Thursday, February 12, 2026
- Advertisement -

भक्त की लाज

Amritvani


एक बार नागरिकों ने नरसी जी की बेइज्जती करने के लिए कुछ तीर्थयात्रीयो को नरसी के घर भेज दिया और द्वारिका के किसी सेठ के नाम हुंडी लिखने के लिए कहा। नरसी जी का तो वहां कोई पहचान वाला था नहीं, पर उन्होंने अपने प्रभु कृष्ण के नाम ही चिट्ठी सांवल सेठ के नाम पर लिख दी।

पहले तो नरसी जी ने मना करते हुए कहा की मैं तो गरीब आदमी हूं, मेरे पहचान का कोई सेठ नहीं जो तुम्हें द्वारका में हुंडी दे देगा, पर जब साधु नहीं माने तो उन्होंने कागज ला कर पांच सौ रुपए की हुंडी द्वारका में देने के लिए लिख दी और देने वाले (टिका) का नाम सांवल शाह ( प्रभु श्री कृष्ण ) लिख दिया। और सकुचाते हुए पांच सौ रूपए संतों से ले लिए। द्वारका नगरी में पहुंचने पर संतों ने सब जगह पता किया, लेकिन कहीं भी सांवल शाह नहीं मिले। सब कहने लगे की अब यह हुंडी तुम नरसी से ही लेना। उधर नरसी जी ने संतों से लिए पैसे का सामान लाकर भंडारा देना शुरू कर दिया। जब सारा भंडारा हो गाया तो अंत में एक वृद्ध संत भोजन के लिए आए।

नरसी जी की पत्नी ने जो सारे बर्तन खाली किए और जो आटा बचा था उस की चार रोटियां बनाकर उस वृद्ध संत को खिलाई। जैसे ही उस संत ने रोटी खाई वैसे ही उधर द्वारका में भगवान ने सांवल शाह के रूप में प्रकार हो कर संतों को हुंडी दे दी। जब नरसी जी को पता लगा की संतों को हुंडी के बदले पैसे मिल गए, वे समझ गए कि उनके आराध्य प्रभु श्री कृष्ण ने स्वयं सांवल शाह के रूप में प्रकट हो, अपने भक्त की लाज रखी। भक्त नरसी जी के नेत्रों से अपने प्रभु के प्यार और कृतज्ञता में अश्रु धारा बह निकली।

प्रस्तुति: राजेंद्र कुमार शर्मा


janwani address 6

spot_imgspot_img

Subscribe

Related articles

Air India: एअर इंडिया हादसा, इटली मीडिया ने पायलट पर लगाया गंभीर आरोप

जनवाणी ब्यूरो | नई दिल्ली: एअर इंडिया के विमान हादसे...

World News: व्हाट्सएप-यूट्यूब पर रूस की बड़ी कार्रवाई, यूजर्स को लगा झटका

जनवाणी ब्यूरो | नई दिल्ली: रूस में कई प्रमुख अंतरराष्ट्रीय...
spot_imgspot_img