Wednesday, April 22, 2026
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कानून को ठेंगा: सार्वजनिक स्थल बने नशेड़ियों के अड्डे

  • रेलवे के लोडिंग-अनलोडिंग यार्ड में खड़ा गार्ड वैगन नशेड़ियों के हवाले, जायजा लेने पर सच आया सामने

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: शहर में खुलेआम नशेड़ी सार्वजनिक स्थानों पर नशे का सेवन कर रहें है। यह जहां चाहे वहां अपनी नशे की लत को शांत करने बैठ जाते है। बेहद संवेदनशील रामताल वाटिका के पास बने रेलवे के लोडिंग-अनलोडिंग यार्ड में खड़े गार्ड वैगन में दिनभर नशे का सेवन होता है, लेकिन न तो स्थानीय पुलिस और नही रेलवे पुलिस को इससे कोई सरोकार है। शहर के कई प्रमुख स्थानों का जायजा लेने पर जो सच सामनें आया वह खुलेआम नशा करने वालों के खिलाफ प्रशासनिक स्तर पर उठाए जाने वाले कदमों की पोल खोलने के लिए काफी है।

शहर में कई जगह होता है नशे का धंधा

युवा पीढ़ी को नशे से बचाने के लिए सरकार समय-समय पर नशा मुक्ति अभियान चलाती है। देश का भविष्य माने जानें वाली युवा पीढ़ी को नशे की लत से बचाना शासन-प्रशासन की जिम्मेदारी है लेकिन मेरठ में कई जगह खुलेआम नशे का सामान बेचा जाता है। एक जिम्मेदार अधिकारी ने नाम न छापनें की शर्त पर बताया लिसाड़ी गेट, ब्रह्मपुरी, रेलवे रोड, नौचंदी, मछेरान व टीपी नगर जैसे इलाकों में खुलेआम प्रतिबंधित नशा बेचा जा रहा है। इनमें स्मैक से लेकर चरस व गांजा जैसा सूखा नशा शामिल है।

रेलवे के लोडिंग यार्ड में होता है नशे का सेवन

कैंट क्षेत्र से सटे डिग्गी इलाके में रेलवे का लोडिंग-अनलोडिंग यार्ड बना है। लेकिन यहां हर समय नशेड़ियों का जमघट लगा रहता है। रेलवे ट्रैक पर खड़े गार्ड वैगन में जब संवाददाता पहुंचा तो उसमें नशा कर रहे युवक मौके से भाग खड़े हुए। मगर जाते समय वह नशा करने में प्रयोग होने वाले फायल पेपर के रैपर को छोड़ गए।

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वैगन में नशेड़ियों का अड्डा बना है इसकी तस्दीक वहां पड़े खाली रैपर व बीयर आदि की खाली कैन व शराब के खाली पाऊच देखकर ही होती है। मौके पर मौजूद एक बच्चे ने बताया यहां सुबह से लेकर रात तक नशा करने वाले युवक आते है। कभी पुलिस या जीआरपीएफ के लोग चैकिंग करने नहीं आते।

प्राथमिक विद्यालय में भी मिले नशे के निशान

प्राथमिक विद्यालय केसर गंज में यूं तो रविवार होने की वजह से अवकाश था लेकिन विद्यालय परिसर में चार युवक खुलेआम शराब का सेवन करते नजर आए। वहीं स्कूल की बिल्डिंग के पास भी बीयर के खाली केन पड़े दिखाई दिए। इसी तरह घंटाघर जैसे सबसे ज्यादा व्यस्त चौराहे पर दो नशेड़ी आपस में लड़ते नजर आए,

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उन्हें देखकर साफ लग रहा था कि उन्होेंने कम से कम शराब का नशा तो नहीं कर रखा था। सर्वजनिक स्थानों पर नशे का सेवन करने से रोकना स्थानीय पुलिस की भी जिम्मेदारी है लेकिन वह इसे रोकने में नाकाम साबित हो रही है।

रेलवे की संपत्ति की हम पूरी तरह निगरानी करते हैं, लेकिन बड़ी संख्या में स्मैक का नशा करने वाले नशेड़ी मानते नहीं। कुछ दिन पहले ही एक नशेड़ी को पकड़कर हवालात में डाला गया था लेकिन उसकी हालत बिगड़ने लगी जिसके बाद उसे किसी तरह बाहर किया गया। अगर शहर में बिकने वाले नशे पर रोक लग जाए तो काफी हद तक इस समस्या से निजात मिल सकती है। -राजेन्द्र कुमार, जीआरपी, मेरठ।

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