
नीतीश कुमार के साथ अब राहुल गांधी ने भी जाति आधारित जनगणना की वकालत शुरू कर दी है। कुछ अन्य विपक्षी दल पहले ही नीतीश के सुर में सुर मिला चुके हैं। फर्ज कीजिए जाति आधारित जन गणना हो भी गई तो उससे क्या हासिल होगा? आरक्षण कुछ और बढ़ाना पड़ेगा। सामान्य वर्ग के लिए शिक्षा और रोजगार के अवसर और कम हो जाएंगे। यही तो इस मांग का आधार है। मंडल की भांति देर सबेर राजनैतिक दबाव के चलते यह भी हो ही जायेगा। परंतु इसके पैरोकारों की दृष्टि अत्यन्त संकुचित है। तात्कालिक राजनैतिक लाभ के लिए कोई भी आंदोलन छेड़ देना नीतीश जैसे नेताओं का कुल राजनैतिक कौशल है। देश और समाज पर उसका कितना घातक असर पड़ेगा, इसकी उन्हें कोई चिंता नहीं होती।