी भी आर्थिक मदद मिल जाए तो यह अपने व पिता के सपनों को पूरा करने का हौसला रखती है।
भूमिका चौधरी, पिता ऋषिपाल चौधरी के साथ 2018 में स्टेडियम में देखने पहुंची तो यहीं की होकर रह गई। हालांकि वह शूटर बनना चाहती थी, लेकिन महंगे इक्यूपमेंट होने के कारण बॉक्ंिसग को चुना। पिता के पास खुद की कार भी नहीं है और एक ट्रैवल एजेंसी में चालक की नौकरी करते हैं, परिवार किराए के मकान में रहता है। स्टेडियम के कोच भूपेंद्र यादव ने भूमिका के हौसले को परखा और स्टेडियम में प्रशिक्षण देना शुरू कर दिया।
इसके बाद भूमिका ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। जूनियर कैटेगिरी में भूमिका अब तक तीन गोल्ड व तीन सिल्वर मेडल जीत चुकी है। परिवार में दो छोटी बहनें वेदिका चौधरी व राधिका चौधरी व चार साल का भाई है। पिता ने भूमिका को आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बाद भी कभी अहसास नहीं होने दिया। मां शशि चौधरी ने बताया कि भूमिका के हौसले को देखकर मुख्य विकास अधिकारी शशांक चौधरी ने उसकी हर कदम पर मदद की।
साथ ही इस्माइल कॉलेज की प्रधानाचार्य मृदुला शर्मा व एनसीसी की टीचर रानी शर्मा ने हमेशा उसका हौसला बढ़ाया। इस समय भूमिका बनारस में स्पोर्ट्स अथॉरिटी आॅफ इंडिया के हॉस्टल में नेशनल जूनियर में देश के लिए खेलने की तैयारी कर रही है।
आकांक्षा खारी के पिता अमित खारी बिजली विभाग में संविदाकर्मी है और महज नौ हजार रुपये की तनख्वाह पाते हैं। आकांक्षा ने 2018 में पिता का सपना पूरा करने के लिए शूटिंग में अपने देश का प्रतिनिधित्व करने की ठानी। आकांक्षा इस समय विक्टोरिया पार्क में अभ्यास कर रही है।
10 मीटर कैटेगिरी में अबतक चार गोल्ड जीत चुकी है, पहला गोल्ड सीनियर कैटेगिरी में 2019 में जयपुर में हुई प्रतियोगिता में, दूसरा गोल्ड 2022 में मेरठ, तीसरा गोल्ड भी 2022 मे बागपत व चौथा गोल्ड 2022 में शामली में जीता। आकांक्षा मेरठ कॉलेज में बीए द्वितीय वर्ष की छात्रा है, उसने बताया कि 2020 में इंडियन नेशनल टीम में चयन के लिए ट्रायल दे चुकी है, लेकिन कोरोना के चलते अगला ट्रॉयल नहीं हुआ है।
मां शिमला खारी गृहिणी है, उन्होंने बताया कि आकांक्षा को आगे बढ़ते देखना चाहती है, लेकिन कोचों की महंगी फीस देने मे असमर्थता की वजह से कोचिंग ठीक से नहीं मिल पा रही है। आकांक्षा के लिए पिता अमित ने बड़ी मुश्किल से एक लाख 70 हजार रुपये में एयर पिस्टल खरीदी थी। अब भी दूसरी जगहों पर होने वाली प्रतियोगिताओं में भाग लेने जाते समय पैसे की कमी का सामना करना पड़ता है।

